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Sacred Scripture

श्री स्फुट वाणी

Verses & Passages

4 items
general

तैं भाजन कृत जटित विमल

जैसे कोई विविध रत्नों से जटित स्वर्णपात्र में अमृत भरकर उसे चूल्हे पर चढ़ाकर चन्दन की लकड़ी से अग्नि प्रज्बलित करके उसमें सरसों की खली को रांधे, अर्था...

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हित हरिवंश विचारि कैं

श्री हित हरिवंश महाप्रभु विचार पूर्वक कहते हैं कि इस दुर्लभ मानव देह को पाकर रसिक-गुरु के चरणों की शरण ग्रहण करो। यदि संभव हो, तो संसार के समस्त प्रपं...

shloka

मेरे प्राणनाथ श्रीश्यामा, सपथ करौं तिन छियें

मैं शपथ खा कर कहता हूँ कि मेरी प्राणनाथ, स्वामिनी श्री लाड़ली जू महाराज, श्री राधा ही हैं।

shloka

हित हरिवंश विचारि कैं

श्री हित हरिवंश महाप्रभु उपदेश देते हैं कि इस नश्वर मानव शरीर को व्यर्थ न जाने दो—इसे सार्थक बनाओ रसिक गुरु के चरणों की शरण लेकर। यदि संभव हो तो समस्त...