Verses & Passages
62 itemsकौन चतुर जुवती प्रिया
भावार्थ - "(श्रीहित अलि ने कहा-) हे लाल ! ऐसी कौन चतुर युवती प्रेयसी है (जिससे) आप रात्रि में चोरी चोरी मिलते हैं ? [1] हे प्यारे ! आनन्द विलास रंजित ...
नंद के लाल हरयौं मन मोर
श्रीप्रियाजी ने कहा- “ सखि ! नन्द नन्दन ने तो मेरा मन हर लिया है। मैं अपने भवन में बैठी मुक्ता माल पिरो रही थी उन्होंने सबेरे सबेरे मुझ पर काँकरी फेंक...
यह जु एक मन बहुत ठौर करि
यह पद श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने श्री हरिराम व्यास के प्रश्नों के उत्तर में कहा था, जिसके बाद श्री हरिराम व्यास जी उनके शिष्य बन गये थे। श्री हित महा...
आजु बन राजत जुगल किसोर
आज श्रीवृन्दावन में युगलकिशोर श्रीश्यामाश्याम शोभायमान हैं। श्रीनन्दनन्दन और श्रीवृषभानुनन्दिनी सम्पूर्ण रात्रि प्रेम विहार करने के बाद उनींदी अवस्था ...
बैठे लाल निकुंज भवन
श्री हित सखी ने फिर कहा- “ हे मानिनि [श्री राधे] ! लाल ( तुम्हारी प्रतीक्षा करते हुए ) निकुञ्ज भवन में बैठे हैं। ( इस समय ) कैसी सुन्दर रुचि दायक रात...
आजु गोपाल रास रस खेलत
( श्रीहित सजनी ने कहा – ) अरी सजनी ! आज विमल कल्पवृक्ष के तीर यमुना पुलिन पर श्रीगोपाल लाल रास क्रीड़ा कर रहे हैं। सजनी ! जैसा निर्मल शरद का समय है व...
प्रीति न काहु की कानि बिचारै
प्रीति किसी की मर्यादा नहीं मानती। अरे ! प्रेम से विशेष विवश मन को किसी मार्ग कुमार्ग की ओर जाने से कौन निवारण कर सकता है ? [1] श्रावण मास के जल से उ...
आजु तौ जुवति तेरौ वदन
हे युवति ! तुम्हारा जो यह मुख आनन्द से प्रफुल्लित है उसी से तुम्हारे प्रियतम सङ्गम जनित सुख की सूचना मिल रही है। जैसे तुम्हारे बोल आलस्य से लटपटाये ह...
आवति श्रीवृषभानु दुलारी
भावार्थ- श्रीहित सखी ने कहा- हे सखियो अत्यन्त चतुर शिरोमणि, रूप की राशि (अपार रूपवती) एवं अङ्ग–अङ्ग में परम सुकुमारी श्रीवृषभानु दुलारी आ रही हैं। [1...
तेरे नैंन करत दोऊ चारी
[हे राधे !] तेरी दोनों आँखें ही तो चारी (चुगल खोरी) कर रही हैं, बता रही हैं ! कितनी प्रसन्न है ये ? इनकी प्रसन्नता मानो कहीं समाती नहीं [इसी से विदित ...
अधर अरुन तेरे कैसे कै दुराऊँ
(हित सखि ने कहा -) हे रसिक वर लाल ! आपके अत्यन्त अरुण अधरों का राग किस प्रकार छिपाऊँ ? [1] यदि मैं कदाचित् उन अधरों की अद्भुतता कुसुम रंगों से रंजित ...
सुधंग नाचत नवल किसोरी
नवल किशोरी राधिका आज सुधंग नृत्य नाच रही है और थेइ थेई कहते हुए अपने प्रियतम के मुख चन्द्र की ओर ऐसे देखती है जैसे ( रूप की ) प्यासी चकोरी। [1] नृत...
खंजन मीन मृगज मद मेंटत
हे प्रिया, मैं तुम्हारे नेत्रों की बात क्या कहूँ ? यह अपनी चंचलता से खंजन का, तिरछी गति से मीन का, और भोलेपन से मृगछोना का मद चूर चूर कर रहे हैं। सुन...
