सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री ठाकुर दास
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री ठाकुर दास वाणी संग्रह

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ठाकुरदास निज महल में, केलि नई नित होइ

श्री वृंदावन के निज महल में श्री श्यामा-कुंजबिहारी की नित्य नई-नई केलि-लीलाएँ होती रहती हैं। वहाँ स्वामी श्री हरिदास जी की कृपा के बिना कोई भी प्रवेश ...

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बार बार बंदन करौ

बारंबार श्री बिहारीजी के दासों को नमन करता हूँ। हे बाँके बिहारीलाल! ठाकुरदास आपकी शरण में है — कृपा कर उसे सदा अपने पावन चरणों के समीप रखें।

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प्रिया श्याम रूप रंग माती

दिव्य युगल श्री राधा-कृष्ण एक-दूसरे के अद्वितीय सौंदर्य एवं माधुर्य में पूर्णतः निमग्न हैं। उनके अंग-अंग से नित्य नवीन प्रेम की रसधारा प्रवाहित हो रही...

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ललित मोहिनी कृपा तें निरखत केलि विलास

श्री ललित मोहिनी देव जी की कृपा से, मैं युगल सरकार श्री बिहारी-बिहारिनी के अनुपम केली विलास के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहा हूँ। श्रीधाम वृंदावन नि...

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मेरौ लाल स्यामा रंग भीनौं

हे श्यामा जू (श्री राधा)! मेरा लाल (श्री कृष्ण) तो आपके ही रंग में रंगा हुआ है। तुम अपने मुख से कुछ बोलती क्यों नहीं, क्या लाल ने कुछ किया है? [1] श्...

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ललित मोहिनी कुंज में दई पुंज दरसाय

श्री ललित मोहिनी कुंज में प्रिया-प्रियतम के रस-सौंदर्य के अपार पुंज का दर्शन उनकी कृपा से ही संभव हुआ है। ठाकुरदास कहते हैं — वहाँ सहचरियाँ प्रेमरस मे...

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आज सखि वन की सोभा देखि

एक सखी दूसरी सखी से कहती है—"हे सखि! आज श्री वृन्दावन के वन की अनुपम शोभा तो देखो! श्री यमुना जी के पावन जल में निर्मल कमल के फूल अत्यंत खिले हुए हैं,...

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देत दीन कूँ दान नित सदा वृन्दावन वास

जो दीन को सहज ही श्री धाम वृन्दावन का वास प्रदान करते हैं, ऐसे स्वामी श्री हरिदास जी महाराज का भजन कर अपने मन को सदा उस परम शीतल, सुखद श्यामा कुंजबिहा...

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ललित मोहिनी कुंज में राजत अद्भुत रूप

श्रीधाम वृन्दावन के ललित-मोहिनी (रसमय) कुंज में श्री प्रिया-प्रियतम का अद्भुत स्वरूप विराजमान है। उन कुंजों में श्री ठाकुरदास जी रसों के सम्राट श्रीस्...

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श्री स्वामी हरिदास भजि सब सारनि कौ सार

स्वामी श्री हरिदास जी का भजन करो जो समस्त सारों का सार है। श्री ठाकुर दास जी कहते हैं कि श्री ललित मोहिनी देव जी की कृपा से नित्य विहार के इस अमूल्य र...