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Sacred Scripture

श्री वल्लभ रसिक जी की वाणी

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

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यद्यपि दोउन की लगन सब मिलि कहैं समान

यद्यपि सभी संत और रसिक यही कहते हैं कि श्री राधा-कृष्ण दोनों का परस्पर प्रेम और लगन बिल्कुल समान है, परंतु गूढ़ रहस्य यह है कि इसमें श्री राधा प्यारी...

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आवति बाल लाल रंग भीनी

श्री श्यामा जू श्री श्यामसुंदर के प्रेम रस में भींजी हुई आ रही हैं। गान करते हुए वे चुटकी लेकर ताल दे रही हैं, उनकी सुगठित कटी प्रदेश लचक रही है, जिसक...

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हम जुगल महल रस लिंदा

श्री वृंदावन धाम के अनन्य रसिक जन (इस युगल महल - रस के उपासक) कुञ्ज के अलिंद (द्वार कोष्ठ) को उलांघ कर कभी बाहर नहीं जाते। [1] वृन्दावन तो बहुत बड़ा ...

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महल मदन माती अली ये

श्री राधा के निज महल की सखियाँ, श्री राधा के निज महल के रस में ऐसी उन्मत्त रहती हैं कि उनके (श्री राधा के) अतिरिक्त अन्य किसी को नहीं मानती। यह सखियाँ...

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उरज उतंग अति भरित भरे से अंग

श्री राधा के उरोज अत्यंत उन्नत और पूर्ण रूप से भरे हुए हैं, जिनसे उनका संपूर्ण शरीर सौंदर्य से परिपूर्ण हो उठा है। उनके सुंदर लाल होंठों को देखकर मानो...