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ऐ हरी मो सौ न बिगारन कौ
एक हम जीव हैं जिन को हमेशा सभी काम बिगड़ने की आदत पड़ी हुई है और दूसरी तरफ अति अकारण करुणा वरुणालय करुणामय बिहारी जी जो हमारा काम बनाने में ही लगे रहते...
shloka
प्यारी जैसो तेरो आँखिन में, मैं हौं अपनपौं देखत| तैसो तुम देखती हो किधौं नाहीं || हौं तोसों कहौं प्यारे, आँखिन मूंदी रहौं । लाल निकसि कहूँ जाहिं ||
श्री कृष्ण राधा रानी को बताते हैं: "हे राधा, जिस तरह से मैं आपकी आंखों में अपना रूप देखता हूं, क्या आप भी उसी तरह देखते हैं या नहीं?" इसके बारे में सु...