Verses & Passages
40 itemsचंदन लिपायो चौक, चाँदनी चँदोवे तामें
जिस आँगन में श्री राधे विराजमान हैं, वहाँ चंदन का लेप लगा हुआ है, वहाँ चंद्र की उजियारी चाँदनी है, और चाँदनी के समान ही बिछौना है, जिसकी सुगंध की लहर ...
राधा राधा जे कहैं
जो भी जीव “राधा-राधा” कहता है, वह संसार के जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है, क्योंकि ब्रज-बिहारी श्रीकृष्ण अपना कमल-हस्त उसके कंधे पर नित्य रखते ह...
सुर रखवारी सुर राज रखवारी
श्री राधा स्वर्ग के देवताओं की संरक्षक हैं और स्वर्ग के अधिपति इंद्र की भी रक्षा करती हैं। वे श्री शुकदेव, भगवान शिव, सूर्यदेव और चंद्रमा की भी रक्षक ...
कोऊ धन धाम, चाहे अबिराम कोऊ
श्री हठी जी कहते हैं, "कुछ लोग धन की प्राप्ति की लालसा रखते हैं, कुछ राज्य के सुख की इच्छा करते हैं, कुछ प्रतिष्ठा पाने के इच्छुक होते हैं, और कुछ लाख...
फटिकसिलान के महल महारानी बैठी
स्फटिक की शिलाओं से निर्मित भव्य महल में श्री वृंदावन की महारानी श्री राधारानी विराजमान हैं। देवताओं की रानियाँ, उनकी दासता से अभिभूत हैं, हाथ जोड़े उ...
जाकौं नेति नेति कहि वेदन बखानै भेद
जिसे वेद "नेति नेति" कहकर वर्णन करते हैं, जिसे स्वयं श्री नारद जी भी पूरी तरह नहीं जानते, और ऐसा कोई दावा नहीं कर सकता कि उसने उसका संपूर्ण रहस्य जान ...
सेवत ललितादिक सखि जे प्रिय परम प्रवीन
परम प्रवीण ललितादिक सखियों द्वारा जो नित्य प्रेमपूर्वक सेवित हैं, वे श्री राधा कोटि-कोटि सुंदरता की खान हैं, जिनका वर्णन सुर, मुनि इत्यादि भी करते रहत...
आजु हौं गई ही बीर सहज निकुञ्जन में
श्री हठी जी एक सखी से कहतीं हैं "अरे सखी, मेरी बात सुन, मैं आज सहज ही निकुंज में चली गयी, वहाँ सब सुख प्रदान करने वाले श्री श्यामाश्याम का विचित्र कौत...
गाय उठीं किंनरी नरीन ये सुरन सबै
आज श्री राधारानी के प्राकट्य उत्सव पर सभी देवता, देवियाँ, किन्नर आदि आनंदित होकर गायन कर रहे हैं, और नगर-नगर, द्वार-द्वार नगाड़ों की गूंज सुनाई दे रही ...
संभु सुर ध्यावैं सदा सेस गुन गावै विधि
भगवान शिव तथा समस्त देवगण श्री राधारानी का निरंतर ध्यान करते हैं। शेषनाग उनके दिव्य गुणों का गान करते हैं, और जिनके मुख से वेद उद्भूत हुए हैं, वे स्वय...
आनंद शरण बिधि वंदित चरन एक
श्री हठी जी कहते हैं कि उनका आधार तो एक मात्र श्री किशोरी जी के चरण हैं जो आनंद स्वरूप हैं, और वह एक मात्र श्री किशोरी जी की ही शरण में हैं जिनकी शरण ...
रमा को कहा है रति रम्भा को कहा है ए
रमा, रति या रंभा की तुलना श्री राधा से कैसे की जा सकती है? ब्रह्मा जी अपने चारों मुखों से वर्णन कर रहे हैं कि समस्त देवियों से श्री राधा की सुंदरता नौ...
आलसी हौं क्रूर हौं कपूत भांति भांतिन को
श्री हठी जी कहते हैं "मैं आलसी हूँ, क्रूर हूँ, अनेक भाँति कपूत हूँ, लेकिन श्री कृष्ण की कृपा के अतिरिक्त मेरे पापों का कोई निवारण नहीं है।" [1] हे कर...
