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Sacred Scripture

प्रीति लता

Verses & Passages

13 items
general

अलबेली राधा जहां, झमकि धरति है पाय

अलबेली सरकार श्री राधिका जहाँ-जहाँ चरण रखती हैं, रसिक-शिरोमणि श्री श्यामसुंदर वहाँ-वहाँ उनके लिए पुष्प बिछाते हैं।

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रस-बस छकि दंपति दुहूँ, कीने बिबिध बिलास

दिव्य दम्पति श्री राधा-कृष्ण प्रेम-रस में पूर्णत: तृप्त होकर अनेक प्रकार की केलियाँ कर रहे हैं। जो साधक इस युगल का मन लगाकर सुमिरन करता है, उसके हृदय ...

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मोहन मोहे मोहनी, भई नेह बढ़वारी

मन को मोहित करने वाले श्री कृष्ण को उन परम मोहिनी श्री राधा ने पूरी तरह मोहित कर लिया है, जिससे उनके मध्य प्रेम का अनुराग निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। श्...

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गौर स्याम सुखदैन हैं श्री वृंदावन माँझ

श्री वृंदावन धाम में गौर-श्यामल वर्ण के श्री राधा-कृष्ण अनुपम आनंद की वर्षा करते हैं। जो इस दिव्य प्रेम-रस को नहीं जानते, उनका जीवन निस्सार और व्यर्थ ...

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प्यारी के अति प्यार सों, पिय परसत कर पाय

जब श्री राधा मान करती हैं तब श्री कृष्ण अति ही प्रेम में भरकर, उनके चरणों को अपने कर कमलों द्वारा स्पर्श कर, उन श्री चरणों की आराधना करते हैं। श्री कृ...

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चाह चटपटी मिलन की, लाल भए बहाल

श्री राधा से मिलने की चाह के कारण श्री कृष्ण विकल हो उठे, और वंशी में श्री “राधा राधा” नाम की रटना करने लगे।

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नीलंबर को ध्यान धरि

नीले वस्त्रों को धारण करने वाली श्री राधा का ध्यान कर श्री श्यामसुन्दर उन्मत्त हो उठे। श्री किशोरीजी के गौर वर्ण वाले रूप को निहारने के कारण ही वे सद...

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कहूँ लकुट कहुँ मुरलिका पीताम्बर सुधि नाहिं

श्रीराधा के ध्यान में श्रीकृष्ण इस प्रकार डूबे हुए हैं कि उन्हें न तो अपनी छड़ी का होश है, न मुरली का पता है, और न ही अपने पीताम्बर की सुधि शेष है। यह...

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नीलंबर को ध्यान धरि

जब से श्रीकृष्ण की दृष्टि संकेत ग्राम (जो बरसाना और नंदगाँव के मध्य स्थित है) में श्रीराधा पर पड़ी है, तब से वे अनवरत बरसाने की ओर ही निहार रहे हैं। (...

shloka

प्रिया बदन बिधु तन लखे

श्री प्रिया जी के मुख-रूपी चंद्रमा की ओर प्रियतम श्री कृष्ण के नेत्र चकोर के समान निरंतर एकटक निहारते रहते हैं। श्री राधा के अगाध सौंदर्य-रूपी मदिरा क...

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प्राननि तें प्यारो लगे, दंपति-सुजस-बखान

इस पृथ्वी पर कोई विरला ही ऐसा अधिकारी होगा, जिसे प्रिया-प्रियतम का रस अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय लगे, और जिसे युगल दम्पति श्री राधा-कृष्ण के इस अद्...

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Drishti Pari Sanket Main Jab Te Bhanukumari

Drishti Pari Sanket Main, Jab Ten Bhanu-Kumari.Barsane Ki Or Kau, Tab Ten Rahe Nihari.- Shri Brajnidhi Ji, Shri Brajnidhi Granthawali, Preeti Lata (59...

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Kahu Lakut Kahu Muralika Pitambar Sudh Nahin

Kahun Lakut Kahun Muralika, Pitambar Sudh Nahin. Mor Chandrika Jhuki Rahi, Priya Dhyan Man Mahin. - Shri Brajnidhi Ji, Shri Brajnidhi Granthawali, Pre...