निरखत नित्य विहार, पुलकित तन रोमावली। आनंद नैन सुढार, यह जू कृपा हरिवंश की। - श्री सेवक जी (दामोदर दास) - श्री सेवक वाणी नित्य विहार का दर्शन हो रहा ह...