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Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

ghanannd grnthavali Collected Verses

general

आनँद के घन छैल सों करि ले चित को चाव

हे मन! उन आनंद के पुंज, परम रसीले छैल (श्री कृष्ण) से अपने चित्त का चाव (अनुराग) लगा ले। यदि तू प्रेम की वह दिव्य बेल चाहता है जो कभी कुम्हलाती नहीं, ...

general

इस्कलता ब्रजचंद की जो बाँचै दै चित्त

जिसको ब्रजचन्द्र श्री कृष्ण के दिव्य प्रेम की चाह हो तो वे अपने मन का अनुराग सुख के धाम श्री वृंदावन से करे और नित्त ही नित्त प्रेम की लहरों में डूबा ...

general

एक आस एकै बिसवास प्रान गहैं बास

हे प्रियतम! तुमसे पुनः मिलने की एक मात्र आशा और विश्वास के सहारे ही मेरे ये प्राण (शरीर में) बचे हुए हैं, क्योंकि, इन्हें अब किसी दूसरे से पहचान नहीं...

general

चातिक चुहल चहुँ ओर चाहै स्वाति

विनोदी स्वभाव का चातक पक्षी संसार भर के जल को त्यागकर केवल स्वाति की बूंद ही चाहता है — वह अपने प्रण का ऐसा पालनकर्ता है कि अमृत भी उसके लिए विष बन जा...

general

होरी खेलूँगी श्याम संग जाय

हे सखी, बड़े भाग्य से फागुन का यह उत्सव आया है, मैं जाकर श्याम के संग होली खेलूंगी। [1] सखी, बड़े भाग्य से फागुन (होली उत्सव) आया है, इसमें श्री कृष्ण ...

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कृपा-कादंबिनी जमुना बिराजै

कृपा की कादम्बिनी के समान यमुना जी शोभायमान है। यह उल्लास की मूर्ति हैं, इनके दर्शन मात्र से हृदय प्रेम से परिपूर्ण हो जाता है। श्री कृष्ण के स्पर्श क...