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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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कह देता झट जीभ से
हे मन, तू जीभ से तो तुरंत “राधे श्याम” का जाप करने को कह देता है, परंतु तू स्वयं बड़ा मक्कार है और कहीं और भटकता रहता है।
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स्वप्न तुल्य इस जगत से
स्वप्न तुल्य इस जगत से डरना अज्ञानता है। अत: निर्भय होकर भगवान श्री कृष्णचन्द्र का प्रेम में उन्मत्त होकर भजन करो।
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जिह्वा केवल रट रही
यदि जिह्वा केवल “राधे श्याम" आदि नाम रट रही है और मन का चिंतन भगवान में नहीं है तो ऐसा सुमिरन किसी काम का नहीं है।
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खंजन मृग सरमाय के
श्री श्यामसुन्दर के चंचल नेत्रों की अनुपम शोभा को देखकर खंजन पक्षी और हिरण लज्जित होकर दिन-रात जंगल में रहने लगे। इसी प्रकार, मछली और कमल भी उनके नयनो...
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ज्यों ज्यों निरखत राधिका
जैसे-जैसे श्री राधा महारानी जू अपने तीखे और कजरारे नेत्रों की कमान तानकर प्रियतम की ओर निहारती हैं, वैसे-वैसे श्यामसुंदर का माधुर्य और भी अधिक निखर कर...