गुरुपद हिय में धारि कै
गुरुचरणों को हृदय में धारण कर, वेदों के प्रमाण का स्मरण करते हुए, श्री हठी जी अब श्री राधा-रूप रूपी निधि का वर्णन कर रहे हैं।
बन्दौं पद पंकज सदा नंदनंदन ब्रजचंद
मैं सदा व्रजचंद्र नंदनंदन श्रीकृष्णचंद्र के चरण कमलों में वंदन करता हूँ, जिनकी कृपा से “राधा शत” (राधा सुधा शतक) का वर्णन कर रहा हूँ, और प्रार्थना करत...
श्री वृषभानुकुमारि के पग बंदौ कर जोर
मैं दोनों हाथ जोड़ कर वृषभानु नंदिनी श्री राधा के चरणों का वंदन करता हूँ क्योंकि जिनके ह्रदय में, दिन-रात, उनके चरण बसते हैं वे श्री कृष्ण के संग ब्रज...
कोऊ उमाराज रमाराज जमाराज कोऊ
कोई भगवान शिव, भगवान विष्णु, यहाँ तक कि मृत्यु के देवता यमराज का स्मरण करता है, तो कोई भगवान राम को पुकारता है, जिनका नाम आनंद का स्रोत है। [1] कोई भ...
नवनीत गुलाब से कोमल हैं
श्री राधा के चरण नवनीत (मक्खन) और गुलाब से भी कोमल हैं, और इनमें कमल की सुंदरता जैसी मोहकता है। [1] उन चरणों की अरुणिमा ऐसी है, जो न गुलाल, न गुलाब, ...
जाकी कृपा शुक ग्यानी भये
श्री राधा की कृपा से शुकदेव जैसे महान ज्ञानी हुए, और उन्हीं की कृपा से शिवजी महान दानी और ध्यानस्थ बने। [1] उन्हीं की कृपा से ब्रह्माजी ने वेदों की र...
माखन तें मखतूलहू तें
श्री वृषभानु-नंदिनी के चरण-कमल मक्खन और रेशम से भी अधिक कोमल हैं। वे कमल की कलियों से भी अधिक सुकुमार हैं। [1] वे चरण गुलाल और मूंगा रत्न के स्मान ला...
राधिके काहे करो हठ री
हे श्री राधिके! आप व्यर्थ ही इतना हठ क्यों कर रही हैं? थोड़ा अपने प्रियतम के इन सुंदर वचनों को सुनिए, जो अमृत के समान मधुर हैं। [1] आप अपनी भौंहें चढ...
गति पै गयन्द वारौं पग अरविन्द वारौं
श्री हठीजी कहते हैं, “श्री राधा की गति पर गजेन्द्र को न्योछावर कर दूँ, उनके चरण कमलों पर कमल पुष्प न्योछावर कर दूँ, और उनकी घुंघराली काली अलकावली पर भ...
राधा-राधा कहत है
जो मनुष्य हर काल में “राधा-राधा” का जप करता है, वह जन्म-मरण के सागर में डूबने से बच जाता है और सीधे दिव्य धाम ब्रज-वृन्दावन में पहुँच जाता है।
राधा-राधा कहत है, जे नर आठो याम
जो मनुष्य, हर काल में "राधा-राधा" रटता है, वह जन्म और मृत्यु के सागर में डूबने से बच जाता है और सीधे दिव्य धाम ब्रज वृंदावन में पहुंच जाता है।
मोरपखा गर गुन्ज की माल
आज श्रीराधा ने सिर पर मोरपंख और गुँजमाला सजाकर एक अनुपम और मोहक रूप धारण किया। [1] श्री हठी जी कहते हैं—कटि पर पीताम्बर, हाथ में लकुटी, इस अद्भुत छवि...
हीन हौं, अधीन हौं तिहारो ब्रज-साहिबनी!
हे वृंदावनेश्वरी! यद्यपि मैं अयोग्य और तुच्छ हूँ, फिर भी आपके चरणकमलों की शरण में आया हूँ। कृपया अपनी करुणामयी दृष्टि मुझ पर डालें, क्योंकि मेरा ह्रदय...