चलि सुंदरि बोली वृंदावन
(दूतिका ने श्रीप्रियाजी से कहा- ) हे सुन्दरि ! चलो !! तुम्हें ( प्रियतम ने ) वृंदावन में बुलाया है। हे कामिनि ! तुम तो हो दामिनि जैसी और मोहन नूतन घन ...
काहे कौं मान बढ़ावतु है
मानवती श्रीराधा के मान मोचन के लिये उनको विदग्धता पूर्वक समझाती हुई श्री हित सजनी कहती हैं “हे मृगछौना जैसे भोले एवं रसीले नेत्र वाली (श्रीप्रिया) मान...
नैंननिं पर वारौं कोटिक खंजन
( हे राधे ! तुम्हारे ) नयनों पर मैं कोटि कोटि ख़ंजनों को भी न्यौछावर कर दूँ। ( कितने सुन्दर हैं तुम्हारे नयन ? ) चंचल हैं , अत्यन्त चपल हैं , अरुण है ...
मोहनलाल के रसमाती
हे राधे ! तू मोहन लाल के रस में उन्मत्त है। हे नव वधू ! उस एकान्त मिलन की गोप्य बात को क्यों मुझसे छिपा रही है? इसीलिये न कि प्रथम स्नेह के कारण संकोच...
बैंनु माई बाजै बंसीवट
हे सखी! वंशीवट में श्री कृष्ण की वंशी की मधुर ध्वनि गूँज रही है। श्री धाम वृन्दावन के परम पावन एवं सुन्दर यमुना तट में सदा वसंत ही रहता है। [1] श्री ...
आज नीकी बनी श्रीराधिका नागरी
भावार्थ- “हे सखि ! आज नागरी राधिका बड़ी नीकी (सुन्दर) बनी हैं। वे समस्त ब्रज युवती समूह में रूप, चातुर्य शील श्रृंगार एव गुण सभी बातो में सबसे बढ़ी-चढ़...
आजु निकुंज मंजु में खेलत
सुन्दर निकुंज मंदिर में नवल किशोर श्याम एवं नवल किशोरी श्री राधा रस क्रीड़ा संलग्न हैं। दोनों का पारस्परिक अनुराग भी अति अनुपम है। यह अनोखी जोड़ी भूतल...
नयौ नेह नव रंग नयौ रस
आज नवल श्याम और नवल वृषभानु किशोरी में (परस्पर) नवीन स्नेह, नवीन आनन्द एवं नया ही रस भर रहा है। यहाँ श्याम सुन्दर का नया पीत पट है तो वहाँ वृषभानु क...
हित हरिवंश प्रपंच बंच सब काल व्याल कौ खायौ
हित हरिवंश प्रपंच बंच सब काल व्याल कौ खायौ । यह जिय जानि स्याम स्यामा पद कमल संगि सिर नायौ । । - श्री हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (59) श्रीहि...
अति उदार विवि सुंदर
श्री हित हरिवंश चन्द्र महाप्रभु कहते हैं कि हे अति उदार और परम सुन्दर युगल किशोर, हे सुरत क्रीड़ा के शूरवीर सुकुमार युगल वर! आप दोनों दिन-रात (नित्य न...
बनी वृषभानु नंदिनी आजु
भावार्थ -आज श्रीवृषभानु नन्दिनी कैसी सुंदर बनी हैं। उन्होंने अपने प्रियतम मोहन के लिये विविध भूषण वस्त्र सज्जित करके आपने श्रीवपु में धारण कर रखे हैं।...
आजु प्रभात लता मंदिर में
मंगल प्रभात की वेला में हर्षोन्मादित युगल किशोर अलसाये हुए लटक लटक कर लता भवन की मंजुल भूमि पर मादक गति से चलते हैं। [1 & 2] वृन्दावन निकुञ धाम में स...
राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
हित सखी (श्री हरिवंश महाप्रभु) भाव-विभोर होकर कहती हैं— हे प्यारी राधे! आज तुम्हारे नेत्र अत्यंत चंचल और मदमाते हैं। तुमने अपनी अनन्य प्रीति, अनुराग औ...
कहा कहौं इन नैंननि की बात
भावार्थ - श्री लालजी अपनी प्रिय सखी हित सजनी से कहते है - सखी, मैं अपने इन नयनों की क्या बात कहूँ ? ये मेरे नयन भ्र्मर श्रीप्रिया मुख कमल के रस में अट...
बनी श्रीराधा मोहन की जोरी
भावार्थ-अति अनुपम जोड़ी है श्री राधा मोहन की। मनोहर श्याम सुन्दर इन्द्र नील मणि की भाँति हैं। तो वृषभानु किशोरी श्रीराधा काञ्चन तनु हैं।लाल के विशाल भ...
नागरता की रासि किसोरी
भावार्थ- किशोरी राधिका सुन्दरता की राशि हैं। इन्होंने नव नागर समूह के भी सिरमौर श्याम सुन्दर को अपनी चितवन और ललितभाव से मुख मोड़ने की क्रिया से ही ...
(जै श्री) हित हरिवंश प्रताप रूप गुन वय बल स्याम उजागर
श्रीहित हरिवंश चन्द्र (महाप्रभु) कहते हैं, मैं इतना ही कहूं -"श्रीश्याम सुन्दर तो प्रताप, रूप, गुण, आयु (वय) एवं बल सभी बातों में उजागर हैं -प्रगट है...
देखौ माई सुंदरता की सीवाँ
भावार्थ- श्रीहित सखी (श्री हित हरिवंश महाप्रभु) कहती हैं- हे सखियों ! सुन्दरता की सीमा (श्रीराधा) को तो देखो !जिस नागरी को देख कर समस्त व्रज की नव युव...
प्रथम जथामति प्रनऊँ श्री वृन्दावन अति रम्य
मैं सबसे प्रथम अतिरमणीय श्री वृन्दावन को प्रणाम एवं वर्णन करता हूँ, जो एकमात्र किशोरी श्री राधिका की कृपा के बिना सर्वथा अगम्य (प्रवेश न पा सकने योग्य...
अति नागरी वृषभानु किसोरी
श्री कृष्ण बोले - हे दूतिका! वृषभानु किशोरी अत्यंत चतुर हैं, जब वह चपल मृगलोचनि गोरी अपने मनोहर नेत्रों से अवलोकन करती हैं तो मानो उसी क्षण देखते ही च...
हौं बलि जाँउ नगरी श्याम
भावार्थ - श्री हित सजनी आशीर्वाद देती हैं - "हे नागरी ! (श्री राधा) हे श्री श्याम (श्री कृष्ण) मैं आप पर बलिहार जाऊं।(आप दोनों) वृंदावन की सुंदर कुंज ...
प्रीति की रीति रँगीलोइ जानै
भावार्थ-प्रीति की रीति तो केवल रँगीले गीले (प्रेमी) श्रीलालजी ही जानते हैं, अन्य कोई नहीं; तभी तो वे समस्त लोकों के अधिनायक-सिर मौर होकर भी अपने आप को...
देखौ माई अबला के बल रासि
(श्री हित सजनी ने अपनी सखियों से कहा ) "हे माई ! देखो ! अबला ( श्रीराधा ) के बल राशि को तो देखो ! जिन श्रीराधा को देखते ही अत्यंत मतवाले एवं निरंकुश ग...
राधे देखि वन की बात
प्यारी राधे ! श्रीवृन्दावन की छटा तो देखो ! बसंत ऋतु अनन्त पुष्प फल और पत्रों से मुकुलित है-खिली हुई है। [1] (ऐसे समय में) वेणु ध्वनि के द्वारा श्रीन...
आजु देखि व्रज सुन्दरी मोहन बनी केलि
भावार्थ - (श्रीहित सजनी कहती हैं-) "सखियों! देखो आज ब्रज सुंदरी श्रीराधा और मोहन की क्रीड़ा (कैसी भली) बनी है। [1] रूप की राशि युगल किशोर परस्पर एक के...
