SaintsBooksRagasShlokasStrotrasPoems
HomeGranthasब्रजनिधि पद संग्रह
All Books
Sacred Scripture

ब्रजनिधि पद संग्रह

Verses & Passages

5 items
general

बरसत रंग-महल मैं रंग

रंग महल में रंग बरस रहा है। दोनों श्री श्यामाश्याम उत्सुकता से बढ़-चढ़कर तान ले रहे हैं और सरस नृत्य कर रहे हैं। [1] श्री ललिता जू ललित मृदंग बजा रही ह...

general

देखत मुख सुख होत अधिक मन

सुख की मूर्ति, वृषभानु दुलारी श्री राधा के मुख कमल को देखकर मन में अपार आनंद होता है। [1] दुःख का हरण करने वाली श्री राधा के कमल नयनों को प्रत्येक ...

general

छबीली बिहारिनि की छबि पर बलिहारी

छबीली बिहारिनि श्री राधा जू की छवि पर मैं स्वयं को न्योंछावर करता हूँ। ब्रज की नित्य नवल किशोरी, सखियों की शिरोमणि, श्री श्यामा जू ने कुञ्ज-बिहारी श्र...

general

हम तौ राधाकृष्न-उपासी

हम तो केवल श्री राधा-कृष्ण के ही उपासक हैं। गौर वर्ण की श्री राधा और श्याम वर्ण के श्री कृष्ण की यह जोड़ी अत्यंत अभिराम, मनमोहक और सुख की राशि है। [1] ...

general

छबीली राधे कब दरसन दैहौ

हे छबीली राधे! मुझे कब आप अपने दर्शन से तृप्त करेंगीं? मेरी अँखियाँ चकोरी पक्षी की भाँति आपके चंद्रमुख की सुधा-रस पान करने के लिए व्याकुल हैं। [1] आप...