shri kripalu
Biography & History
shri kripalu Collected Verses
धरो मन, भानुलली को ध्यान
अरे मन ! तू निरन्तर ही वृषभानुनंदिनी राधिकाजी का ध्यान किया कर। [1] जिनका ध्यान साक्षात् ब्रह्म श्री श्यामसुन्दर भी निरंतर करते रहते हैं। [2] जिनके सि...
मन हरि में तन जगत में
जिसका मन सदा श्यामसुन्दर में अनुरक्त रहे और शरीर से संसार का कर्म संपन्न करे, वही सच्चा कर्मयोग है। किंतु जिसका मन संसार में अनुरक्त रहे और शरीर से भग...
राधे नाम लेने वाला गोविंद राधे
श्री राधे नाम लेने वाला जीव श्री राधा रानी के बल से हरि [श्री कृष्ण] की हेंकड़ी को भी धूल में मिला देता है।
श्याम की कृपा जो चाहो गोविंद राधे
यदि श्री श्याम सुंदर की वास्तविक कृपा चाहते हो तो “राधे" नाम की दिन रात रटना लगा दो।
मेरी सरकार तो है गोविंद राधे, श्री वृषभानुदुलार बता दे
मेरी सरकार तो एक मात्र श्री वृषभानुदुलार श्री राधिका हैं।
राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे
श्री राधे नाम का ऐसा अद्बुत रस है कि ब्रज की लता पता इत्यादि भी नित्य “राधे राधे" गाते हैं।
हमरी ओर टुक हेरो री किशोरी राधे
हे वृषभानुनंदिनी राधे! थोड़ा इस अधम की ओर भी अपनी कृपा-कटाक्ष युक्त दृष्टि डालिए। यद्यपि मैं यह बात पूर्ण रूप से जानता हूँ कि तुम्हारे बिना मेरा कोई भी...
प्यारी के पक्ष वारे गोविंद राधे
श्री प्यारीजू [राधा] के पक्ष वाले [जो अनन्य, निष्काम एवं नित्य श्री राधा की भक्ति करते हैं] औरों की तो क्या स्वयं भगवान श्याम सुंदर से भी नहीं भयभीत ...
हमारी राधे, अति भोरी सरकार
हमारी स्वामिनी श्री वृषभानुनन्दिनी अत्यन्त ही भोली-भाली हैं। वे बरबस शरणागत दीनजनों को अपना बना लेती हैं, एवं उसे विशुद्ध-प्रेम-दान कर देती हैं। [1] ...
सुनो मन यह अनन्य की रीत
हे मन! मैं तुमको अनन्य प्रेम का सिद्धांत समझाता हूँ, ध्यान देकर सुनो। श्यामा- श्याम का अनन्य प्रेमी केवल श्यामा-श्याम एवं उनके परिकर (सेवक) रसिक-जनों ...
बार कत करति हमारिहिं बार
हे श्री राधे! हमारी ही बार इतनी देर क्यों कर रही हो? तुम तो अपने सरल-स्वभाव-वश ‘राधे’ नाम सुनते ही अति अधीर होकर पतितों के पास आ जाया करती हो। [1] ऐस...
रहो रे मन गौर चरन लव लाई
रे मन! तू भी वृषभानुनंदिनी श्री राधिका जू के उन कमल-कोमल-युगल-अरुण चरणों से प्रेम कर, जिन चरणों की चरण-धूलि का ब्रह्म-श्रीकृष्ण भी सेवन करते हैं। [1] ...