SaintsBooksRagasShlokasStrotrasPoems
HomeGranthasश्री राधा नाम सुधा
All Books
Sacred Scripture

श्री राधा नाम सुधा

Verses & Passages

9 items
general

राधा साध्यं साधनं यस्य राधा मन्त्रो राधा मन्त्रदात्री च राधा

जिस अधिकारी जीव का राधा ही साध्य है और राधा ही साधन है। मंत्र भी राधा है और मंत्र देने वाली गुरुरूपा भी राधा है। राधा ही जिसका सर्वस्व है और राधा ही ज...

general

विष्णुश्चक्रधरः प्रयाति पुरतः

जो व्यक्ति मार्ग में गमन करते हुए केवल ‘राधा’ नाम का स्वच्छन्द उच्चारण करता है उसका बहुमान करते हुए आगे-आगे चक्रधारी श्रीविष्णु भगवान, पीछे पीछे शूलध...

general

वृषभानुसुता राधा- जन्म कोटि शतैरपि

करोड़ों जन्म तक वांछा करने पर भी वृषभानु सुता श्री राधा जिसके ह्रदय में प्रकट हो जाय, वही मानुष धन्य है।

general

रसस्वरूपः श्रीकृष्णः रसिकस्तु

श्रुतियों ने भगवान् को रस स्वरूप आनन्द स्वरूप बताया है, रस का भोक्ता नहीं बताया। रसभोक्ता रसिक तो उनको श्रीराधा ने बनाया है। भागवत में श्रीशुकदेवजी ने...

general

अदेयं चापि या दत्ते-दत्वा रक्षां करोति या

श्री राधा अपने भक्त (नाम-आराधक) को अदेय वस्तु भी दे देती हैं और उस वस्तु की रक्षा भी करती हैं। राधा योगक्षेम करने वाली हैं, भक्तों को ऐसा अनुभव भी होत...

general

रादाने धारणे धा च इति धातुद्वयादपि

‘रा’ दानार्थक (दान करने की धातु) और ‘धा’ धारणार्थक (धारण करने अथवा रक्षा करने की धातु)—इन दोनों धातुओं से ‘राधा’ नाम की उत्पत्ति मानी जाती है। यह तथ्य...

general

वृद्धयर्थात् राधधातोश्व राधा

‘राधा’ शब्द ‘राध्’ धातु से उत्पन्न है, जिसका अर्थ है वृद्धि करना या उन्नति देना। इसी कारण भक्तजन श्रीराधा को ब्रह्म से भी अधिक गुण सम्पन्न मानते हैं। ...

shloka

राधा साध्यं साधनं यस्य राधा मन्त्रो राधा मन्त्रदात्री च राधा

जिस अधिकारी जीव का राधा ही साध्य है और राधा ही साधन है। मंत्र भी राधा है और मंत्र देने वाली गुरुरूपा भी राधा है। राधा ही जिसका सर्वस्व है और राधा ही ज...

shloka

अन्तरायान् रसास्वादे-दोषान्

श्री राधा अपनी अहैतुकी कृपा से भक्तों के रसास्वादन (दिव्य प्रेम-रस) में आने वाली बाधाओं तथा काम, क्रोध आदि दोषों सहित समस्त पापों का समूल नाश कर देती ...