shri paramanand dasa
Biography & History
shri paramanand dasa Collected Verses
यह तन नवल कुँवर पर वारौं
आपने सर्वस्व को युगल किशोर पर वारों। नवल निकुंज वृंदावन में बार बार गौर श्याम श्री राधा कृष्ण को निहारो। [1] मुझ पर ऐसी कृपा कीजिए की मुझे नित्य आपकी...
जबते प्रीति श्याम सों
जब से मैंने श्याम सुन्दर से प्रीति की है, उस दिन से अब तक एक क्षण को भी मेरे इन नैनों ने नींद नहीं ली। [1] मेरा हृदय तो मानो चक्की में ही पीस दिया ...
गिरधर सबही अंग को बाँको
(राग गौरी व कल्याण) गिरधर सबही अंग को बाँको, बाँकी चाल चलत गोकुल में छैल छबीलो काको [1] बाँकी भौंह चरन गति बाँकी बाँको हृदय है ताको, परमानन्द दास को ठ...
पान मुख बीरी राची
श्री परमानंद दास कहते हैं "हे हरि, मैंने यह सुगंधित पान की बीरी आपके रूचि के अनुसार बनायी है, जैसी आपको पसंद है। मुझपर ऐसी कृपा कीजिये कि कभी आपका कभ...
सखी मेरो आगम को दिन आयो
श्री परमानंद दास कहते हैं "हे सखी, मेरे आगे बढ़ने के दिन आ गए हैं, तप्ति हुई गर्मी समाप्त हो गई है तथा बादल छा गए हैं।" [1] श्री परमानंद दास कहते हैं "...
आवत री यमुना भर पानी
अरी सखी आज मैं श्री यमुनाजी का पानी भरके आ रही थी, गैल में न जानें साँवरे स्वरूप वाले ने क्या जादू कर दिया कि उसकी चितवन की कोर से मैं मार्ग ही भूल गय...
राधे तू बड़भागिनी कौन तपस्या कीन
हे श्री राधे! आप अत्यन्त भाग्यशालिनी हैं; आपने ऐसी कौन-सी तपस्या की है कि तीनों लोकों के स्वामी श्री हरि सदा आपके वश में रहते हैं?
मेरौ मन बाबरौ भयौ
मेरा मन बांवरा हो गया है। यहाँ एक आकर्षक लड़का खड़ा था, उसके संग ही मेरा मन न जाने कहाँ चला गया। [1] मुझे नहीं पता कि वह किसका पुत्र था, परंतु उसका अ...
धनि धनि बृंदावन के वासी
धन्य धन्य हैं वृन्दावन के निवासी जो श्री श्यामाश्याम की उपासना करते हैं और नित्य ही उनके चरण कमलों के प्रेम में पगे रहते हैं। [1] जो लोग इस दिव्य रस ...
अलकलड़ी मोहन की जोरी
अलकलड़ी श्री राधा एवं मनमोहन श्री कृष्ण की जोड़ी अद्भुत शोभायमान है। रस की खान श्री कृष्ण नंद जू के दुलारे हैं एवं उनकी नित्य दुल्हन श्री राधा वृषभानु ज...
जो जन हिरदै नाम धरै
जिनके ह्रदय में भगवान् का नाम नित्य विराजमान है उनके पीछे बेचारी अष्ट-सिद्धि और नवों निधि मुख से लार टपकाते हुए फिरती हैं। [1] उनका लोक ब्रह्मलोक, शि...
श्रीघनश्याम मनोहर मूरति करत विहार वृन्दावन
श्री परमानंद दास के आराध्य मुरली-मनोहर श्री कृष्णचंद्र वृंदावन में नित्य विहार करते हैं, जहाँ वे दिन-रात हृदय को मोह लेने वाली दिव्य लीलाओं में रत रहत...
कौन रसिक है इन बातनि कौ
ऐसा कौन रसिक है जो इन बातों को समझ सकेगा; हे सखी, रसिक शिरोमणि नंदनंदन (कृष्ण) के अतिरिक्त ऐसा कौन है जो मेरे तन के दुखों (वियोग) को समझ सकता है ? [1...
