श्री भगवत् रसिक अपनी रसोपासना में सखियों को प्रिया–प्रियतम के अंगों में निवास करने वाली बताते हैं—जैसे दिनकर और उसकी किरणें, जो एक-दूसरे से हर क्षण अभ...