सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री गुरु छौना महाराज
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री गुरु छौना महाराज वाणी संग्रह

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परम धाम परिकर जहाँ, आनंद सहज अपार

जहाँ श्री श्यामा-श्याम का परम धाम श्री वृंदावन है, जहाँ उनके समस्त परिकर विराजते हैं, जहाँ सहज ही अपार रस बरसता है, वहीं मेरे नैंन भी नित्य विहार को अ...

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सखीभाव धारण करै, जब पहुँचे निज धाम

श्यामा श्याम की सखी भाव को धारण करके ही साधक निज़धाम तक पहुँच सकता है जहां अनन्य रसिक जन अविचल नित्य विहार रस का पान करते हैं।

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सबसे न्यारी रीति ये जाको ओर न छोर

सबसे अनोखी रीति, जिसका कोई आदि-अंत नहीं, वह यही है कि अपने भाव के अनुसार श्री श्यामा-श्याम को प्रेम से लाड़ लड़ाओ।

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जोग जज्ञ तप नेम करि भजै नहीं गोविन्द

भले ही कोई योग, यज्ञ, तपस्या अथवा कठोर व्रतों का पालन करता रहे, परंतु यदि उसने श्री गोविंद का डट कर भजन नहीं किया, यदि वह हरि नाम के सुमिरन से वंचित र...

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हमारी सुध लीजै हो मोहन प्यारे

हे मोहन प्यारे! मेरी सुध लो। हे नंद के दुलारे, प्रियतम प्यारे! तुम्हारे बिना मेरा कोई अन्य नहीं है! [1] मेरे हाथ पकड़कर इस संसार रूपी सागर से पार करा...

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षट् मुक्ति की चाह तजि

युगल रस के उपासक न केवल भुक्ति (सांसारिक) बल्कि छः प्रकार की मुक्ति (सालोक्य, सामीप्य, सारूप्य, सायुज्य, सारष्टि एवं कैवल्य) की कामना को भी त्याग देते...

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बंसरी बजावै नन्द जू कौ लाल

नन्दनन्दन श्रीकृष्ण यमुना के पुलिन पर वंशीवट की छाया में मधुर बंसी बजा रहे हैं। उनका रूप अत्यन्त रससिक्त एवं मनोहर है। [1] उनके सिर पर मोर-मुकुट और...

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छौना छाँड़ि तू जगत को श्याम सुमिर सुख लेह

गुरु छौना कहते हैं कि जगत की प्रीति को त्याग कर, अपना मन श्यामसुंदर में लगाओ क्योंकि सच्चा सुख केवल उनके स्मरण से ही मिलता है। परिजन और मित्र तुम्हारे...

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नाम लियैं पातिक कटैं पहुँचै हरि के देस

भगवान का नाम लेने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जीव अंततः हरि के धाम को प्राप्त करता है। श्री छौना जी महाराज कहते हैं कि यह नाम चाहे गृहस्थ (गीरही)...

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गुरुछौना रज सेइये, धार मतो मजबूत

सच्चा राजपूत तो वे है जो सदा वृंदावन की रज का सेवन करता है एवं वृंदावन की रज में रज होकर मिलने की मजबूत मत रखता है।