सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री ललित माधुरी
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री ललित माधुरी वाणी संग्रह

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बाँकी अदा पै मैं बलिहारी

मैं श्री बाँके बिहारी की बाँकी (टेढ़ी) अदा पर बलिहारी जाता हूं। श्री बाँके बिहारी की पगड़ी भी बाँकी है, केश लटें भी बाँकी (तिरछी) है एवं मुकुट की छवि ...

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प्रिय नख चरन चंद्रिका कब धौं

(सखी भावापन्न श्री ललित माधुरी जी कहते हैं ) कब मैं श्री प्यारी जू [राधा] की चरण नख चंद्रिका को अपनी इन नयनों से निहारूँगी। [1] कब मैं श्री राधा के च...

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हौं न भई वृन्दावन भृंग

मैं श्री वृन्दावन की भृंग क्यों नहीं बनी? यदि मैं भृंग बनती तो बिना किसी बाधा के, नित्य ही श्री बिहारिनी जू (राधारानी) के चरण कमलों के तलवों की रज के ...

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हों न भई वन मृदुल लतारी

ऐसा कब होगा कि मैं श्री वृंदावन में कोई सुंदर लता बनूँगा जिसको प्रिया प्रियतम (श्री राधा कृष्ण) अपने अंगों का स्पर्श देते एवं जिसके नीचे लुकते छिपते ह...

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प्यारी मुहिं दीजै श्री वृन्दावन वास

हे प्यारी जू (श्री राधा)! मुझे श्री वृंदावन धाम में वास प्रदान करें, जहाँ हर क्षण नव अनुराग का वर्धन होता है और भक्त प्रेम-रस रास का आस्वादन करता है। ...

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भानुकुंवरी अब जिनि वहिरैये

हे वृषभानु नंदिनी, श्री राधा, मैं आपसे विनती करता हूँ, कृपया मुझसे मुख न मोड़ें। जो भी भूल/चूक मुझसे हुई हो, उस पर कृपा कर ध्यान न दें। [1] मैंने सुन...

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श्रीवृन्दावन वसौं निरंतर, यही चित्त अभिलाषा है

मैं निरंतर श्री वृन्दावन में निवास करूँ, यही मेरे चित्त की अभिलाषा है। जहाँ प्रत्येक क्षण युगल किशोर श्री श्यामाश्याम के सुन्दर रूपमाधुरी का नित्य पान...

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ललितमाधुरी लाल कब चरनन विसमृत परों

हे युगल सरकार, श्री श्यामा-श्याम! कब मैं सब कुछ भुलाकर आपके चरणों में विश्राम करूँगा? कब मेरी चकोर जैसी आँखें आपके मनमोहक एवं रसाल नखचन्द्रों पर स्थिर...

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प्यारी लाल तुमपै मैं बलिजाऊँ

हे श्री राधा-कृष्ण, मैं आप पर बलिहारी जाऊँ। सदा श्री वृंदावन धाम में वास करते हुए, अनन्य भाव से केवल आपका ही गुणगान करूँ। [1] श्री ललितमाधुरी जी कह...

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कृपा करो मोपर व्रजललना

हे ब्रजरानी, श्री राधा! मुझ पर अपनी कृपा कीजिए। मेरा भँवरे के समान मन, आपके कमल के समान चरण-रज के बिना एक पल भी जीवित नहीं रह सकता। [1] यदि आप मुझे ब...

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अँखिया रूपसुधामद मातीं

मेरी अखियाँ श्री युगल सरकार की रूप-रस माधुरी के मद में पूरी तरह चूर हो गई हैं। बिना युगल छवि के दर्शन किए, ये अत्यंत आतुर हो उठती हैं और निरंतर अकुलात...

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अबतो वसी हृदै मो माहिं व्रजरज नेह लगैये

अब मेरे हृदय में केवल ब्रज की रज बसी है, अब तो मुझे उसी रज से ही नेह बढ़ाना है। जितने भी सांसारिक रिश्ते-नाते हैं, उन्हें अब मंझधार में बहा देना चाहिए...

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सखि सुन्दर स्याम सलौना

हे सखी, साँवले सलोने श्यामसुंदर का सौंदर्य बहुत आकर्षक है। तिरछी चितवन से उन्होंने मुस्कुराकर मेरी ओर देखा और मेरे हृदय में कुछ टोना कर गए। [1] श्र...

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हम वासी बरसाने के

हम बरसाने के निवासी हैं। श्री चैतन्य महाप्रभु की परम्परा के खास उपासक हैं जिनका संबंध “राधा-गोविन्द” से है। [1] हम तो ललित-किशोरी (श्री राधा) के ही ग...

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वेगि कृपाकरि कुँवरि स्वामिनी

हे राधा रानी! कृपा करके शीघ्र मुझे वृंदावन में वास दीजिए — राधाकुंड के मनोहर निकुंजों में, जहाँ मधुर-मधुर लीलाएँ होती हैं, जहाँ आप दोनों को सुख मिलता ...

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जुगुललाल तोरी पैयां परतहौं

हे युगल सरकार श्री राधा-कृष्ण! मैं आपके चरणों में बारम्बार प्रणाम करता हूँ — कृपा करके एक बार मेरी ओर दृष्टि डालिए। मुझे वृंदावन वास प्रदान कीजिए क्य...

