shri hanuman prasad poddar (bhai)
Biography & History
shri hanuman prasad poddar (bhai) Collected Verses
श्रीराधारानी चरण विनवौं बारंबार
मैं बार-बार श्री राधारानी के चरणों में प्रणाम करता हूँ, जिन चरणों की कृपा से विषय-वासनाओं का नाश होता है और प्रेम-भक्ति का संचार होता है।
वन्दौं श्रीराधाचरण
मैं उन पावन और परम उदार श्री राधा के चरणों का वंदन करता हूँ, जो समस्त भय, संताप और अविद्या का नाश कर जीव को विशुद्ध प्रेम-भक्ति का दान देते हैं।
जाकी नख दुति लखि लाजत
मैं श्री राधा के चरण-कमलों का बार-बार वंदन करता हूँ, जिनके चरण-नखों की दिव्य ज्योति के सामने करोड़ों-करोड़ों चंद्र और सूर्य भी लज्जित हो जाते हैं। वे ...
पर्यौ रहौं नित चरन तल
मैं नित्य ही आपके [युगल] चरणों तले और प्रेम-दरबार [श्रीधाम वृन्दावन] में पड़ा रहूँ। मेरी केवल एक ही आशा है कि मुझे आप दोनों [श्री राधा-कृष्ण] के सुख-स...
दोउ चकोर दोउ चंद्रमा
श्री श्यामा-श्याम दोनों ही चकोर भी हैं और चन्द्रमा भी; दोनों ही कमल-पुष्प भी हैं और भ्रमर भी; दोनों ही चातक-पक्षी भी हैं और मेघ भी; दोनों ही मछली भी ह...
करौ कृपा श्रीराधिका
हे श्री राधे जू! मैं आपसे बार-बार विनयपूर्वक यही याचना करता हूँ कि मेरे हृदय में आपकी मंगलमयी, सुख-सार-स्वरूप मधुर स्मृति नित्य बनी रहे।
प्रेम भरे हिय सौं करें
हृदय में प्रेम भरकर श्री राधा की महिमा का नित्य ही श्रवण, मनन और ध्यान करें। ऐसा प्रेम उत्पन्न करें कि ‘श्री राधा’ नाम एक बार सुनते ही तन का भी भान न ...
तुम दोउन के चरण कौ बन्यौ रहै संयोग
हे प्रिया-प्रियतम! मेरे लिए तो बस आप दोनों के चरणों का सान्निध्य बना रहे, यही मेरी एकमात्र कामना है। हे राधा माधव! इसके अतिरिक्त आप जो चाहें सो करें, ...
सहज दयामयि राधिका
श्री राधिका स्वभाव से ही अत्यंत दयालु हैं, वे मुझ पर अपनी महान कृपा बनाए रखें। मेरी यही अभिलाषा है कि वे मुझ जैसे अधम (पतित) जीव को सदैव अपनी पावन चरण...
बन्दौ राधा पद कमल अमल सकल सुख धाम
मैं नित्य श्री राधा के अमल चरण-कमलों को प्रणाम करता हूँ, जो समस्त सुखों के धाम हैं। उन चरणों का प्रेमपूर्वक स्पर्श करने के लिए स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भ...
श्रीराधा ! अब देहु मोहि तव पद रज अनुराग
हे श्री राधा! ऐसी कृपा कीजिए कि मेरे हृदय में आपके श्रीचरणों की रज के प्रति सच्चा अनुराग उत्पन्न हो जाए। तब इस मिथ्या संसार के भोगों के प्रति स्वतः ही...
रसिक श्याम की जो सदा
श्री राधारानी के चरण-कमल, जो रसिक-शेखर श्रीकृष्ण के जीवन-मूल हैं, मैं सदा उनकी रज की वंदना करता हूँ।
जयति निकुंजबिहारिनी, हरनि स्याम संताप
निकुञ्ज में विहार करने वाली श्री राधा रानी की जय हो, जो श्यामसुंदर के हृदय के समस्त संताप और ताप को हर लेने वाली हैं। जिनकी श्रीअंग की छाया मात्र से क...
जिन श्रीराधा के करैं नित श्रीहरि गुन गान
जिन श्री राधा का श्री कृष्ण नित्य गुण-गान करते हैं, उन्हीं श्री राधा के प्रेम रस में रसखान श्री कृष्ण लोभी बने रहते हैं। [1] श्री कृष्ण अपने ह्रदय मे...
ऐसी जो प्रियतमा श्यामकी, त्याग-मूर्ति, गुणवती उदार
जो त्याग की प्रतिमूर्ति, गुणों की पराकाष्ठा और उदारता की सीमा हैं तथा श्री श्यामसुंदर की परम प्रियतमा हैं, उन श्री राधा के चरण-कमलों में मैं बारंबार ...
