श्री ललितकिशोरी देव जी निज आश्रितजनों को आज्ञा करते हुये कह रहे हैं "हे भाई! निधिवनराज का सदैव जय-जयकार करते रहो, जहाँ श्री युगल का निरंतर नित्य विहार...