सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री गुणमंजरी दास
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री गुणमंजरी दास वाणी संग्रह

general

हमारे धन स्यामाजू कौ नाम

हमारा धन एकमात्र श्री श्यामा [श्री राधे] ज़ू का नाम है जिसे नित्य निरंतर श्री नंद नंदन घनश्याम [श्री कृष्ण] रटते हैं। [1] श्री गुणमंजरी कहती हैं कि श्...

general

श्रीराधारमण लाल कछु दीजे

हे श्री राधारमण लाल, यदि आप मुझे कुछ देना चाहते हैं, तो कृपया मुझे अपनी प्राण प्रिया (श्री राधा) के परिकर की दासी बना दीजिए। [1] मैं और कुछ नहीं चाहत...

general

श्री राधारमण सलौने श्याम

श्री राधारमण लावण्यमय श्यामवर्ण के हैं जिनकी रूप माधुरी नित्य ही नयी नयी रहती है, जो सदा किशोर अवस्था वाले हैं और जिनका अंग अंग मन को मोहने वाला है। [...

general

श्रीराधारमण नट नागर हो

श्री राधारमण नट नागर हैं। ललित त्रिभंगी मुद्रा में सुशोभित सुन्दर श्री श्याम जू परम उज्वल रस के सागर हैं। [1] श्री गुणमंजरी दास कहते हैं कि श्री कृ...

general

श्रीराधारमण हमारे मीत

ललित त्रिभंगी, श्याम वर्ण वाले, सुंदर कटि एवं पीले वस्त्र धारण करने वाले श्री राधारमण लाल ही हमारे साँचे मीत हैं। [1] जिनके हाथों में मुरली सुशोभित ह...

general

बसी उर राधारमण मुसिक्यान

मेरे ह्रदय में श्री राधा रमण की मुस्कान ऐसी बस गई है कि अब मुझे न तो विधि-निषेध का पालन पसंद आता है और न ही लोक कुल की मर्यादा आदि ही भाती है। [1] मे...

general

श्रीराधारमण नुकीले नैन

श्रीराधारमण के नयन अत्यंत नुकीले हैं, जो बृज की नवयुवतियों के मन-रूपी माणिक्य को बींध देते हैं। उनके नयन इतने प्रभावशाली हैं कि वाणी उनका वर्णन नहीं क...

general

श्रीराधारमण अधर रचि बीरी

श्री राधारमण के अधरों पर सुंदर पान की बीरी की लालिमा चमक रही है। सखियाँ मंत्रमुग्ध होकर उस छवि को निहार रही हैं। [1] श्री ललिताजू ने पान उनके मुख में...

general

मेरे परत हिये में लीकें

श्री राधारमण की सुन्दर छवि मेरे हृदय में बसी हुई हैं। उनकी सखियाँ उनकी रूप-माधुरी का आस्वादन करती रहती हैं। [1] वृषभानु नंदिनी श्री राधा के प्रत्येक ...