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Sacred Scripture

रास पंचाध्यायी

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

7 items
general

श्रीवृन्दाबन चिद्घन कछु छबि वरनि न जाई

श्री वृन्दावन साक्षात् 'चिद्घन' (परम चेतना का घनीभूत स्वरूप) है, जिसकी दिव्य छवि का वर्णन करना वाणी से परे है। श्री कृष्ण की सुंदर और सुकुमार ललित लील...

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अस अद्भुत गोपाल लाल

ऐसे अद्भुत प्रियतम गोपाल लाल (श्री कृष्ण) जहाँ सर्वदा निवास करते हैं, उस वृन्दावन के सामने वैकुण्ठ का ऐश्वर्य भी फीका (कुंठित) प्रतीत होता है।

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जह नग खग मृग लता कुंज

वृन्दावन के वृक्ष, गिरि, पक्षी, मृग, लताएँ और समस्त कुंज सदा दिव्य शोभा से युक्त रहते हैं। वे काल के प्रवाह और प्रकृति के तीनों गुणों के प्रभाव से अछू...

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मोहन अद्भुत रूप कहि न आवत छबि ताकी

अनंत कोटि ब्रह्मांड के कण कण में ब्रह्म स्वरूप से व्याप्त, मन को मोहने वाले श्री कृष्ण चन्द्र की रूप माधुरी ऐसी है जिसका वर्णन शब्दों में करना असंभव ह...

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देवन में श्री रमारमन नारायन प्रभु जस

जैसे देवताओं में श्री रमा रमण (लक्ष्मीपति) भगवान नारायण का यश सर्वोपरि है, वैसे ही समस्त वनों में सर्वोपरि श्री वृन्दावन धाम है, जो सदा-सर्वदा दिव्य श...

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श्री अनंत महिमा अनंत को वरनि सके कवि

श्री धाम वृन्दावन एवं इसकी महिमा अनंत एवं अपार है, जिसका पूर्ण निरूपण किसी भी रसिक कवि की सामर्थ्य से परे है। श्री नंददास जी के अनुसार, इस परम पावन धा...

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या बन की वर-बानिक या वन ही बनि आवै

श्री वृन्दावन धाम की समानता केवल वृन्दावन धाम ही कर सकता है, जिसका पार शेष, महेश, इंद्र एवं गणेश भी नहीं पा सकते।