Verses & Passages
53 itemsश्यामा रटें श्याम श्याम श्याम रटें श्यामा
श्री राधा निरन्तर श्याम श्याम की रटना करती हैं। श्री कृष्ण नित्य राधे राधे रटते हैं।ब्रजांगनाएँ रात-दिन श्यामा श्याम के नामामृत का पान करती हैं।
उर में बिठाना चाहो जग संग श्यामा
उर में बिठाना चाहो जग संग श्यामा। अंधकार रवि कभु रहे एक ठामा॥ - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (58) जिस हृदय में जगत का निवास है, ...
मान लो पतित आपु कहँ कह बामा
यदि तुम स्वयं को पतित स्वीकार कर श्री श्यामा ज़ू की शरण में जाओ तो तुम्हारा काम बन जाए। बनना ठनना [पतित होते हुए स्वयं को पतित न मानना] त्याग कर जैसे ...
ब्रज बामा जब सेवा करें श्याम श्यामा
जब भी ब्रज गोपियाँ श्यामा श्याम की सेवा करती हैं, तो वे अपने दिव्य प्रेम परमानंद (सत्विका भाव) की अपनी गतिविधियों को छिपाने और दबाने का हर संभव प्रयास...
जो मन बुद्धि दै के भजे आठु यामा
जो जीव मन-बुद्धि का समर्पण कर निरन्तर श्रीराधा का स्मरण करता है उसका योगक्षेम वह उसी प्रकार वहन करती हैं जिस प्रकार नवजात शिशु की देखभाल माँ करती है।
ललिता चरण चापैं पौढ़ीं कुंज श्यामा
श्री श्यामा जू एक सुंदर कुंज में लेटी हुई हैं और श्री ललिता जी उनके चरण चाप रही हैं। श्री श्यामसुंदर ललचाते हुए कहते हैं "धन्य धन्य हैं श्री ललिता जी"...
मंजू कुञ्ज पुंज बिच बैठे श्याम श्यामा
श्यामा श्याम ब्रज में सखियों के साथ एक कुञ्ज में विराजमान हैं। सखियों की प्यास श्री श्यामा श्याम को देखकर क्षण क्षण बढ़ती रहती है, उन्हें संतोष नहीं हो...
श्याम गए मथुरा न गइ ब्रज बामा
श्यामसुंदर जब गोपियों से अलग हुए शरीर से तो गोपियाँ उनसे मिलने मथुरा नहीं गयी। उन्होंने केवल श्याम सुन्दर की रूचि में ही अपनी रूचि रखी।
माधुर्य भाव ही था ब्रज ब्रज बामा
ब्रज की सखियों का श्यामा श्याम के प्रति ब्रज में माधुर्य भाव था, माधुर्य में भी निष्काम भाव था।
प्रेम देखना जो चाहो चलो ब्रज धामा
यदि आप यह देखना चाहते हैं कि निःस्वार्थ एवं निष्काम प्रेम क्या है, तो ब्रज में जाकर गोपियों को देखें। वे निस्वार्थ प्रेम की अवतार हैं। वे अपना सुख श्य...
श्यामा श्याम पूछें कहा चाहो ब्रज बामा
श्यामा श्याम ने ब्रज सखियों से पूछा कि वे क्या चाहती हैं, सखियाँ बोलीं: आप दोनों नित्य मुस्कुराते रहो एहि हमारी चाह है।
ब्रज रज महिमा जानें ब्रज बामा
ब्रज-रज की महिमा ब्रजांगनाए ही जानती हैं जिन्होंने युगल किशोर श्री श्यामा श्याम को इसी ब्रज की रज में लोटते हुए देखा है।
प्रेम रूप रस सिंधु दोउ श्यामा श्याम
श्री राधा कृष्ण प्रेम, सौंदर्य और रस के सागर हैं जिन्हें वे बिना किसी दाम के समस्त प्यासे पिपासु जीवों को पिलाते हैं।
तेरे बने बिनु जीना जीना नहिं श्यामा
हे श्यामा [श्री राधा]! तुम्हारे बने बिना जीवन भी भला कोई जीवन है (अर्थात् व्यर्थ है)। यूँ तो पेट सूअर आदि भी भर लेते हैं। यदि तुमसे न मिले तो इस मानव ...
श्यामा श्याम जायँ नहिं तजि ब्रजधामा
दृढ़ विश्वास रखो कि श्यामा श्याम सदैव ब्रज में निवास करते हैं। उनके लिए रोकर आँसू बहाओ, निश्चित ही वे तुमको प्राप्त होंगें।
रहा नाहिं जाये जब मिले बिनु श्यामा
जब श्री राधा के मिलन के बिना प्राण व्याकुल हो उठें, तब समझो की प्रेम बीज का वपन ह्रदय में हो चुका है।
राधा नाम-रूप-गुण
निष्काम भाव से श्रीराधा नाम, रूप, गुण, लीला, जन एवं धाम में ही अपने मन को लगाओ। इसी में मानव-जीवन की सार्थकता है।
माँगना हो तो माँगो सेवा श्याम श्यामा
यदि कुछ माँगना ही है तो केवल श्यामा-श्याम की सेवा माँगो। उस सेवा के लिए निष्काम प्रेम की याचना करनी चाहिये। इसके अतिरिक्त कोई अन्य इच्छा या याचना हृदय...
