सभी ग्रन्थ
ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
3 itemsgeneral
छुवत राधिका-अंग कौ कंप-स्वेद ह्वै जाय
श्रीकृष्ण जैसे ही श्रीराधिका का श्रृंगार करने के लिए अपने करकमलों से उनके अंग को स्पर्श करते हैं, उनका शरीर कंप, स्वेद आदि सात्विक भावों से रोमांचित ह...
general
सुर-नर-किन्नर-उरग हू
चाहे देवता हों या मनुष्य, किन्नर हों या नाग — सभी प्राणी यही कहते हैं कि यदि उन्हें ब्रज की रेणु (रज) मिल जाए, तो उनका जीवन धन्य हो जाए और उनका भाग्य ...
general
ब्रह्मा इंद्र कहैं हम चाहैं
ब्रह्मा और इन्द्र कहते हैं—हमें ब्रह्मलोक अथवा स्वर्गलोक के सम्राट की पदवी नहीं चाहिए। यदि ब्रज में एक वृक्ष बनने का भी सौभाग्य मिल जाए, तो हम सदा वही...