shri jugalapriya
Biography & History
shri jugalapriya Collected Verses
वृन्दावन अब जाय रहूँगी विपति न सपनेहुँ जहाँ लहूँगी
अब मैं श्री वृंदावन धाम में ही जाकर रहूँगी, जहाँ उन्मत्त भाव से भजन करूँगी और दुःखमय संसार का चिंतन सपने में भी नहीं करूंगी। चाहे कोई कुछ भी कहे या कर...
जय राधे, श्रीकुञ्ज बिहारिनि
हे कुञ्ज बिहारिणी श्री राधा, आपकी जय हो, मुझे शीघ्र श्री वृन्दावन का वास प्रदान कीजिये। वहाँ के लता-वृक्ष, यमुना जल, रज तथा सत्संग के रंग में मैं भीग ...
माई मोकों जुगलनाम निधि भाई
हे सखी, मुझे तो परम धन युगल नाम (राधाकृष्ण) ही अच्छा लगता है। संसार की समस्त सुख-संपत्ति झूठी है, यह न हमारे संग जन्म से आयी है न मृत्यु के बाद संग जा...
मैं पाऊ कृपाकरि मोहिनी
मन को मोहित करने वाले, श्री श्यामाश्याम के कुञ्ज भवन की सोहनी सेवा को कृपापूर्वक मैं कब प्राप्त करुँगी ? जहाँ श्री श्यामाश्याम के अंगों के आभूषणों की ...
बगुला भक्तन सों डरिये री
बगुला भक्तों (ढोंग एवं पाखंड करने वाले भक्तों) से डरना चाहिए। जिस प्रकार एक बगुला एक पैर पर खड़ा रहता है, ऐसा प्रतीत होता है मानो वह एक पैर पर खड़ा हो...
वृन्दावन रस काहि न भावै
ऐसा कौन है जो वृंदावन के रस से मोहित नहीं होगा? हरे-भरे वृक्षों और वल्लरियों से सुसज्जित वृंदावन, गोवर्धन पर्वत, और श्री यमुना आदि किसी को कैसे मनमोहक...
मिलन अनूठी प्यारे तिहारी
हे प्यारे, आपका मिलन अद्वितीय है। [1] आपकी कहानी, करनी और रहनी सब अनूठी हैं, जिन पर मैं बार-बार बलिहारी जाती हूँ। आपका चलना, मुड़ना और झुकना अत्यंत म...
राधा चरन की हूँ शरन
मैं श्री राधा के चरण कमलों की ही अनन्य शरण लेता हूँ, जिन श्री चरणों के आसरे श्री राधारमण लाल [कृष्ण] भी नित्य रहते हैं। [1] श्री राधा के चरण-कमल कामन...