कितना ही दुःख देवें तोहि श्याम श्यामा
राधा कृष्ण के प्रतिकूल व्यवहार के कारण भी जो प्रेम हर क्षण बड़े वही प्रेम निस्वार्थ एवं निष्काम प्रेम है।
सब तजि जोइ भज श्याम अरु श्यामा
भावार्थ - जो समस्त आश्रयों का त्याग कर अनन्य भाव से एकमात्र श्यामा श्याम का ही आश्रय ग्रहण कर उनका निरंतर स्मरण करता है, श्यामा श्याम भी निरंतर उसका स...
तेरे जैसी करुणामयी न कोई श्यामा
हे श्री राधा, आपसे अधिक दया करने वाला एवं करुणामयी न कोई था, है, न होगा, इसीलिए मैं बार-बार आपके निज धाम ब्रज आता हूँ।
श्यामा श्याम नाम, रूप, लीला, गुण, धामा
जिस ग्रन्थ में श्यामा श्याम के नाम, रूप लीला, गुण, धाम का वर्णन न किया गया हो, उसे दूर से ही प्रणाम करना चाहिये।
प्रेम के अधीन रहें श्याम अरु श्यामा
भले ही वेदों में राधा कृष्ण को पूरी तरह से स्वतंत्र बताया गया है, फिर भी वे अपने भक्तों के प्रेम से बंधे हुए हैं।
आपु को इकलो न मानो कह बामा
कभी एक क्षण के लिए भी स्वयं को अकेला न मानो। सदा सब स्थानों पर श्री राधा तुम्हारे साथ ही हैं।
मेरे पाप लिख बहीखाता धरो श्यामा
ओह श्यामा, जबकि मैं पाप कर रहा हूं और आप मेरे पापों का विवरण रख रहे हैं, लेकिन आपका पवित्र नाम मेरे पापों के सभी विवरण जला देगा और मेरे दिमाग को शुद्ध...
रिद्धि मिले सिद्धि मिले मिले मोक्षधामा
रिद्धि सिद्धि की प्राप्ति या मोक्ष की प्राप्ति तो अज्ञान ही है। सच्चा ज्ञान तो वही है जिससे श्यामा-श्याम के प्रेम की प्राप्ति हो।
श्यामा प्राण धन श्याम
श्रीकृष्ण का जीवन-प्राण श्री राधा हैं और श्री राधा का जीवन-प्राण श्रीकृष्ण हैं। श्री राधा और कृष्ण दोनों मेरे जीवन-प्राण हैं।
श्यामा श्याम नाम रूप लीला गुण धामा
श्री राधा कृष्ण का नाम, रूप, लीला, गुण, धाम का गान उनके रूप ध्यान युक्त आंसू बहा कर करिये।
भीजैं दोउ कुंज महँ वृन्दावन धामा
श्री वृन्दावन धाम में एक बार तेज़ बरसात में श्री राधा कृष्ण भीगे तभी श्री श्यामा जू श्यामसुंदर के उर में छुप्प गयीं, और श्याम सुन्दर श्यामा जू के, अर्थ...
भोरे बनि जाओ क्योंकि भोरी भारी श्यामा
भोली भाली श्री राधारानी को रिझाना चाहते हो तो तुम्हे भी अत्यंत भोला बनना पड़ेगा, क्यूंकि भोली भाली राधा भोले हृदय में ही निवास करती हैं।
शब्द, रस, रूप, रस, गंध मन काम
अपने मन से कहो तू शब्द, रस, रूप, रस, गंध ही तो चाहता है, चल श्री राधा के निकट चल वहां तुझे दिव्य शब्द, रस, रूप, रस, गंध प्राप्त होगा।
और द्वार जाओ ना, अनन्य बनो बामा
जीव को अनन्य आश्रय एकमात्र श्रीराधा काही ग्रहण करना चाहिये। द्वार द्वार भटकने से क्या लाभ? जीव के त्रिगुण (सतोगुण, रजोगुण व तमोगुण) त्रिताप (दैहिक,दैव...
तेरे हैं अनन्त पाप
भावार्थ - हे जीव ! अनादिकाल से अनन्तानन्त पाप करने के कारण तेरा मन अत्यंत मलिन हो चुका है अतएव (साधना द्वारा अंतःकरण शुद्धि की मात्रानुसार) श्री राधा ...
बार बार चारों धाम वारों ब्रजधामा
बार बार चारों धाम को ब्रज धाम पर वारों जहां श्री राधा कृष्ण नित्य विहार रस बरसाते हैं।
प्रेम देखना जो चाहो चलो ब्रज धामा
यदि आप यह देखना चाहते हैं कि निःस्वार्थ एवं निष्काम प्रेम क्या है, तो ब्रज में जाकर गोपियों को देखें। वे निस्वार्थ प्रेम की अवतार हैं। वे अपना सुख श्य...
