श्री प्रेमदास (लाल बलबीर के भ्राता)
जीवन चरित
श्री श्री प्रेमदास (लाल बलबीर के भ्राता) वाणी संग्रह
किशोरी मोहि श्रीवन वास बसावौ
हे किशोरी श्री राधे, मुझे श्री वृंदावन का वास प्रदान कीजिए, जहाँ मैं सदा आपके चरण-कमलों की दासी बनकर रह सकूँ। कृपा कर मेरी इस अभिलाषा को पूर्ण कीजिए। ...
श्रीवृन्दावन-चन्द्र छवि श्रीराधा वर नाम
श्री वृंदावन की मनमोहक छवि और सर्वश्रेष्ठ "श्री राधा" नाम सदा रसिकों के हृदय में गूंजता हुआ विराजमान रहता है जो परम पावनता और सुंदरता का सार स्वरूप है...
मैं दरसन बिन अनमनी, बैठोंगी मुख मोर
श्री राधा के दर्शन प्राप्त न होने पर मैं व्याकुल होकर उनसे प्रेम में मान कर, मुख मोड़कर बैठूँगी। ऐसा कब होगा कि तब मेरी लाड़ली (राधा) आकर मुझसे कहेंग...
यह रस रसिकन के लिये रसिकहि रस बरसंत
प्रिया प्रियतम का यह दिव्य रस रसिकों के लिए ही है, और इस रस की वर्षा भी केवल उन्हीं पर होती है जो वास्तविक रसिक हैं। केवल रसिकजन ही इस अनमोल रस-रत्न क...
श्रीगुरु दीन दयाल जू यह अभिलाषा मोर
हे दीनदयाल गुरुदेव! मेरी यह अभिलाषा है कि युगल-चन्द्र (राधा-कृष्ण) के चरण-कमलों की छवि मेरे मन रूपी भौंरे की गति को चुरा ले, अर्थात् मेरा मन सदा उन श्...