shri chaturbhuj dasa
Biography & History
shri chaturbhuj dasa Collected Verses
श्री गोवर्धन वासी सांबरे लाल तुम बिन रह्यो न जाय
हे गोवर्धन वासी साँवरे लाल, आपके बिना रहा नहीं जाता। हे नन्द के दुलारे लाड़ले, आपके बिना अब रहा नहीं जाता। हे लाल जी, तिरछी चितवन से मुस्कुराकर आपने अ...
तू देख सुता वृषभान की
राजा वृषभानु की पुत्री श्री राधा को निहारो जिनकी नैंन मृग के समान मोहक हैं, जिनका अद्बुत रूप सौंदर्य है एवं जिनका अंग अंग सुंदरता की खान है। [1] श्री...
श्याम सों नेह कबहु न कीजै
श्याम सुंदर से कभी नेह मत करना क्यूँकि उनका मन और शरीर दोनों ही काले हैं। वह मन मोहक एवं सलोने हैं, यदि आपने उनसे प्रीति की तो वह तुम्हारा सब कुछ ले ...
प्रात में निकुंज द्वार ह्वै ललिता
प्रातः समय में ललिता एवं अन्य सखियाँ निकुंज द्वार में वीना बजा रही हैं। चतुर एवं नवीन दम्पति राधा कृष्ण अपनी शैया पर विराजमान हैं एवं वीना का आनंद ले ...
जे हैं स्वामी ते सेवक हैं प्रिया चरन सिर धारी
जो सबके स्वामी हैं वे श्री कृष्ण सदा श्री राधा चरणों के ग़ुलाम हैं और उनके श्री चरणों को सदा अपने सिर पर रखते हैं। श्री चतुर्भुजदास कहते हैं कि वे इस ...
नंदनंदन हिंडोरे झूलें माई री
नंदलाल श्रीकृष्ण झूला झूल रहे हैं, और संग में वृषभानु-दुलारी श्रीराधा अपनी अनुपम छवि से मोहक शोभा बिखेर रही हैं। वन में चारों ओर रिमझिम वर्षा की बूँद...
नव किशोरी नव किशोर बनी है विचित्र जोरी
युगल किशोरी-किशोर नवयौवन से युक्त, अनुपम सौंदर्य की दिव्य मूर्तियाँ हैं। श्रीकृष्ण, जो स्वयं कामदेव को मोहित करने वाले हैं, सौंदर्य के सागर हैं; और श्...
आजु सखी तोहिं लागी इहै रट
एक सखी दूसरी सखी की प्रेम-विह्वलता को देखकर कहती है— हे सखी! आज तो तुझे बस यही एक रट लग गई है। तू वृन्दावन के सीधे-टेढ़े और दुर्गम वीथियों में भटकती ...