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Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

shri kishor dasa Collected Verses

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जैति जैति सब वन नृपति, श्री वृंदावन धाम

समस्त वनों का राजा श्री वृंदावन धाम है, क्योंकि यहाँ श्यामसुंदर के वामांग में परम रमणीय स्वरूप वाली श्री स्वामिनीजी (श्री राधा) प्रेम में उन्मत्त होकर...

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मन तें श्री वृंदाविपिन

साधक को चाहिए कि वह मन से सदा वृन्दावन-विपिन में निवास करे और सखी-भाव धारण करके नित्य श्री ललना-लाल, अर्थात् राधा-कृष्ण, की मधुर छवि का दर्शन करता रहे...

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बड़ी वस्तु मधि विघन अति, होत न तनक उपाव

श्री वृन्दावन-वास फलस्वरूप है, जिसे प्राप्त करने में अनेक विघ्न आ सकते हैं। इसे प्राप्त करने का अन्य कोई उपाय नहीं; केवल नित्य किशोरी श्री राधिका की क...

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ऐसो श्री वृंदाविपुन, परम प्रेम रस रूप

श्री वृन्दावन का यह पावन धाम साक्षात् परम प्रेम और रसमय स्वरूप है। यहाँ रसिक, उपासक और संत जन अत्यंत विलक्षण और दिव्य भाव में मग्न होकर विचरण करते हैं...

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मंगल मनि आनंद निधि, परम प्रेम रस रूप

श्री वृन्दावन साक्षात् मंगलमणि और आनंद की निधि है, जो परम प्रेम-रस का ही साकार स्वरूप है। ऐसे अनुपम श्री वृंदा-विपिन की महिमा अनंत है, जिसकी तुलना संस...

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नित्य विहारिनि नित्य विहारी

विहारिणी श्री राधा नित्य हैं, विहारी श्री कृष्ण भी नित्य हैं, सुख के पुंज मनोहर निकुञ्ज भी नित्य हैं एवं जुगल किशोर श्री श्यामाश्याम का प्रेम भी नित्य...

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कर्म-धर्म, तप-क्षेत्र कोउ, कोऊ ज्ञान-मख ठौर

कहीं कर्म और धर्म की साधना की भूमि है, कहीं तप और ज्ञान-यज्ञ का क्षेत्र है; परंतु श्री वृंदावन धाम तो विशुद्ध प्रेम की भूमि है, जिसके बिना श्री किशोरद...

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वृंदावन की सुधि करत

अनेक साधक श्रीवृंदावन वास की अभिलाषा तो करते हैं, किंतु उनका कभी ऐसा संयोग घटित नहीं हो पाता। प्रभु की यह माया इतनी विचित्र है कि प्रबल इच्छा के उपरां...

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रे मन राधे राधे रटि निशिभोर

हे मन, निशिदिन राधे राधे रट। समस्त सांसारिक उपाधियों को त्याग कर, निरंतर भक्ति का अभ्यास कर जिससे तुम नित्य किशोर, श्री राधा कृष्ण के सदा अंग-संग ही र...

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रसिक अनन्य उपासिका भाव भरे रस ऐंन

रसिक अनन्य उपासक इस प्रकार भाव-विभोर होकर रस से भरे होते हैं कि वे नित्य अपने नैनों से प्रिया-प्रियतम की रसभरी लीलाओं का अवलोकन करते रहते हैं, परंतु अ...

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तिनकूँ लाड लडात निति

श्री धाम वृंदावन में परम प्रवीण प्रियतम (कुंजबिहारी) सदा प्रिया जी (श्री राधा) को लाड़ लड़ाते हैं। प्रिया जी के बदनचंद्र को चकित होकर निहारते रहते है...

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अब कब कृपा करोगी स्वामिनी

हे स्वामिनी, जो नित्य निकुंजों में नित्य विहार पारायण हैं, जिनका नाम “श्री राधे है", हे श्यामा! आप मुझ पर कब कृपा करोगी? [1] श्री किशोर दास कहते है...

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सुंदर नित्य बिहारिन वामा

सर्वोपरि नित्यविहारिनी ज़ू साक्षात श्री राधिका रानी अत्यंत मोहिनी हैं जिन्हें निरख कर अखिल विश्व को मोहित करने वाले, साक्षात कामदेव को भी मोह लेने वाल...