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Sacred Scripture

खण्डः 5 (पातालखण्डः)

Verses & Passages

9 items
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गोविंददेहतोऽभिन्नं पूर्णब्रह्मसुखाश्रयम्

गोविंददेहतोऽभिन्नं पूर्णब्रह्मसुखाश्रयम्। मुक्तिस्तत्र रजःस्पर्शात्तन्माहात्म्यं किमुच्यते॥ - पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 69, छंद 72 यह ...

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कथितं ते प्रियतमे गुह्याद्गुह्योत्तमोत्तमम्

हे प्रियतम, मैंने तुमको गोपनीय से भी गोपनीय, रहस्यों का भी रहस्य, दुर्लभों से भी दुर्लभ सर्वोच्च श्री वृंदावन धाम के बारे में ही बताया है।

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तत्स्पर्शपुष्पगंधादि नानासौरभसंभवः

श्री कृष्णवल्लभा श्रीराधिका ही आद्याप्रकृति हैं। उन राधिका के कोटि-कोटि कलांश से ही त्रिगुणमयी दुर्गा आदि देवियों का प्रादुर्भाव होता है। उन राधिका के...

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इदमानंदकंदाख्यं विद्धि वृंदावनं

श्री कृष्ण कहते हैं: हे रुद्र, यह आनंद कंद ही मेरा निज धाम वृन्दावन है। इसमें प्रवेश मात्र से ही जीव सांसारिक आवागमन से मुक्त हो जाता है। जो मूर्ख मे...

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सकृदावां प्रपन्नो वा

श्री कृष्ण शिव जी से कहते हैं - जो एक बार हम दोनों (मैं और श्री राधा) की शरण में आकर अथवा केवल मेरी प्रिया (श्री राधा) की शरण में आकर उनकी अनन्य भाव स...

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वृंदावनपरित्यागो गोविंदस्य न विद्यते

श्री वृंदावन धाम को गोविंद कभी भी त्याग नहीं करते। अन्यत्र जगह जैसे मथुरा और द्वारका में जो उनका शरीर दृष्टिकर होता है वह कृतिम है, बनावटी है। इसमें त...

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त्वमप्येनां समाश्रित्य राधिकां

भगवान कृष्ण कहते हैं - हे शिव! अत: आपको भी मेरी प्रिया श्री राधा की शरण लेनी चाहिए, सदा मेरे युगल मंत्र का जाप करना चाहिए, और मेरे धाम वृंदावन में रहन...

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तस्योभयतटी रम्या

भगवान शिव पार्वती माता से कहते हैं - वृंदावन में स्थित यमुना के दोनों तट अत्यंत मनोहर हैं, वे शुद्ध स्वर्ण से निर्मित हैं और वे गंगा से करोड़ों गुना अ...

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त्रैलोक्यगोपितं देवि

हे देवी, श्री वृंदावन को तीनों लोकों में गोपनीय रखा गया है एवं यह देवों के ईश्वर द्वारा भी पूजित है। यह नित्य ही भगवान ब्रह्मा आदि द्वारा वांछित है, ए...