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Sacred Scripture

श्री नंददास ग्रंथावली

Verses & Passages

11 items
general

जाकौं वेद रटत ब्रह्मा रटत

जिसके नाम को वेद रटते हैं, ब्रह्मा रटते हैं, भगवान शिव रटते हैं, शेष रटते हैं, नारद, शुकदेव एवं वेद व्यास जी रटते हैं लेकिन पार नहीं पाते। [1] जिसके...

general

बेसर कौन की अति नीकी

श्री राधा और श्री कृष्ण दोनों ने अपनी बेसर (नथ) पर दांव लगाया और ललिता जू से पूछा, "किसकी नथ अधिक सुंदर है?" [1] श्री नंददास जी कहते हैं कि युगल किशो...

general

गर्व करो जिनि भूलि कोउ

यदि किसी जीव के मन में घर-परिवार, जन-सम्पत्ति या वैभव का अभिमान उत्पन्न हो जाए, तो उसे स्मरण करना चाहिए कि स्वर्ग के सम्राट इंद्र का गर्व भी भगवान कृष...

general

जो गिरि रुचे तो वसो श्री गोवर्धन

यदि पर्वत रुचिकर हो तो श्रीगोवर्धन में निवास करो, यदि ग्राम रुचिकर हो तो नंदगाँव में निवास करो। [1] यदि तुम्हें नगर रुचिकर हो तो मधुपुरी (मथुरा) में ...

general

जद्यपि नित्य किसोर हरि

यद्यपि वेद कहता है कि कमलनयन श्रीहरि शाश्वत रूप से किशोर अवस्था में ही विराजमान रहते हैं, तथापि ब्रजवासियों को बाल्य और पौगंड आदि समस्त अवस्थाओं का सु...

general

कै ह्वै रहौं द्रुम गुल्म लता बेली बन माहीं

ब्रह्मज्ञानी उद्धव भगवान श्री कृष्ण से कहते हैं — “हे प्रभु! अब मैं सदा-सदा के लिए ब्रज का कोई वृक्ष, लता या वेलि बनकर ब्रज में ही रहना चाहता हूँ, ताक...

general

अब रहिहौं ब्रजभूमि की ह्वै पगमारग धूरि

ब्रह्मज्ञानी उद्धव कहते हैं—“हे प्रभु! अब मैं सदा के लिए ब्रज में ही ब्रज की रज बनकर वास करना चाहता हूँ, ताकि जब यह प्रेम की ध्वजा स्वरूप ब्रजांगनाएँ ...

general

गोपी प्रेम प्रसाद सो, हौ ही सीख्यौ आय

गोपियों के निष्काम प्रेम के प्रभाव एवं कृपा प्रसाद से आज उद्धव जैसे ब्रह्मज्ञानी भी, ज्ञान/योग की सब दुविधाएँ मिटाकर, प्रेम-मार्गी रसिक हो गए।

general

नंद भवन को भूषण माई

श्री कृष्ण नंद भवन के भूषण हैं, यशोदा के प्यारे लाल हैं, वीर बलराम के भाई हैं और श्री राधा को सुख देने वाले हैं। [1] वे इंद्र के स्वामी, देवताओं के द...

general

यमुना पुलिन सुभग वृन्दावन

सुंदर श्री वृंदावन धाम का नित्य नवीन यमुना पुलिन अत्यंत मनोहर है, जहाँ गोवर्धन को धारण करने वाले नवल श्यामसुंदर विराजमान हैं। [1] कुंज भी नित्य नवी...

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छबीले नील घन की पूतरी

हे सखी! नील मेघ सदृश कोई छबीली रूप-मूर्ति (श्री कृष्ण) इस वृन्दावन में क्रीड़ा कर रही है। उनके अंग-अंग पर विविध आभूषण सुशोभित हैं, अधरों पर मधुर बंसी ...