आजु नागरी किसोर, भाँवती विचित्र जोर
आज रस विदग्धा श्रीराधा एवं ललित नायक श्याम सुन्दर अनुपम छटा से शोभित हैं। अंग प्रत्यंग से प्रस्फुट रूप माधुर्य्य अवर्णनीय है। [1] सहचरि परिकर में अन...
बनी श्रीराधा मोहन की जोरी
अति अनुपम जोड़ी है श्रीराधा मोहन की। मनोहर श्याम सुन्दर इन्द्र नील मणि की भाँति हैं। तो वृषभानु किशोरी श्रीराधा काञ्चन तनु हैं। [1] लाल के विशाल भाल प...
प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी
(श्री हित अली ने कहा-) हे भामिनि। (तुम्हें) प्यारे (श्रीकृष्ण) ने बुलाया है। (देखो) आज (कैसी) सुन्दर रात्रि है ? अतः आप नवीन मेघ रूप (श्रीलालजी) से ऐस...
अति उदार विवि सुंदर
श्री हित हरिवंश चन्द्र महाप्रभु कहते हैं कि हे अति उदार और परम सुन्दर युगल किशोर, हे सुरत क्रीड़ा के शूरवीर सुकुमार युगल वर! आप दोनों दिन-रात (नित्य न...
प्रथम जथामति प्रनऊँ श्री वृन्दावन अति रम्य
मैं सबसे प्रथम अतिरमणीय श्री वृन्दावन को प्रणाम एवं वर्णन करता हूँ, जो एकमात्र किशोरी श्री राधिका की कृपा के बिना सर्वथा अगम्य (प्रवेश न पा सकने योग्य...
नयौ नेह नव रंग नयौ रस
आज नवल श्याम और नवल वृषभानु किशोरी में (परस्पर) नवीन स्नेह, नवीन आनन्द एवं नया ही रस भर रहा है। यहाँ श्याम सुन्दर का नया पीत पट है तो वहाँ वृषभानु किश...
सुनि मेरो वचन छबीली राधा, तैं पायो रस सिंधु अगाधा
(राग आसावरी) सुनि मेरो वचन छबीली राधा, तैं पायो रस सिंधु अगाधा ।। तूँ वृषभानु गोप की बेटी, मोहनलाल रसिक हँसि भेंटी । जाहि बिरंचि उमापति नाये, तापै तैं...
प्रीति की रीति रँगीलोइ जानै
भावार्थ-प्रीति की रीति तो केवल रँगीले गीले (प्रेमी) श्रीलालजी ही जानते हैं, अन्य कोई नहीं; तभी तो वे समस्त लोकों के अधिनायक-सिर मौर होकर भी अपने आप को...
वन की लीला लालहिं भावै
श्रीलालजी को वन की लीला बड़ी प्यारी लगती है, तभी तो उन्हें वहाँ के फूल पत्तों पर पड़े हुए प्रति बिम्बों में भी नख सिख प्रिया रूप ही ज्ञात होता रहता है...
काहे कौं मान बढ़ावतु है
मानवती श्रीराधा के मान मोचन के लिये उनको विदग्धता पूर्वक समझाती हुई श्री हित सजनी कहती हैं “हे मृगछौना जैसे भोले एवं रसीले नेत्र वाली (श्रीप्रिया) मान...
जोई जोई प्यारो करे सोई मोहि भावे
श्री हित चौरासी जी के इस प्रथम पद में श्री राधा, श्याम सुन्दर के हृदय और नेत्रों में विराजमान परस्पर अद्बुध प्रेम का संक्षिप्त एवं अत्यंत मार्मिक वर्ण...
अति नागरी वृषभानु किसोरी
श्री कृष्ण बोले - हे दूतिका! वृषभानु किशोरी अत्यंत चतुर हैं, जब वह चपल मृगलोचनि गोरी अपने मनोहर नेत्रों से अवलोकन करती हैं तो मानो उसी क्षण देखते ही च...
