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Sacred Scripture

श्री वेदांत दश्श्लोकी

Verses & Passages

4 items
general

नान्यागति: कृष्णपदारविन्दात

जिसकी शक्ति और आशय का किसी को पता ही नहीं लग सकता फिर भी वे भक्तों की इच्छा के लिए अनेक अवतार धारण करते है। जिनकी ब्रह्मा शंकर आदि समस्त देवता वंदना क...

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कृपास्य दैन्यादियुजि प्रजायते

अनन्याधिपति सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य कृपा दैन्य ह्रदय (दीनता युक्त) प्रपन्न भक्तों पर ही होती है जिसके फल स्वरूप उनमें रसमयी भक्ति प्रकट हो...

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उपासनीयं नितरां जनै: सदा

इन श्रीराधाकृष्ण युगल किशोरात्मक परब्रह्म की निरंतर उपासना करते रहना चाहिए। उनके ध्यान मात्र से अज्ञान ( तम अविद्या की) अनुवृति क्षीण हो जाती है। हमार...

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अंगे तु वामे वृषभानुजां मुदा

अनुरूप सौभगारूप से कृष्ण के वामांग में आनन्दपूर्वक विराजमान, समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली बृषभानुजी श्री राधा को नमस्कार करता हूँ, जो सहस्रों स...