अतर पुतायो चौक चन्दन लिपायो
जिस आंगन में श्री राधा विराजमान हैं, वहाँ फूलों के रस और चंदन का लेप किया गया है। नरम कालीन और गलीचे फर्श पर फैले हुए हैं। [1] आंगन को काले, पीले, हर...
ध्यावत महेश हू गनेश हू धनेश हू
भगवान शिव, श्री गणेश, देवराज इंद्र, सूर्यनारायण और अनंत शेषजी सहित समस्त तपस्वी और मुनिजन अनवरत उनकी आराधना में लीन रहते हैं। [1] तीनों लोक उनकी महिम...
कीरति कीरति कुँवरि की
भगवान गणेश कीर्ति-कुमारी श्री राधारानी की महिमा का गान करते-करते थक गए। शेषजी ने सहस्र मुख पाकर भी उनकी महिमा गानी चाही, परंतु पार नहीं पा सके।
काहू को शरन शम्भु
कुछ लोग शिव, पार्वती, गणेश, या शेषनाग की पूजा करते हैं। कुछ लोग धन और धन के स्वामी कुबेर की पूजा करते हैं। [1] कुछ भगवान के मत्स्य अवतार या कूर्म अवत...
मखमल माखन से इन्दु की मयूखन से
श्री राधा के चरण कमल मखमल से भी मुलायम हैं, मक्खन के समान कोमल और और चंद्रमा की किरणों जैसी शीतल है। उनकी शोभा तमाल वृक्ष के नवीन पत्तियों की सुंदरता ...
चन्द सो आनन कंचन सो तन
श्री राधा के मुख-कमल की आभा चंद्र के समान है और उनके अंग का वर्ण स्वर्ण के समान है, जिनके दर्शन मात्र से मैं बिना किसी मोल के बिक गया हूँ। [1] जब मैं...
अज सिव सिद्ध सुरेश मुख
ब्रह्मा, शिव, सिद्ध और इन्द्र आदि देवता भी अपने मुखों से निरंतर दिन-रात इसी पावन नाम का जप करते रहते हैं। वह 'राधा-राधा' नाम अपने शरणागत भक्तों की समस...
श्री बृषभानु-कुमारि के
मैं करबद्ध होकर श्री वृषभानु-नन्दिनी के उन परम पावन चरण-कमलों की वंदना करता हूँ। जो श्री राधा के श्रीचरणों को अपने हृदय में अनवरत धारण करता है, वह श्र...
कल्पलता के किधो पल्लव ये नवीन दोऊ
श्री किशोरी जी के दोनों कोमल चरण युगल की छवि ऐसी हैं जैसे कल्पतरु वृक्ष के ताजे नए पत्ते हैं, जो इच्छा-पूर्ति करने वाले हैं और जो वन के कमल पुष्पों की...
कोमल विमल मंजु कंज के अरुण सोहैं
श्री राधा के चरण परम पवित्र, अति कोमल और अरुण वर्ण के हैं। उन श्री चरणों के लक्षण अति शुभ और परम पवित्र, नए कंदमूल की भांति प्रतीत हो रहे हैं। [1] इन...
हीन हौं, अधीन हौं तिहारो ब्रज
हे वृंदावनेश्वरी! यद्यपि मैं अयोग्य और तुच्छ हूँ, फिर भी आपके चरणकमलों की शरण में आया हूँ। कृपया अपनी करुणामयी दृष्टि मुझ पर डालें, क्योंकि मेरा ह्रदय...
चन्द सो आनन कंचन सो तन
श्री राधा के मुख-कमल की आभा चंद्र के समान है और उनके अंग का वर्ण स्वर्ण के समान है, जिनके दर्शन मात्र से मैं बिना किसी मोल के बिक गया हूँ। [1] जब मैं ...
बाधा हरिबे को एक राधा महारानी है
श्री हठी कहते हैं, "वह एक क्षण में कुछ भी सम्भव कर सकती हैं, इसलिए उनके नाम के बिना आधा क्षण भी नष्ट न करें, क्योंकि वह ब्रज की रानी श्री राधा महारान...
मोरपखा गर गुन्ज की माल
आज श्रीराधा ने सिर पर मोरपंख और गुँजमाला सजाकर एक अनुपम और मोहक रूप धारण किया। [1] श्री हठी जी कहते हैं—कटि पर पीताम्बर, हाथ में लकुटी, इस अद्भुत छवि ...