धन वृन्दावन धाम है
वृन्दावन धाम धन्य है, वृन्दावन नाम धन्य है, और धन्य हैं वृन्दावन के रसिक जो नित्य श्यामा-श्याम का सुमिरन करते हैं और युगल-रस में डूबे हुए हैं।
प्रेम के अधीन रहें श्याम अरु श्यामा
भले ही वेदों में राधा कृष्ण को पूरी तरह से स्वतंत्र बताया गया है, फिर भी वे अपने भक्तों के प्रेम से बंधे हुए हैं।
ब्रज बामा जब सेवा करें श्याम श्यामा
जब भी ब्रज गोपियाँ श्यामा श्याम की सेवा करती हैं, तो वे अपने दिव्य प्रेम परमानंद (सत्विका भाव) की अपनी गतिविधियों को छिपाने और दबाने का हर संभव प्रयास...
श्यामा श्याम में जो गुण सोइ ब्रजधामा
ऐसी निष्ठा से ब्रज धाम वास करो कि जो श्यामा श्याम में गुण एवं शक्तियाँ हैं वह समस्त गुण शक्तियाँ ब्रज धाम में भी हैं।
जुग जुग जिए जोरी कहें ब्रजबामा
जब श्री श्यामा श्याम युगल सरकार गलबाहिं देकर वृंदावन के विभिन्न कुंजों से विचरण करते हैं तब ब्रज सखियाँ भाव विभोर आशीर्वाद देती हैं और कहती हैं: “जुग ...
बार बार आया करो वृन्दावन धामा
बार बार वृंदावन धाम आओ और पूर्णत: विश्वास रखो की श्यामा श्यामा कभी तो वृंदावन धाम में मिलेंगे ही।
निकले सवारी जब संग श्याम श्यामा
जब श्री श्यामा श्याम युगल सरकार की सवारी निकलती है तो ब्रज सखियाँ भाव विभोर होकर बलिहारी बलिहारी कहती हैं।
मेरे पाप लिख बहीखाता धरो श्यामा
ओह श्यामा, जबकि मैं पाप कर रहा हूं और आप मेरे पापों का विवरण रख रहे हैं, लेकिन आपका पवित्र नाम मेरे पापों के सभी विवरण जला देगा और मेरे दिमाग को शुद्ध...
श्याम गए मथुरा न गइ ब्रज बामा
श्यामसुंदर जब गोपियों से अलग हुए शरीर से तो गोपियाँ उनसे मिलने मथुरा नहीं गयी । उन्होंने केवल श्याम सुन्दर की रूचि में ही अपनी रूचि रखी।
तेरे जैसी करुणामयी न कोई श्यामा
हे श्री राधा, आपसे अधिक दया करने वाला एवं करुणामयी न कोई था, है, न होगा, इसीलिए मैं बार-बार आपके निज धाम ब्रज आता हूँ।
कितना ही दुःख देवें तोहि श्याम श्यामा
राधा कृष्ण के प्रतिकूल व्यवहार के कारण भी जो प्रेम हर क्षण बड़े वही प्रेम निस्वार्थ एवं निष्काम प्रेम है।
श्यामा श्याम नाम रूप लीला गुण धामा
श्री राधा कृष्ण का नाम, रूप, लीला, गुण, धाम का गान उनके रूप ध्यान युक्त आंसू बहा कर करिये।
श्यामा श्याम पूछें कहा चाहो ब्रज बामा
श्यामा श्याम ने ब्रज सखियों से पूछा कि वे क्या चाहती हैं, सखियाँ बोलीं: आप दोनों नित्य मुस्कुराते रहो एहि हमारी चाह है।
श्यामा प्राण धन श्याम
श्रीकृष्ण का जीवन-प्राण श्री राधा हैं और श्री राधा का जीवन-प्राण श्रीकृष्ण हैं। श्री राधा और कृष्ण दोनों मेरे जीवन-प्राण हैं।
माधुर्य भाव ही था ब्रज ब्रज बामा
ब्रज की सखियों का श्यामा श्याम के प्रति ब्रज में माधुर्य भाव था, माधुर्य में भी निष्काम भाव था।
मंजू कुञ्ज पुंज बिच बैठे श्याम श्यामा
श्यामा श्याम ब्रज में सखियों के साथ एक कुञ्ज में विराजमान हैं। सखियों की प्यास श्री श्यामा श्याम को देखकर क्षण क्षण बढ़ती रहती है, उन्हें संतोष नहीं हो...
भीजैं दोउ कुंज महँ वृन्दावन धामा
श्री वृन्दावन धाम में एक बार तेज़ बरसात में श्री राधा कृष्ण भीगे तभी श्री श्यामा जू श्यामसुंदर के उर में छुप्प गयीं, और श्याम सुन्दर श्यामा जू के, अर्थ...
प्रेम रूप रस सिंधु दोउ श्यामा श्याम
श्री राधा कृष्ण प्रेम, सौंदर्य और रस के सागर हैं जिन्हें वे बिना किसी दाम के समस्त प्यासे पिपासु जीवों को पिलाते हैं।