shri hare krishna
Biography & History
shri hare krishna Collected Verses
वह और की आशा करे-न-करे
जो श्री हरि के नाम को अपना एकमात्र आश्रय बना चुका है, उसे किसी और से कोई आशा नहीं रखनी चाहिए। [1] जो नित्य गोकुल धाम का वासी है, उसे स्वर्ग के सुख से...
हरे कृष्ण सदा कहते-कहते
मैं सदा “हरे कृष्ण” का जाप करूँ और जहाँ मन चाहे, उस श्यामसुन्दर के रस में मग्न होकर घूमता फिरूँ। [1] मनमोहन के रूप का पान कर, उन्मत्त होकर आनंद की मस...
गिरिराज उठा कुछ ऊपर को
कोकिला का मधुर कंठ भी मौन हो गया है, और मृगी भी मोहित होकर स्थिर खड़ी है। [2] श्री हरे कृष्ण जी कहते हैं—अब क्या-क्या कहें, यमुना भी गति हीन हो गई है...
दिखाना न था नित नेह नया
एक भक्त अपने प्रिय ठाकुर श्री बाँके बिहारी से कटाक्ष करता हुआ कहता है: यदि प्रेम निभाना नहीं था, तो प्रतिदिन नया प्रेम दिखाकर हमें प्रेम-जाल में क्यों...
तुम आओ न आओ तुम्हारी रजा
हे प्रियतम श्रीकृष्ण! तुम अभी आओ या न आओ, यह तुम्हारी इच्छा पर निर्भर है, परंतु एक दिन तो तुम्हें अवश्य आना ही होगा। [1] हे प्रभु, यदि तुम्हारे भक्त ...
रस रूप मयी रस की सरिता
श्रीराधा रस का मूर्त स्वरूप हैं, रस की सरिता हैं, और सदा सुख की मूल स्रोत हैं। [1] वे पृथ्वी में अमृत बरसाने वाली ब्रज की शोभा हैं, वृषभानु की पुत्री ...