नित्य छबीली राधिका
श्री राधिका नित्य छबीली हैं, और ब्रजचन्द्र श्री कृष्ण नित्य छविमय हैं, दोनों श्री वृंदावन धाम में स्वच्छंद रूप से लीला विहार में निमग्न हैं।
जो कछु तुम चाहौ, करौ राधा-माधव! दोउ
हे श्री राधा-माधव! आप दोनों युगल सरकार जो कुछ भी चाहें, वही करें। मेरी बस यही एकमात्र अभिलाषा है कि जो आपके मन की स्वाभाविक रुचि और इच्छा हो, वही मेरी...
मोच्छहु की माया मिटै
मोक्ष आदि की लालसा ह्रदय से मिट जाये एवं समस्त भव रोगों का नाश हो जाय। हे श्यामा श्याम, मेरी यही इच्छा है कि तुम दोनों के चरणों का संयोग सदा बना रहे।
राधाजू ! मोपै आजु ढरौ
हे श्री राधा, आज मुझपर अपनी करुणा दृष्टि कीजिये। अपनी एवं अपने (निज) प्रियतम श्री कृष्ण की चरण रज की रति मुझे प्रदान कीजिये। [1] मेरे ह्रदय में स्थित...
जयति स्याम-स्वामिनि परम निरमल रस की खान
श्यामसुन्दर की स्वामिनि, श्री राधा की जय हो, जो निर्मल प्रेम-रस की खान हैं और जिनके चरणों पर प्रेम के निधान श्री माधव (श्री कृष्ण) नित्य ही बलिहारी जा...
स्वामिनी हे बृषभानु-दुलारि
हे स्वामिनी! हे वृषभानु की लाड़ली बेटी! आप श्री कृष्ण की प्रिया हैं, उनके प्रति समर्पित प्राणों वाली हैं और कीर्ति कुमारी हैं। आप नित्य निकुंज की ईश्व...
'रा' अक्षर को सुनत ही
जिनके नाम का केवल पहला अक्षर “रा” सुनते ही त्रिभुवन-मोहन श्रीकृष्ण के मन में अलौकिक आनंद की लहर दौड़ जाती है, ऐसे पवित्र और सुकुमार “राधा” नाम का मेरे...
जिनके दरशन हेतु नित
जिनकी एक झलक पाने के लिए घनश्याम-वर्ण श्री श्यामसुन्दर भी नित्य व्याकुल रहते हैं, ऐसी श्री स्वामिनी-जू के श्रीचरणों के नित्य स्मरण में मेरा मन सदा निम...
जिनके पद-रज-परस ते
जिनके चरणों की रज के स्पर्श मात्र से स्वयं नन्दनन्दन श्रीश्यामसुन्दर भी अपनी सुध-बुध खो बैठते हैं और प्रेम-विह्वल हो जाते हैं, मैं उन श्रीप्रिया जी के...
श्री राधा माधव चरनौ
मैं बारम्बार श्री राधा और श्रीकृष्ण के चरणों में प्रणाम करता हूँ, जो तत्वतः एक ही हैं, परन्तु भक्तों को सुख देने के लिए दो तन धारण किए हुए हैं।
जिन पद पंकज पर मधुप
जिन श्री राधा के चरण-कमलों पर श्रीकृष्ण के नयन नित्य ही मधुप की भाँति मण्डराते रहते हैं, उन्हीं श्री राधा के गोरे चरणों के नित्य दर्शन के लिए मेरा मन ...
परम प्रेम-आनंदमय
युगल सरकार (श्री राधा-कृष्ण) परम प्रेम और आनंद से परिपूर्ण हैं, साक्षात् रस का ही स्वरूप हैं। वे श्री धाम वृन्दावन में यमुना के पावन तट पर, कदम्ब के व...
श्री राधारानी के चरन
मैं बारम्बार श्री राधारानी के चरणों की वन्दना करता हूँ, जिनके कृपा-कटाक्ष से नन्दकुमार रीझ जाते हैं।
बंदौं राधा-पद-रज पावन
श्री राधा की पावन पद रज का मैं वंदन करता हूँ जो नित्य ही श्री श्यामसुंदर द्वारा सेवित है, परम पुण्यमय है एवं तीन प्रकार के तापों का विनाश करने वाली है...
जिनके पद
जिन श्री राधा के चरणों की रज के स्पर्श से ही साँवरे सरकार श्री कृष्ण की स्मृति विलुप्त हो जाती है! रज की उन कणिकाओं को प्रणाम करें जो मधुर रस की खान ह...