Verses & Passages
7 itemsमेरे प्राणनाथ श्रीश्यामा, सपथ करौं तिन छियें
"मेरे प्राणनाथ श्रीश्यामा, सपथ करौं तिन छियें । " - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री स्फुट वाणी मैं शपथ खा कर कहता हूँ कि मेरी प्राणनाथ, स्वामिनी श्र...
सबसों हित निष्काम मति
श्री हित हरिवंश जी कहते हैं कि सबसे हितकारी बात यही है कि निष्काम भाव रखो, सदा वृन्दावन में वास करो, श्री राधावल्लभ लाल की छवि को हृदय में धारण रखो और...
रसना कटौ जो अन रटौ निरखि अन फुटौ नैन
श्रीहितहरिवंश महाप्रभु की अनन्य निष्ठा श्रीराधा के प्रति इस वाणी में स्पष्ट रूप से प्रकट होती है। वे कहते हैं — मेरी जिह्वा कट जाए यदि यह श्रीराधा के ...
रसना कटौ जो अन रटौ
श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी के शब्दों में: "मेरी जिह्वा कट जाए यदि मैं श्री राधा रानी के अलावा कुछ और रटूँ। मेरे नयन फूट जाएँ यदि मैं राधारानी के रूप...
दोऊ जन भीजत अटके बातन
भूमिका :- वर्षा विहार का वर्णन करने वाले इस पद में श्रीहिताचार्य ने श्रीश्यामा श्याम की परस्पर निरतिशय आसक्ति का प्रदर्शन बड़े सुंदर ढंग से किया है। स...
तातैं भैया मेरी सौं कृष्ण-गुण संचु
श्री हित हरिवंश महाप्रभु कह रहें हैं "अरे मन्दमति! तुम व्यर्थ ही के घृणित वाद-विवाद में क्यों पड़े हो? दूसरों के साथ वाद-विवाद करने, पराये धन एवं पराई...
रसना कटौ जो अन रटौ निरखि अन फुटौ नैन
श्री हित हरिवंश महाप्रभु, जो श्री राधारानी की भक्ति के अनन्य उपासक हैं, उनकी अनन्यता किशोरीजी के प्रति उनके इस पद में वर्णित है। श्री हित हरिवंश महाप्...