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श्रीवृन्दावन सहज जी ललितमाधुरी रूप

श्रीवृन्दावन स्वभाविक रूप से सौंदर्य एवं मधुरता का साकार रूप है जहाँ ललित त्रिभंगी श्री लालजी भामिनी श्री राधा संग नित्य-विहार के अनुपम रस में निमग्न ...

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श्री वृन्दावन वास की आसा यही मनमानी

मन की एक ही दृढ़ अभिलाषा है कि श्रीवृन्दावन में ही वास प्राप्त हो। ‘ललितमाधुरी’ का हृदय अब श्री लालजी के दर्शन को छोड़कर कहीं और तनिक भी नहीं लगता। [1...

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प्यारी जी मोतनहूँ टुक हेरो

हे प्यारी जू [राधा रानी], मेरी ओर अपनी कृपा की तनिक सी दृष्टि डाल दीजिए। मेरी आशा है कि मैं नित्य श्री वृंदावन का वास करते हुए वृंदावन के तरु वृक्षों ...

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जानीजू अब जानी श्रीवन

अब मुझे श्रीवृन्दावन जाना है। हे वृन्दावन की रानी! मुझे भलीभाँति ज्ञात है कि केवल आप ही मुझे वृन्दावन-वास प्रदान कर सकती हैं। मुझ पर अब कृपा करके श्री...

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हों न भई रज कुंज ललित वन

यदि मैं वृंदावन की किसी ललित कुंज की रज होता तो यह मेरा परम सौभाग्य होता, जिससे मैं श्री श्यामाश्याम के चरण कमलों से लगा रहता और मेरा मन प्रसन्नता से...

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Pyari Lal Tumpai Main Balijaoon

(Raag Jhanjhoti)Pyari Lal Tumpai Main Balijaoon.Shrivan Mahin Nirantar Vasikai, Tumro Ee Gungaoon. [1]Charan Nihori Kahon Karjori, Yah Mangen Hon Paoo...

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Ankhiya Roopsudha Mad Matin

(Raag Khammach)Ankhiya Roopsudha Mad Matin.Bin Dekhe Vah Yugal Sughar Chhavi, Bahu Atur Akulatin. [1]Vani Pari Rati Charan Kamal Ki, Av Kaise Sachupat...

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Jugulalaal Tori Paiyan Parata Haun

(Raag Ghaton)Jugulalal Tori Paiyan Parata Haun Mo Tan Nek Niharau.Shreevanwas Daan Kin Deejai Chhinchhin Hot Khisaaro.Ausar Nahi Ausar Karanako Kalou ...

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Sakhi Sundar Syam Salauna

Sakhi Sundar Syam Salauna.Koyan Chitai Bihansi Muskanyau, Chitvanmein Kachhu Kar Gayo Tona. [1]Jab Te Dekhi “Lalit Madhuri”, Sab Ras Lagat Alona.Man T...

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Vegi Kripakar Kunwari Swamini

(Raag Kaafi)Vegi Kripakar Kunwari Swamini, Vrindavipin Basavo. Radhakund Nikunj Manohar, Tahan Dou Sachupavo. [1]Preeti Vivas Rasreeti So Pooran, Noot...

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कुँवरिकिशोरि सों इसक लगै जब

श्री कुँवरी किशोरी से प्रेम कर हमारा हृदय हर्षित हो उठेगा, युगल माधुरी का नित्य ही पान करते हुए मस्त रहेंगे एवं रसिकों के संग से अपने प्रेम को नित्य ब...

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Abto Vasi Hriday Mo Mahin Vrajaraj Neh Lagaiye

(Raag Ghaton)Abto Vasi Hriday Mo Maahin Vrajaraj Neh Lagaiye.Naate Neh Lok Ke Jete Te Manjh Dhaar Vahaiye.Aho Kishori Kahon Nihori Mohootan Chit Laiye...

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Ham Vasi Barsane Ke

(Raah Laavni Iman)Ham Vaasi Barsane Ke.Shri Chaitanya Upaasi Khaasi, Radha Govind Vaane Ke. [1]Lalit Kishori Garv Bhare Ham, Anyason Kyon Chit Laaneke...

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Shri Vrindavan Sahaj Ji Lalit Madhuri Roop

Shri Vrindavan Sahaj Ji, Lalit Madhuri Roop.Lalit Tribhangi Bhamini, Nitya Vihar Anoop. - Shri Lalit MadhuriSri Vrindavan is naturally the embodiment ...

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Janiju Ab Jaani Shrivan

(Raag Jila)Jaaniju Ab Jaani Shrivan, Deho Vaas Vihaarni Rani.An Karni Jo Vani Daasi Son, So Karni Nij Hiye Na Aani. [1]Darasai Chhavi Lalit Kishori, B...

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Shri Vrindavan Vaas Ki Aasa Yahi Manmaani

Shri Vrindavan Vaas Ki Aasa Yahi Manmaani. Lalit Madhuri Laal Daras Taji Aan Na Chit Aani. [1]Shri Radha Govind Kripa Aval Dridh Jiya Mein Thaani.Yuga...