shri nndadas grnthavali
Biography & History
shri nndadas grnthavali Collected Verses
और ठौर की आगि पिय, पानी पाय बुझाय
हे प्रियतम! यदि किसी जगह आग लग जाती है, तो पानी वह आग बुझा देता है; परंतु यदि पानी में ही आग लग जाए, तो कहाँ जाकर बुझाया जाए? (भाव यह है कि जो श्रीकृष...
पुनि तिनकी पद-पंकज-रज
ब्रजांगनाओं के चरण-कमलों की रज की अभिलाषा स्वयं ब्रह्मा जी भी करते हैं, और उद्धव भी अपनी विशुद्ध बुद्धि से बार-बार उसी दिव्य रज की कामना करते हैं।
जलचर ज्यों जलभीर मै जानत नाहिन पीर
जैसे जलचर जल में रहते हुए जल-वियोग की पीड़ा से अनभिज्ञ रहता है, परंतु उससे पृथक होते ही उसकी वेदना का अनुभव करता है, वैसे ही प्रभु-वियोग की वास्तविक प...
नंददास सौं नंदसुवन, जौ करुना कीजै
हे नंदनंदन,श्री कृष्ण! यदि आप मुझपर करुणा करना चाहते हैं तो मुझे अपने निज भक्तों के चरणों का रस अनुराग प्रदान कीजिए।
भक्त पै करी कृपा श्रीजमुना जू ऐसी
भक्तों पर श्री यमुना जी विशेष कृपा करती हैं। [1] श्री यमुना जी अपने निज-धाम को छोड़ कर इस भूतल पर आयी हैं, एवं श्री श्यामाश्याम की प्रकट केलि-लीला का ...
वृंदावन बंसीवट जमुनातट बंसी रट
यमुना के तट पर, बंसीवट की शीतल छाया में, बांसुरी की मधुर ध्वनि गूँज रही है। रसिक श्रीकृष्णचंद्र ने वन में रास लीला का दिव्य आयोजन रचा है। [1] राधा और...
अरी तेरी सहज की मुसिक्यान
इस पद में सखियाँ श्री राधा की सुंदरता और उनके प्रति श्री कृष्ण के समर्पण का वर्णन करती हुई कहती हैं कि हे सखी! तेरी सहज मनमोहक मुस्कान ने श्री कृष्ण क...
बड़ौ मन्द अरविन्द सुत
बड़ौ मन्द अरविन्द सुत, जिहि न प्रेम पहिचान। पिय मुख देखत दृगन के, पलक लगे बिच आन॥ - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, विरह मंजरी (13) सृष्टिकर्ता ...