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देखौ माई सुंदर कुंज बनी
हे सखी, देखो कितनी सुंदर कुंज बनी है। नवल नागरी और नागर वहाँ विराजमान हैं जिसकी अत्यंत सुंदर छवि का वर्णन करना सर्वथा असम्भव है। [1] आज वृंदावन की कु...
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सजनी नव निकुंज सु केलि
हे सखी, श्री प्रिया प्रियतम की नव निकुंज की केलि परम अद्बुत है। गौर वर्ण श्री राधिका श्याम वर्ण श्री कृष्ण से ऐसे आनंद से लिपटी हैं मानों तमाल वृक्ष स...
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किशोरी ! मेरी जीवन प्राण
श्री लाल जी के वचन श्री प्रिया जी से: हे किशोरी जी केवल आप ही मेरी जीवन प्राण हो, मैं बार बार ऐसा कह कर तुमको क्या समझाऊँ, मेरी अन्य दूसरी कोई गति है...