shri anandaghana
Biography & History
shri anandaghana Collected Verses
राधा मोहन मुख लगी
राधा के मन को मोहने वाले मोहन श्री कृष्ण के मुख से मुरली दिन-रात लगी रहती है; वह उनके अधर-रस को नित्य पीती रहती है और सदा ‘राधा-राधा’ गान करती है, जि...
राधा रसिक सँजीवनी
श्री राधा ही रसिकों के लिए प्राण-दायिनी संजीवनी के समान हैं और वे ही प्रियतम लाल (श्री कृष्ण) का जीवन-प्राण हैं। ब्रज के वनों की प्रत्येक लता और तमाल ...
रँगीली जोरी की बलि जाँव
श्री आनंदघन कह रहे है "ललित रूप - गुण की राशि, रँगीली जोरी श्री श्यामा कुंजबिहारी की बलिहारी है, जो सदैव यमुना किनारे कदम्ब लताओं के वन में विहार पराय...
रसिकनी राधा राधा है
श्री आनंदघन कह रहे है "रस प्रदान करनेवाली रस की मूर्तिमान स्वरुप, मूल रूप से रस स्वरुप, रसिकनी केवल श्री राधा हैं, जिनसे मिलने के लिए श्री श्यामसुंदर...
राधा राधा रटि राधा राधा रटि मेरी
श्री आनंदघन कह रहे हैं "राधा राधा रटते रटते मेरी रसना रसीली बन गयी है, एवं जितना अधिक इस अद्भुत रस का पान करता हूँ, उतनी ही अधिक नवीन प्यास प्रकट हो र...
राधा माधौ बिहरै बन मैं
श्री आनंदघन कह रहे हैं "श्री वृन्दावन में यमुना तट पर हरी भरी कुंजों में श्री राधा माधव मन में फुले फुले विचरण करते हैं।" केली प्रेम क्रीड़ा सुख में र...
बृंदावन नीको लागै है
श्री आनंदघन कह रहे है "श्री धाम वृन्दावन, जो सजल है, सघन है, श्री श्यामसुंदर के प्रेम का बाग है, मुझे अति प्रिय है। श्री यमुना के किनारे श्री श्यामसु...
छबीलो रसिकराय नवरंग
श्री आनंदघन कह रहे हैं "नित्य नवरंग रसिक शिरोमणि श्री श्यामसुंदर छबीले हैं। सुन्दर हाथों में सुन्दर मुरली धारण किये हुए श्री मनमोहन के समस्त अंग अति ...
मोहि दीजै जू ब्रजवास
श्री आनंदघन कह रहे है "हे नन्द महाराज तथा वृषभानु राय जी, कृपया मुझे ब्रजवास प्रदान कीजिये, मेरे ह्रदय की इस अभिलाषा को पूर्ण कीजिये। [1] श्री राधि...
देख्यौ देख्यौ राधा को बृंदावन
श्री आनंदघन कह रहे हैं "मैंने श्री राधा रानी का वृन्दावन देख लिया है, जिससे मेरा जीवन सब प्रकार से सफल हो गया है। [1] यमुना किनारे युगल दम्पति श्री र...
जो तुम बनावौगे सोई बनिहै
श्री आनंदघन कह रहे है "हे ब्रज के नायक श्री कृष्ण, मेरा जो भी भाग्य आप बनाओगे वही होगा, मेरे सोचने से कहाँ कुछ होगा। अब तक आपने मेरी बहुत अच्छी बनायी ...
दोऊ मिलि एकै भए
श्रीराधा-कृष्ण की यह दिव्य रसीली जोड़ी प्रेम के अतिरेक में मिलकर पूर्णतः एक हो गई है। मेरी यही एकमात्र अभिलाषा है कि यमुना के पावन तट पर, सघन कुंजों और...
ऐसें आरती करौ
प्रभु की आरती करनी हो तो ऐसी करो, हृदय-रूपी स्थिर और विशाल थाल सजाकर, उसमें प्रेम-रूपी दीपक को प्रज्ज्वलित कर रख दो। [1] स्नेह से युक्त, निर्मल ज्य...
मधुर केलिरस-झेलि सों
प्रिया प्रीतम की केली लीलाओं के मधुर रस में डूबकर, रसना दिव्य "राधा" नाम का अति अद्भुत आनंद लेती है, जो मनमोहक वाणी रूपी लता का ऐसा सुफल (सुंदर फल) है...
राधे दै बृंदावन-बास
हे श्रीराधे! कृपा करके मुझे श्रीवृंदावन में निवास प्रदान कीजिए। मेरा मन उसी प्रकार आप में स्थिर बना रहे, जैसे कोई पनिहारिन अपने सिर पर मटका रखे चलती ह...
