SaintsBooksRagasShlokasStrotrasPoems
HomeSaintsshri vitthalanath (gusain )
All Saints

Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

shri vitthalanath (gusain ) Collected Verses

general

चिन्तनाद्यस्य तत्वस्य रसज्ञा

जिन चरणों [रस के सार तत्व] का चिंतन करने से रस के पूर्ण ज्ञाता (अर्थात रसिक प्रेमी जन) भक्ति की पराकाष्ठा को प्राप्त करते हैं, ऐसे श्री राधा के चरणों...

general

वन्देऽहं सच्चिदानन्दं कृष्णं

मैं उन कमल नयन सच्चिदानन्दं श्री कृष्ण को प्रणाम करता हूँ जो श्री राधिका के अधर रूपी सुधा निधि का पान कर [एवं अभिलाषा कर] कभी भी पूर्ण संतुष्टि को प्र...

general

किशोरं युगलंवन्दे वृन्दावनविहारिणम्

मैं उस युगल किशोर जोड़ी (राधा कृष्ण) को नमन करता हूं जो वृंदावन में विहार पारायण हैं, समस्त कलाओं एवं गुणों से युक्त हैं, एवं निकुंजों में निवास करते...

general

श्री श्यामां मधुरस्वरां सुनयनां

श्रीराधा की वाणी मधुर है और आंखें अति सुन्दर हैं, वे बहुत बुद्धिमान हैं और श्रीकृष्ण की प्रिय हैं। वे समस्त लक्षणों से परिपूर्ण हैं जो अपनी दासियों को...

general

श्रीराधां रसकेश्वरीं प्राणयिनीं सर्वांङ्गभूषावृताम्

श्री राधा रसिक संतों की ईश्वरी हैं, जो भगवान कृष्ण की प्राण-प्रिय हैं, जिनके अंग विभिन्न अलंकरणों से सुसज्जित हैं, जो वृंदावन की 'केली' लीला में सर्व-...

general

निमंत्र्य प्रातर्या निजहृदयनाथं

निमंत्र्य प्रातर्या निजहृदयनाथं निरूपमा समाकार्यै काकिन्यतिघनवनादात्मभवने॥ विधायान्नं स्वादुस्वयमति मुदा भोजयति सामयि प्रीता राधा भवतु हरि संगार्पित म...

general

रासक्रीड़ासमासक्तं परात्परतमं

युगल किशोर श्री राधा कृष्ण अत्यंत उदार हैं, रास-क्रीड़ा में आसक्त हैं तथा एक-दूसरे के प्रेम में विह्वल हैं। मैं उनके चरण कमलों को सदा प्रणाम करता हूँ।

general

गौरश्यामं कृपासाध्यं

मैं उन दिव्य युगल श्री गौर श्याम [राधा कृष्ण] को प्रणाम करता हूँ जो केवल कृपा साध्य हैं, कोटि-कोटि कंदर्पों से भी सुन्दर हैं एवं जिनकी कोटि-कोटि सखिया...

general

निधाय श्यामांसे निजभुजलतामिंदु

निधाय श्यामांसे निजभुजलतामिंदु वदनं कटाक्षैः पश्यंती कुवलय दलाक्षी मधुपतेः॥ मुदा गायन्ती या मधुर मुरली जात निनदानुसारं तारं सा फलतु मम राधावदनयोः॥ - ...

general

अमंद प्रेमार्द्रात्किसलयमयात्केलिशयन

प्रियतम के चर्वित ताम्बूल को मुख में रख केलिशयन उपरांत उषा काल में जग कर अरुण कपोल वर्णित ताम्बूल प्रक्षेप का विचार करने वाली, कुञ्ज से घर को पधारते स...

general

वृन्दावने चारु बृहद्वने

हे सूर्यपुत्री यमुना जी! मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप वृंदावन धाम में ही मेरा मनोरथ पूर्ण करें, जहाँ यमुना तट पर श्री कृष्ण का नित्य विहार दृष्टिगोचर ...

general

प्रियेणाक्ष्णा संसूचित् नवनिकुंजेषु

प्रियेणाक्ष्णा संसूचित् नवनिकुंजेषु बिविधप्रसूनै र्निर्मायातिशय रुचिरं केलिशयनम्। दिवाष्येषां गुंजन्मधुपमुखरे धीरपवनाश्रिते क्रीडंती में निज चरण दास्य...

dham

कदंबारूढं या निजपतिमजानंत्यहनि

प्रियतम के कदंबारूढ़ होने से अनभिज्ञ, जिन्हें सखी से प्रियतम की कथा के मध्य विरह हुआ, पश्चात् सब ओर दृष्टि कर अकस्मात जब ऊपर प्रियतम के दर्शन से मुख कम...

general

रहस्यं श्रीराधेत्यखिल

समस्त निगमागमों का धन, निगूढ़ पर रहस्य के समान, 'श्रीराधे’' वह नाम ही मेरी इस वाणी से उच्चारण होता रहे। इसके अतिरिक्त और कोई नाम उच्चरित ही न हो। साध...

general

न मे भूयान्मोक्षो न पुनरमराधीश सदनं

मुझे न तो मुक्ति की इच्छा है और न ही भगवान कृष्ण के दिव्य लोकों की। मैं न तो योग के फल की इच्छा रखता हूँ, न ज्ञान की और न ही इंद्रियों के क्षणभंगुर सु...

general

इत्थं जीवन मस्तु क्षणमपि

हे राधे, मैं ऐसी कामना करता हूँ कि मैं तत्काल प्राण त्याग दूँ यदि मैं एक क्षण के लिए भी आपसे दूर हो जाऊँ और मैं नित्य केवल और केवल आपकी ही शरण ग्रहण ...

general

भवतीनां प्रियसङ्गम संजात

हे राधे, ऐसा कब होगा जब आपको अपने प्रियतम श्याम सुंदर से मिलने पर जो अपार आनंद प्राप्त होता है जिसमें प्रत्येक क्षण नित्य नव रस उत्सव होता है, उसको दे...