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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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राधा कृष्ण गावै रोम-रोम हरसावै
जिनके द्वारा श्री राधा कृष्ण का गुणगान करने से रोम रोम हर्षित हो जाता है एवं प्रेम की मानो झरी से लग जाती है एवं अंग अंग पुलकित हो उठता है। [1] इस प्...
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हिय अकुलाल तरसात सरसात सदा
मेरा हृदय अकुला रहा है, तड़प रहा और व्याकुल हो रहा है; मैं आज बार-बार विनती करता हूँ, कृपया शीघ्र अपनी कृपा प्रदान करें। [1] मैं एक क्षण की भी बाधा स...
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जाति पाँति नाना भांति कुल अभिमान तजि
जाति, पंथ और कुल का अभिमान त्यागकर, मैं नित्य रसिकों के चरणों में श्रद्धापूर्वक सिर नवाऊँगा। [1] मैं सेवाकुंज, रासमंडल, यमुना पुलिन, वंशीवट, निधिवन...
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Jaati Paanti Nana Bhanti Kul Abhiman Taji
(Kavitt)Jaati Paanti Nana Bhanti Kul Abhiman Taji,Nishidin Sheesh Kaun Navaoon Rasikan Mein. [1]Sewakunj Mandal Pulin Vanshivat,Nidhivan Au Sameer Dhe...