ब्रजबन लीला माधुरी निरविधि रस कौ सार
ब्रजवन की लीलाओं की मधुरता अनंत रस का सार है। रसिक शिरोमणि श्री राधा-कृष्ण की कृपा से मुझे प्रेम का आधार प्राप्त हुआ है।
नित बिहार बृंदावन राधा मोहन
श्रीराधा और श्रीमोहन (श्रीकृष्ण) श्री धाम वृन्दावन में नित्य विहार करते रहते हैं। वे स्वभाव से ही सहज रंगीले, छैल-छबीले हैं, जो हृदय में प्रेम का संचा...
तिहारो सुख जौ मन मैं आवै
भावार्थ:- वृंदावन के सुख का वर्णन करते हए श्री आनंदघन जी कहते हैं कि जैसे ही वृंदावन के सुख (रस) हृदय में आता है तो अपने भाग्य की महिमा का वर्णन करना ...
राधा रास-सिरोमनी राधा केलि-कुलीन
श्रीराधा रास की शिरोमणि और केलि-लीला की परम कुलीन स्वरूपा हैं। वे समस्त कलाओं से परिपूर्ण, स्वयं रसस्वरूपिणी तथा प्रेम में पूर्णतः लीन रहने वाली प्रेम...
ब्रजमोहन उर अवनि में राधा-सुपद-विहार
श्री कृष्ण के हृदय रूपी धाम में श्री राधा के सुंदर चरण सदा विहार करते हैं जिससे उनका रोम रोम आनंद से भीग जाता है।
मोकौं सदा सरन यह वन है
मेरी एक मात्र शरण सदा से वृन्दावन धाम ही है। श्री राधा रानी ही मेरा जीवन प्राण एवं जीवन धन है एवं एक अपूर्व ज्योति की भाँती मेरी आंखों के आगे सदैव जगम...
मेरे मन दृग रीझि की
मेरे मन की इच्छा को श्री राधारानी तुरंत जान लेती हैं, और श्री राधारानी के हृदय की बात भी मेरे हृदय में तुरंत स्फुरित हो जाती है।
राधा मेरी संपदा
श्री राधा ही मेरे जीवन की एकमात्र सम्पदा और मूल आधार हैं; मेरा रोम-रोम हर्षित होकर प्रेमपूर्वक ‘राधा-राधा’ जपता है।
जो कछु है सो राधिका
मुझे जो भी चाह है, वह केवल श्री राधिका जी ही हैं—और कुछ नहीं। श्री राधा-चरण-रति ही मेरा प्रण और प्रतिज्ञा है, उसे निभाने का उत्तरदायित्व भी स्वयं श्री...
कहिबो सुनिबो समझिबो
जीवन में जो कुछ भी कहना, सुनना और समझना हो, वह केवल श्री राधा के विषय में ही होना चाहिए। जो भाग्यशाली जीव इस संसार को पूरी तरह भूलकर केवल श्री राधा के...
राधा राधा नाम को
श्री राधा नाम के रटन से जिह्वा को महास्वाद की अनुभूति होती है; इसलिए इस ग्रन्थ के इस प्रबंध को भी “प्रियाप्रसाद” नाम प्राप्त हुआ है, जिसमें एकमात्र श्...
राधा मेरे प्राण है
श्री राधा मेरी प्राण हैं और गोपाल श्री राधा के प्राण हैं; अतः मेरी श्वास नित्य ही राधा-मोहन (युगल नाम) की माला जपती रहती है।
अब कछु बाधा नाहिं रही
अब कोई बाधा नहीं रह गयी है, क्यूँकि अब मुझे मदन गोपाल मिल गए हैं, सारे साधन सफल हो गए हैं। [1] मेरा रोम रोम अति हर्षित हो रहा है, जीवन सफल हो गया है। ...
ए री रूप-अगाधे राधे, राधे राधे राधे राधे
हे श्री राधे, ब्रजमोहन श्री श्यामसुंदर आपसे मिलने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं, और केवल राधे राधे की पुकार कर रहें हैं। [1 & 2] उनको रात-दिन केवल आपस...
सुहागिनि राधा रानी
श्री श्याम सुंदर, ब्रजराज-दुलारे जिनके नित्य ही वश में रहकर स्वयं को अभिमानी मानते हैं वही परम सुहागिनी श्री राधा रानी हैं। [1 & 2] श्री किशोरी जी के ...
मोकौं सदा सरन यह वन है
मेरी एक मात्र शरण सदा से वृन्दावन धाम ही है। श्री राधा रानी ही मेरा जीवन प्राण एवं जीवन धन है एवं एक अपूर्व ज्योति की भाँती मेरी आंखों के आगे सदैव जगम...