shri hare krishnanand sarasvati ‘hare krishna’
Biography & History
shri hare krishnanand sarasvati ‘hare krishna’ Collected Verses
एक से एक बड़े रसिकों के निवास जहाँ
जहां एक से बढ़कर एक रसिकों के निवास स्थान हैं, जहां एक से बढ़कर एक तत्वज्ञानी रहते हैं। [1] जहां एक से बढ़कर बड़े उदार विद्वान हैं, जहां एक से बढ़कर...
वारौं घनश्याम कोटि श्याम के कलेवर पै
श्यामसुंदर के शरीर पर कोटि-कोटि घनश्याम (काले बादल) को नयौछावर किया जा सकता है। भगवान कृष्ण के पीले वस्त्रों की कान्ति पर कोटि-कोटि विद्युत रेखाएँ नयौ...
माथे पे मुकुट देखो चन्द्रिका चटक देखो
श्री कृष्ण के माथे पर विराजित मुकुट को देखो, चंद्रिका की प्रभा को निहारो, और उनकी भृकुटी की मटक को देखो, जो मुनि जनों के चित्त का हरण करती है। [1] उन...
निन्दा करे कोई या प्रशंसा ही हमारी करे
यदि कोई हमारी निंदा करे या स्तुति करे, हम वृन्दावन की रज में रज के समान ही बने रहेंगे। [1] हम श्री कृष्ण के आश्रय के अभिमान में मस्त रहेंगे, चाहे हमे...
प्रेम की पिपासा बढ़ी देख निज प्रेमियों की
श्री राधा कृष्ण ने जब देखा कि उनके निज प्रेमियों की पिपासा बढ़ गई है तो उन्होंने अगाध प्रेम का समुद्र सीमा तोड़ कर बहा दिया। [1] अब भावुक रसिक भक्त न...
उनकी तलवार चले तो चले
प्रेम के मार्ग को समझाते हुए डंडी स्वामी श्री हरेकृष्णानंद सरस्वती जी कहते हैं — प्रेम के मार्ग पर चाहे प्रियतम तलवार भी चलाए, तब भी तुम विनम्रतापूर्व...
उठती अभिलाषा यही उर में
मेरे हृदय में यही अभिलाषा उठती है कि मैं श्री कृष्ण की वनमाला का फूल बनकर उनके हृदय से सटा रहूँ। [1] या तो कटि-काछनी बनकर उनकी कमर से लिपट जाऊँ अथवा ...
स्वर्ग में कहाँ है मधुर ध्वनि राधे राधे की
स्वर्ग में कहाँ “राधे राधे” की मधुर धुन सुनाई देती है? स्वर्ग में कहाँ हैं वे मनमोहक कुंज एवं वन? [1] स्वर्ग में कहाँ गोपियों, गायों और ग्वालों की भी...
शक्ति नहीं ध्रुव सी अखण्ड तप कैसे करूं
नाथ! मुझमें ध्रुव के समान ऐसी शक्ति नहीं कि अखंड तप कर सकूँ, और न ही प्रह्लाद के समान ऐसी भक्ति है कि निरंतर भगवद् नाम का स्मरण कर सकूँ। [1] राजा अंब...
कीर्तन के यूथ देख उठती उमंग एक
श्री धाम वृन्दावन में कीर्तन-मंडलियों को देखकर हृदय में उमंग उठती है। गोवर्धन पर दृष्टि पड़ते ही गोवर्धन-धारण करने वाले कृष्ण की स्मृति हो जाती है। [1...
देश देशान्तर के अनेक
देश-देशान्तर के अनेक व्यक्ति यहाँ खिंचे चले आते हैं, जिनके हृदय में प्रेम की प्रज्वलित ज्वाला धधक रही है। [1] यहाँ के कुञ्जों में गोपियाँ गुरु के गौर...
शिव शंकर छोड़ दियो डमरू
शिवजी ने अपना डमरू त्याग दिया और सरस्वतीजी अपनी वीणा छोड़कर भाग गईं; इस दिव्य मधुर धुन ने पाताल एवं नभ में ऐसी गूंज कर दी कि ऋषि नारद के सिर पर यह गरज...
मोहन तड़ाग बाग फूल फल मोहन हैं
यहाँ के तालाब (तड़ाग), बाग-बगीचे, फूल और फल सब मोहन (मन को मोहित करने वाले) हैं। यहाँ की गायें, पर्वत और गोवर्धन भी मोहन हैं। [1] यमुना नदी की जो धार...
इन्द्र-मद-मर्दन दुर्ग
गिरिराज गोवर्धन वह दुर्ग है जिसने इन्द्र के अभिमान का मर्दन किया था। श्री यमुना जी का जल अमृत के समान प्रवाहित होता है। [1] यहीं पर दिव्य प्रेम का प्...
वृन्दावन-वृक्ष हैं कि पारिजात नन्दन के
क्या ये वृंदावन के साधारण वृक्ष हैं, या स्वयं स्वर्ग के पारिजात वृक्ष हैं? क्या ये वृंदावन की शाखाएँ हैं, या किसी दिव्य प्रेम के अंजन से अभिषिक्त दिव्...