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Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

shri nndadasa Collected Verses

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पोढ़े श्यामा श्याम संग

श्री कृष्ण श्री राधा के संग रंग महल में विराज रहे हैं। [1] रंग महल में तीन द्वार हैं जिसमें रंगीन परदे लगे हुए हैं। [2] कई रंगों के अनमोल रत्नों से ज...

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कृष्ण नाम जबतें श्रवण सुन्यो री आली

श्री नंददास जी एक सखी रूप से अन्य सखी से कहते हैं कि - हे सखि ! जब से कानो में कृष्ण का नाम सुना है , तब से मैं अपना घर संसार भूल, बाँवरी बन गयी हूँ। ...

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देखों देखों री नागरनट

श्री नंददास कहते हैं "अरे सखी, तनिक देखो तो नागरनट को, सर पर मुकुट लटक रही है, श्री यमुना के पुलिन पर गोपियों के मध्य कैसा अनुपम नृत्य कर रहे हैं।" [1...

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तेरी भौंह की मरौरन तें

इस पद में श्री राधिका मान करी हुई हैं और उनको मनाने एवं श्याम सुंदर से मिलवाने के लिए श्री नंददास प्रयत्न कर रहे हैं। वे कहते हैं: हे प्यारी राधिके, ...

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जाकौं वेद रटत ब्रह्मा रटत

जिसके नाम को वेद रटते हैं, ब्रह्मा रटते हैं, भगवान शिव रटते हैं, शेष रटते हैं, नारद, शुकदेव एवं वेद व्यास जी रटते हैं लेकिन पार नहीं पाते। [1] जिसके...

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श्री वृंदावन चिद्घन घन

श्री वृंदावन धाम चिद्घन है, जिसकी छवि अत्यंत मनमोहक है, जहाँ नंदनंदन श्री कृष्ण का नित्य निवास है, जिसकी महिमा शास्त्रों द्वारा गाई गई है।

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सब सुख-रासि लाडिली राधा

लाडिली श्री राधा समस्त सुखों की राशि हैं, जिनके प्रेम-रस के प्रभाव में नित्य ही कुंज बिहारी (श्री कृष्ण) वश में रहते हैं। उनका स्मरण करने से अनंत जन्म...

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बेसर कौन की अति नीकी

श्री राधा और श्री कृष्ण दोनों ने अपनी बेसर (नथ) पर दांव लगाया और ललिता जू से पूछा, "किसकी नथ अधिक सुंदर है?" [1] श्री नंददास जी कहते हैं कि युगल किशो...

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गर्व करो जिनि भूलि कोउ

यदि किसी जीव के मन में घर-परिवार, जन-सम्पत्ति या वैभव का अभिमान उत्पन्न हो जाए, तो उसे स्मरण करना चाहिए कि स्वर्ग के सम्राट इंद्र का गर्व भी भगवान कृष...

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जो गिरि रुचे तो वसो श्री गोवर्धन

यदि पर्वत रुचिकर हो तो श्रीगोवर्धन में निवास करो, यदि ग्राम रुचिकर हो तो नंदगाँव में निवास करो। [1] यदि तुम्हें नगर रुचिकर हो तो मधुपुरी (मथुरा) में ...

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जद्यपि नित्य किसोर हरि

यद्यपि वेद कहता है कि कमलनयन श्रीहरि शाश्वत रूप से किशोर अवस्था में ही विराजमान रहते हैं, तथापि ब्रजवासियों को बाल्य और पौगंड आदि समस्त अवस्थाओं का सु...

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कै ह्वै रहौं द्रुम गुल्म लता बेली बन माहीं

ब्रह्मज्ञानी उद्धव भगवान श्री कृष्ण से कहते हैं — “हे प्रभु! अब मैं सदा-सदा के लिए ब्रज का कोई वृक्ष, लता या वेलि बनकर ब्रज में ही रहना चाहता हूँ, ताक...

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अब रहिहौं ब्रजभूमि की ह्वै पगमारग धूरि

ब्रह्मज्ञानी उद्धव कहते हैं—“हे प्रभु! अब मैं सदा के लिए ब्रज में ही ब्रज की रज बनकर वास करना चाहता हूँ, ताकि जब यह प्रेम की ध्वजा स्वरूप ब्रजांगनाएँ ...

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गोपी प्रेम प्रसाद सो, हौ ही सीख्यौ आय

गोपियों के निष्काम प्रेम के प्रभाव एवं कृपा प्रसाद से आज उद्धव जैसे ब्रह्मज्ञानी भी, ज्ञान/योग की सब दुविधाएँ मिटाकर, प्रेम-मार्गी रसिक हो गए।

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श्रीवृषभान नृपति के आंगन

आज सब जन राजा श्री वृषभानु के प्रांगण में बधाई गीत गाकर उत्सव मना रहे हैं जहाँ रानी कीर्ति की कोख में समस्त गुणों से युक्त, सुख की खानी स्वरूपा एक पु...

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नंद भवन को भूषण माई

श्री कृष्ण नंद भवन के भूषण हैं, यशोदा के प्यारे लाल हैं, वीर बलराम के भाई हैं और श्री राधा को सुख देने वाले हैं। [1] वे इंद्र के स्वामी, देवताओं के द...

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यमुना पुलिन सुभग वृन्दावन

सुंदर श्री वृंदावन धाम का नित्य नवीन यमुना पुलिन अत्यंत मनोहर है, जहाँ गोवर्धन को धारण करने वाले नवल श्यामसुंदर विराजमान हैं। [1] कुंज भी नित्य नवी...

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चाँपत चरन मोहनलाल

श्रीकृष्ण वृंदावन में श्री राधिका जी के चरणों को दबा रहे हैं। ब्रज की प्यारी, नित्य किशोरी श्री राधा अपने शयन स्थान पर विराजमान हैं। कभी-कभी वे उन चरण...

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छबीले नील घन की पूतरी

हे सखी! नील मेघ सदृश कोई छबीली रूप-मूर्ति (श्री कृष्ण) इस वृन्दावन में क्रीड़ा कर रही है। उनके अंग-अंग पर विविध आभूषण सुशोभित हैं, अधरों पर मधुर बंसी ...

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पिय प्यारी के चरण पलोटत

श्री कृष्ण श्री राधा के चरण दबा रहे हैं, श्री ललिता एवं अन्य सखी पंखा झलने के लिए आती हैं तब श्री राधा घूँघट ओढ़ लेती हैं। [1 & 2] श्री राधा कृष्ण एक...

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पोढ़े श्याम श्यामा संग

श्री श्यामसुंदर श्री श्यामा जू के संग रंग महल में पौढ़े हैं एवं द्वार पर सुरंग पर्दा लगा हुआ है। [1 & 2] कक्ष में अंगीठी जल रही है जिसका प्रकाश श्री श्...