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जुगल रूप ऐसो चितैं
प्रेम से रोमांचित होकर, अपने तन की सुधि भूलकर, युगल-रूप का ऐसा चिंतन कीजिए जिसमें वे नूपुरों की झंकार करते हुए यमुना-किनारे विहार कर रहे हों।
general
जो मन अरुझ्यो रूप हैं क्यों हू कहत बनैं न
श्यामा-श्याम के अनुपम रूप-सौंदर्य में अटके हुए मन की दशा को शब्दों में व्यक्त करना असंभव है, क्योंकि जीभ के पास वह मन नहीं है, और मन के पास वह जीभ नही...
general
कबै झुकत मो ओर कौं
ऐसा कब होगा जब श्री प्रिया-लाल वृन्दावन में यमुना-तट पर लता-पत्तों के मध्य विहार करते हुए, एक-दूसरे को गलबहियाँ दिए, एक-दूसरे की ओर झुके हुए, अलमस्त ग...
general
कब श्री वृन्दावन धरनि
श्री वृन्दावन धाम की पवित्र भूमि पर चरण रखने का अवसर मुझे कब प्राप्त होगा? मैं उस रज में लोट जाऊँगा, कुछ अपने सिर पर धरूँगा और कुछ मुख में धारण करूँगा...