प्रीति तो नंदनंदन सों कीजै
नंद लाल श्री कृष्ण से प्रेम करो! वह ही केवल हैं जो अच्छे और बुरे समय में जीव के साथ सदा रहते हैं। उनकी कृपा से ही हम जीवित हैं। [1] वह सेवा और स्मरण ...
आवति आनंद कंद दुलारी
आनंदकंद दुलारी श्री राधिका आ रही हैं जिनका बदन चंद्रमा के समान है, जिनके नयन मृग समान हैं एवं जो दामोदर [श्री कृष्ण] की प्यारी हैं। [1] श्री राधिका स...
तन मन नवल जुगल पर वारौं
अपने तन मन को दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण पर समर्पित करता हूँ । मैं बार-बार गौर श्याम वर्ण की युगल जोड़ी को कुंज के भीतर किसी द्वार से निहारता रहूँ।[1]...
व्रजवासी जाने रस रीति
रस रीति को केवल ब्रजवासी ही जानते हैं, जिनके हृदय में श्री श्याम सुंदर के चरणों के प्रति अनन्य प्रेम है। [1] उनका प्रत्येक भाव केवल श्री राधा कृष्ण क...
आनंद सिंधु बढ्यौ हरि तन में
श्री राधा के शरद पूर्णिमा के चन्द्र के समान मुख को देखकर, श्री कृष्ण के श्री अंगों में आनंद का सिंधु ऐसा उमड़ने लगा कि वह आनंद का समुद्र लहर बनकर ब्रज...
प्रीति तौ एकहिं ठौर भली
प्रेम तो एक जगह (एक से ही) ही करना चाहिए। यदि यह मन प्रभु के चरण कमलों को त्याग देगा, तो अनायास ही लक्ष्यहीन होकर संसार में भटकेगा। [1] कुछ ही भाग्यश...
खेलत मदन गोपाल बंसत
श्री मदन गोपाल आज बसंत खेल रहे हैं। उनके संग में नवल रसिक चूड़ामणि श्री राधिका हैं जिनके संग राधिका कंत श्री श्यामसुन्दर शोभायमान हैं। [1] श्री श्याम...
बाँह डुलाबति आवति राधा
अपनी बाहों को झुलाते हुए, श्री राधा आ रही हैं। उनका कमल के समान मुख आधा ढका हुआ है, जिसके कारण उनका आधा तिलक मिटा हुआ है। [1] गिरिधर लाल, नंद कुमार क...
सहज प्रीति गोपालै भावे
श्री गोपाल जी को केवल सहज प्रेम ही प्रिय है, जिसमें कोई बनावट नहीं होती। हे सखी, जब मैं अपने प्रियतम श्री कृष्ण का मुख देखती हूँ, तो उससे मुझे अपार सु...
आज दिवारी मंगल चार
आज दीपावली का शुभ दिन है। ब्रज की युवतियाँ नंदनंदन श्रीकृष्ण के आँगन में आनंदपूर्वक मंगल गीत गा रही हैं और आँगन को सजा रही हैं। [1] वे सोने की थालियो...
ब्रज में होत कुलाहल भारी
श्रीकृष्ण जन्म के कारण ब्रज मण्डल में अतिशय कोलाहल हो रहा है। सभी ग्वाले आनन्द मग्न होकर परस्पर ताली बजाते हुए नाच रहे हैं। [1] नन्द जी के घर में ब्र...
तनक सोहागो डारिकें जड़ कंचन पिघलाय
जिस प्रकार सोने (सुवर्ण) पर तनिक सा सुहागा डालने पर जड़ सुवर्ण भी पिघल जाता है, तब श्री राधा तो सदा सुहागिन हैं, उनके स्वरूप को देखकर श्री कृष्ण का पि...