प्रात समै दोऊ रस लंपट
भावार्थ - प्रातः काल दोनों रस लम्पट सुरत-युद्ध में विजय एवं प्रसन्नता पूर्वक संलग्न हैं। [1] मुख पर श्रम वारि (प्रस्वेद) की सघन बूँदें शुभ्र मौक्तिक ज...
अति ही अरुन तेरे नयन नलिन री
भावार्थ - अरी सखि ! आज तुम्हारे नयन कमल बड़े अरुणिम हैं। [1] रात्रि भर विलास एवं जागरण के चाव से अत्यन्त आलस्य युक्त हो रहे हैं। मिलन के गौरव से गर्वि...
अति नागरि वृषभानु किसोरी
(राग सारंग) अति नागरि वृषभानु किसोरी। सुनि दूतिका चपल मृगनैंनी, आकरषत चितवत चित गोरी।। श्रीफ़ल उरज कंचन सी देही, कटि केहरि गुन सिंधु झकोरी। बैंनी भुजंग...
(जै श्री) हित हरिवंश प्रताप रूप गुन वय बल स्याम उजागर
श्रीहित हरिवंश चन्द्र (महाप्रभु) कहते हैं, मैं इतना ही कहूं -"श्रीश्याम सुन्दर तो प्रताप, रूप, गुण, आयु (वय) एवं बल सभी बातों में उजागर हैं -प्रगट हैं...
आज नीकी बनी श्रीराधिका नागरी
भावार्थ- “हे सखि ! आज नागरी राधिका बड़ी नीकी (सुन्दर) बनी हैं। वे समस्त ब्रज युवती समूह में रूप, चातुर्य शील श्रृंगार एव गुण सभी बातो में सबसे बढ़ी-चढ़...
आजु निकुंज मंजु में खेलत
सुन्दर निकुंज मंदिर में नवल किशोर श्याम एवं नवल किशोरी श्री राधा रस क्रीड़ा संलग्न हैं। दोनों का पारस्परिक अनुराग भी अति अनुपम है। यह अनोखी जोड़ी भूतल ...
नागरता की रासि किसोरी
भावार्थ- किशोरी राधिका सुन्दरता की राशि हैं। इन्होंने नव नागर समूह के भी सिरमौर श्याम सुन्दर को अपनी चितवन और ललितभाव से मुख मोड़ने की क्रिया से ही वश...
कहा कहौं इन नैंननि की बात
भावार्थ - श्री लालजी अपनी प्रिय सखी हित सजनी से कहते है - सखी, मैं अपने इन नयनों की क्या बात कहूँ ? ये मेरे नयन भ्र्मर श्रीप्रिया मुख कमल के रस में अट...
बनी श्रीराधा मोहन की जोरी
भावार्थ-अति अनुपम जोड़ी है श्री राधा मोहन की। मनोहर श्याम सुन्दर इन्द्र नील मणि की भाँति हैं। तो वृषभानु किशोरी श्रीराधा काञ्चन तनु हैं।लाल के विशाल भ...
हित हरिवंश प्रपंच बंच सब काल व्याल कौ खायौ
श्रीहित हरिवंश चन्द्र महाप्रभुपाद कहते हैं यह विश्व प्रपञ्च एक दम झूठा है – असत् है और काल सर्प से ग्रसित है ( अर्थात् अवश्य विनाशी है , ) ऐसा अपने हृ...
Bainu Mai Baaje Bansivat
(Raag Gauri)Bainu Maai Baajai Bansivat.Sada Basant Rahat Vrindavan Pulin Pavitra Subhag Yamuna Tat. [1]Jatit Kreet Makarakrit Kundal Mukhaarvind Bhanv...
Radha Pyari Tere Nain Salol
(Raag Dhanashri)Radha Pyari Tere Nain Salol. Tain Niju Bhajan Kanak Tan Jovan, Liyau Manohar Mol. [1] Adhar Nirang Alak Lat Chhuti, Ranjit Pik Kapol. ...