कोटि भक्तों में एक ही विशुद्ध भक्त होता है, और उन कोटि विशुद्ध भक्तों में भी एक रसिक होता है; तथा उन रसिकों में भी अनन्य रसिक अत्यन्त दुर्लभ होता है।