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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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आनँद की मूरति देखौ माई
अरे सखी, आनंद की मूर्ति श्री श्यामा श्याम को निहार, कैसा सुंदर दृश्य है जब यह एक दूसरे से लिपटे हुए हैं। [1] इस दिव्य दम्पति के अंगों में प्रेम स्वरू...
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बिहरत दोऊ लाड़िली लाल
श्री लाड़िली लाल दोनों वृंदावन में विहार परायण हैं। श्री श्यामा श्याम के बड़े एवं सुंदर नैनों को देख देख देख सहचरियों के हृदय और नयन शीतल बने रहते है...
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प्रीतम मोहि प्रानन हूँ तें प्यारौ
श्री राधा कहती हैं - प्रियतम मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं। मैं प्रेम से रात-दिन उन्हें हृदय से लगाये रहती हूँ। किंचित् भी अपने से दूर नहीं करती। ...
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वन विहरन चले दोऊ प्यारे
श्री श्यामा श्याम वन-विहार करने चले हैं। दोनों नृत्य एवं गान करते हुए सखियों के ह्रदय में प्रेम बढ़ा रहे हैं, दोनों रूप की राशि हैं एवं तीनों लोकों के ...