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Sacred Scripture

अनन्यरसीकाभरण ग्रन्थ

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

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सुरति सुख सोये स्यामाँ स्याम

अब प्रिया लाल [राधा कृष्ण] रस विलास के सुख में डूब कर सो रहे हैं। वे दोनों परस्पर गलबाँहीं दिये हैं, जिससे उनके अंग अंग की छटा और भी मनोरम हो रही है। ...

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सब ऐश्वर्य छिपाइ पाइँ परि

जो हरि, अन्यत्र षड ऎश्वर्य के अभिमानी है, वे यहाँ अपना सारा बड्डपन छिपाकर और श्री किशोरीजी के चरण कमलो में पड़े रहकर अत्यंत दीन बने रहते है। इन्होने मध...

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पौढे ललित लतानि तरै

सुख राशि श्रीप्रिया प्रियतम सुंदर लताओं के नीचे सुमनों की सेज पर लेटे हैं। इस प्रेमी युगल के अधर अधरों से और उरोज उरोजों से सटे हैं, कटि से कटि जुड़ी ...

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निहं हिंदू नहिं तुरक हम, नहिं जैनी अंग्रेज

हम न तो हिन्दू हैं, न ही मुसलमान (तुरक), न ही हम जैन हैं और न ही अंग्रेज। हमारी (सखियों) की तो बस एक ही पहचान और सेवा है—हम तो रसिक अनन्य भाव से नित्य...

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कामी कै प्रिय कामिनी लोभी कै प्रिय दाम

जैसे कामासक्त पुरुष को कामिनी अत्यंत प्रिय होती है और लोभी को धन अत्यंत प्रिय लगता है, उसी प्रकार रसिकों को श्री श्यामा-श्याम सहज भाव से प्रिय लगते है...

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नहिं हिंदू नहिं तुरक हम

मैं न हिंदू हूँ, न तुर्क (मुसलमान), न जैनी और न ही अंग्रेज। मैं तो प्रेम में उन्मत्त होकर (सहचरी स्वरूप से) नित्य श्री प्रिया प्रियतम की सुमन सेज संव...

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बहु बिधि मर्दन करें

भगवतरसिक जी कहते हैं कि भले ही कोई कितनी ही दवाओं से और कितने ही प्रकार से मुर्दे की मालिश क्यों न करे, वह कभी जिन्दा नहीं हो सकता। इसी प्रकार रस का अ...

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यह रस-रीति प्रिया-प्रियतम की

प्रिया प्रीतम की यह दिव्य रस रीतिः नित्यविहार रस स्वाति नक्षत्र की वर्षा के जल के समान दिव्य और फलदायी है। जैसे पात्र भेद गुण के कारण स्वाति जल कदली म...

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नाचत दोउ रहस में रँग-भीनैं

अनंग-रंग में सराबोर श्रीयुगलकिशोर एकान्त में नाच रहे हैं । काम-केलि की नयी-नयी कलाओं में लगे हुए मन वाले उन दोनों के अंग-अंग से अनगिनत हाव-भाव उत्पन्न...

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पाँयन परि बिनती करै

लालजी (श्रीकृष्ण) जब श्री प्रियाजी (श्रीराधा) के चरणों में पड़कर दैन्यपूर्वक विनय करते हैं, तो वही श्रृंगार रस का मुख्य स्वरूप है। प्रियतम की विनय-वाण...

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नव कुंज-सदन मैं आज रँगीली होरी

नव-निकुंज-महल में आज रंगों से सराबोर होली की अद्भुत छटा छाई हुई है। एक ओर श्रीकिशोरीजी हैं और दूसरी ओर श्रीश्यामसुन्दर दृढ़ता से उपस्थित हैं। दोनों अन...

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सुरतरु कामधेनु, चिंतामणि बारि दिये देव दानी

कल्पवृक्ष, कामधेनु तथा चिंतामणि को श्री किशोरीजी के ऊपर निछावर करके देवताओ को दान में दे दिया गया है , (क्योकि इन श्री किशोरीजी के सुख की तुलना पर उन ...