sknd purana
Biography & History
sknd purana Collected Verses
न दृष्टा मथुरा येन दिदृक्षा यस्य जायते
यदि ब्रज के दर्शन करने की इच्छा रखने वाला कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा पूरी होने से पहले ही प्राण त्याग देता है, तो वह निश्चित ही वह पुनः ब्रज में जन्म ल...
तस्या एवांश विस्तारा
रुक्मिणी सत्यभामा आदि श्रीकृष्ण की जितनी भी रानियाँ और पटरानियाँ हैं, वे सब श्री राधा के अंश से ही आविर्भूत हैं। राधा और कृष्ण सदा-सर्वदा एक दूसरे के ...
भूमे रजांसि गणयेत्कालेनाऽपि चतुर्मुख
हे राजा, समय के दौरान पृथ्वी के रज कणों को गिनना संभव हो सकता है, लेकिन ब्रज में पवित्र तीर्थ स्थानों की गणना करना संभव नहीं होगा।
अत्रैव व्रजभूमिः सा यत्र तत्त्वं सुगोपितम्
भू आदि लोकों में मथुरा मंडल की वही ब्रजभूमि है, जहाँ वह परम गुप्त तत्व स्थित है। भगवान की कृपा से, कदाचित जिस व्यक्ति के हृदय में पूर्ण प्रेम का आविर्...
मथुरायां प्रकुर्वंति पुरीसाधारणीदृशम्
जो परम पावन नगरी मथुरा (एवं ब्रज) को साधारण स्थान मानते हैं, उन्हें पापों के भारी बोझ से दबा हुआ समझना चाहिए।
न पापेभ्यो भयं यत्र
जहाँ पापों का भय नहीं है, जहाँ यमराज (मृत्यु) का भय नहीं है, और जहाँ गर्भवास का भय नहीं है, ऐसे दिव्य मथुरा क्षेत्र (ब्रज) की शरण कौन नहीं लेगा?
मथुरामपि संप्राप्य योऽन्यत्र कुरुते स्पृहाम्
यदि मथुरा (ब्रज) पहुँचकर भी कोई अन्य स्थान की इच्छा करे, तो उस दुर्बुद्धि व्यक्ति को अभी पूर्ण ज्ञान कहाँ है? वह तो अपनी अज्ञानता ही प्रकट करता है।
तस्मिन्नन्दात्मजः कृष्ण
उस व्रजधाम में नंदकुमार श्रीकृष्ण, जिनका श्रीविग्रह नित्य आनंदमय है, जो आत्माराम और आप्तकाम हैं, वे केवल प्रेम में रंगे हुए भक्तों द्वारा ही साक्षात् ...
गुणातीतं परं ब्रह्म व्यापकं ब्रज उच्यते
जो परम ज्योति सदा आनंदमय है, वही परम ब्रह्म है , जो सत्व,रज तथा तम, तीनों गुणों से परे है, सर्व व्यापक है, इसी को श्री ब्रज धाम कहते हैं, जहाँ मुक्त म...