वृंदावन क्यों न भये हम मोर
हे विधाता! मुझे वृंदावन का मोर क्यों नहीं बनाया? जहाँ मैं गोवर्धन पर्वत पर वास करता और नंदकिशोर श्रीकृष्ण को निहारा करता। [1] हे सखि! मैं वंशी क्यो...
चलि राधा! तोकौं स्याम बुलावै
सखी श्री राधा से कह रही है—“हे श्री राधे! चलो, तुम्हारे प्रियतम श्यामसुंदर तुम्हें बुला रहे हैं। ज़रा चलकर देखो, वे अपनी वंशी के मधुर स्वरों में तुम्ह...
कुञ्ज महल में पौड़े दोउ
श्री राधा कृष्ण सुंदर कुंज महल में सुशोभित हैं। [1] श्री राधा कृष्ण की इस अद्भुत उपमा का वर्णन किसी और से करना असंभव है। [2] विभिन्न प्रकार के फूलों ...
ब्रज के श्वपच बड़े बड़भागी
ब्रज के स्वपच अत्यंत बड़भागी जन है क्योंकि इनके अंगों में नित्य ही वह ब्रज रज लगी रहती है जिस रज को साक्षात ब्रह्मादिक देवता भी तरसते हैं। [1] वह नित...
बाँह डुलावति आवति राधा
श्री राधा अपनी भुजाएँ डुलाती (मटकाती) हुई आ रही हैं। वे अपने कमल-समान मुख को ढके हुए हैं और उसे पूरी तरह नहीं खोलतीं; उनके माथे का तिलक भी आधा मिट गया...
आरती युगल किशोर की
दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण की आरती करें, एवं अपने तन, मन और धन का पूर्ण रूप से समर्पण करें। [1] गौर श्याम रंग के सुंदर मुख को निहार कर ही अपना जीवन ...
यह माँगों गोपी-जन-बल्लभ
हे गोपीजनवल्लभ (श्री कृष्ण)! मैं आपसे बस यही वरदान माँगता हूँ की जब जब भी मुझे मनुष्य जन्म प्राप्त हो, श्री हरि की सेवा मिले और श्री ब्रजधाम का ही वास...
लगै जो श्रीवृन्दावन कौ रंग
प्रस्तुत पद में श्री वृंदावन धाम की महिमा का गुणगान बहुत सुंदर शब्दों में रसिक श्री परमानंद दास जी ने किया है। वह कहते हैं कि जब से वृंदावन का रंग चढ़...
साँची प्रीति भई इक ठौर
सच्चा और निश्छल प्रेम आज एक स्थान पर उपस्थित हो गए हैं। वह मृगनयनी श्री राधा और कमल दल के समान नेत्र वाले श्री श्याम सुंदर हैं जो गौर एवं श्याम वर्ण क...
धन धन राधिका के चरन
श्री राधा जी के चरण धन्य हैं, वे अति ही सुंदर, शीतल, कोमल एवं मुलायम हैं, नए कमल की पंखुड़ियों की भांति गुलाबी वर्ण के हैं। पूर्णिमा के चंद्रमा की भां...
प्रगट्यो सब व्रज को सिंगार
ब्रज की सम्पूर्ण श्रंगार श्री राधाजी प्रकट हुई हैं। वह श्री कीर्ति जी के कोख से प्रकट हुई हैं और सम्पूर्ण सौंदर्य की सार हैं। इनके चरण नख से सिर के के...
आज बने सखि नंदकुमार
श्री परमानन्द दास एक सखी से कह रहे हैं "अरे सखी, देखो तो, आज नन्दकुमार की छवि कितनी सुन्दर बनी है, उनके वाम भाग में वृषभानु नंदिनी विराजित हैं, एवं लल...
साँची प्रीति भई इक ठौर
सच्चा और निश्छल प्रेम आज एक स्थान पर उपस्थित हो गए हैं। वह मृगनयनी श्री राधा और कमल दल के समान नेत्र वाले श्री श्याम सुंदर हैं जो गौर एवं श्याम वर्ण क...