सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठग्रन्थश्री हित कमलनैन जी की वाणी
सभी ग्रन्थ
Sacred Scripture

श्री हित कमलनैन जी की वाणी

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

4 items
general

आनँद की मूरति देखौ माई

अरे सखी, आनंद की मूर्ति श्री श्यामा श्याम को निहार, कैसा सुंदर दृश्य है जब यह एक दूसरे से लिपटे हुए हैं। [1] इस दिव्य दम्पति के अंगों में प्रेम स्वरू...

general

बिहरत दोऊ लाड़िली लाल

श्री लाड़िली लाल दोनों वृंदावन में विहार परायण हैं। श्री श्यामा श्याम के बड़े एवं सुंदर नैनों को देख देख देख सहचरियों के हृदय और नयन शीतल बने रहते है...

general

प्रीतम मोहि प्रानन हूँ तें प्यारौ

श्री राधा कहती हैं - प्रियतम मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं। मैं प्रेम से रात-दिन उन्हें हृदय से लगाये रहती हूँ। किंचित् भी अपने से दूर नहीं करती। ...

general

वन विहरन चले दोऊ प्यारे

श्री श्यामा श्याम वन-विहार करने चले हैं। दोनों नृत्य एवं गान करते हुए सखियों के ह्रदय में प्रेम बढ़ा रहे हैं, दोनों रूप की राशि हैं एवं तीनों लोकों के ...