shri hit vrindavan dasa
Biography & History
shri hit vrindavan dasa Collected Verses
मात तात सुत दार देह में
हे मंदबुद्धि जीव! माता, पिता, पुत्र, घर और देह आदि की आसक्ति में फँसकर इस मानव-देह रूपी अमूल्य वस्तु को क्यों नष्ट कर रहा है? श्री हित वृन्दावनदास जी ...
देखा देखी रसिक न ह्वैहैं, यह मारग है बंका
श्री राधा कृष्ण के रसिक भक्तों को देख कर उनकी नक़ल करने से कोई रसिक कैसे हो सकता है, यह रस का मार्ग तो बड़ा टेड़ा है। [1] गीदड़ तो भय से वन-वन अकेला भटकत...
सुंदरता की हद मुरलीधर
सुंदरता की पराकाष्ठा श्री श्यामसुन्दर हैं, और ऐसी अद्भुत, अगाध छवि जिसकी कोई सीमा नहीं, वही श्री राधा हैं। सरस्वती भी अनंत रूप धारण करके इस दिव्य युगल...
हमारी नित इष्ट राधिका रानी
हमारी नित्य श्री राधा ही केवल इष्ट हैं, जिनके प्रेम में श्री श्याम सुंदर सदा पगे रहते हैं एवं उनकी रुचि मान कर उनके संग नित्य विहार करते हैं। [1] जिन...
सत चित आनन्द रूप है, श्री वृन्दावन धाम
श्री वृन्दावन धाम साक्षात् सत-चित-आनन्द स्वरूप है। यहाँ का कण-कण केवल 'हित' (शुद्ध प्रेम) से परिपूर्ण है, जहाँ नित्य-निरंतर श्री श्यामा-श्याम अपनी रसम...
वंदौं सुमति रसज्ञ जन
मैं उन सुंदर मति वाले, रसमर्मज्ञ करुणा धाम रसिक जनों की वंदना करता हूँ, जिन्होंने युगल श्री श्यामा श्याम के मिलन हेतु वाणी रूपी नेत्र बनाये हैं अर्था...
खेलत फाग सुहाग भरी अनुराग भरी
परम सौभाग्यवती लाडली श्री राधा अनुराग से भरी प्रियतम लालजी (श्री कृष्ण) संग होली खेल रही हैं। [1] वे गुलाल भर कर लालजी के ऊपर डाल रही हैं। श्री लालजी...
श्री राधा कौ वृन्दावन रसमय
श्री राधा का वृंदावन अति रसमय है, जो मोहन (श्रीकृष्ण) को अत्यंत प्रिय है। [1] प्रीतम श्रीकृष्ण की वृंदावन के प्रति ऐसी अनन्य निष्ठा है कि वे एक पग भी...