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Sacred Scripture

भारतेंदु ग्रंथावली

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

51 items
general

विछुरे पिय के जग सूनो भयो

श्री राधा-कृष्ण के बिना यह संसार सूना और रसविहीन प्रतीत होता है; इन क्षणभंगुर वस्तुओं से उस दिव्य आनंद की प्यास कैसे बुझेगी? [1] जब उनके दर्शन का अम...

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तन पुलकित रोमांच करि

'राधा-राधा' नाम का संकीर्तन करते समय ऐसी भावावस्था उत्पन्न हो कि शरीर पुलकित और रोमांचित हो उठे, नेत्रों से अश्रु-धारा प्रवाहित होने लगे और प्रेम की प...

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ब्रज रज में लोटत रहौ

संसार के समस्त प्रपंचों का त्याग कर, पावन ब्रज-रज का आश्रय ग्रहण करें। युगल सरकार श्री राधा-कृष्ण के श्री चरणों में अटूट श्रद्धा और दृढ़ विश्वास धारण क...

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हमारी प्रान-जीवन-धन श्यामा

हमारे जीवन का प्रान धन श्री राधा हैं जो समस्त व्रज की नव युवती गण में चूड़ामनि हैं एवं भगवान हरि को पूर्ण रूप से मोहित करने वाली हैं। [1] श्री राधा अ...

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हमारी सरबस राधा प्यारी

हमारी परम प्रिय श्री राधा, जो सम्पूर्ण ब्रज की देवी हैं, जो वृषभानु दुलारी हैं, जो भगवान हरि के लिए सुख का साक्षात स्वरूप हैं, वे ही हमारा सर्वस्व हैं...

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राधा जी हो वृषभानु कुमारी

कुंवरी श्री राधिका ही श्री वृषभानु जी की लाड़ली हैं जिनके चरण नख की कांति पर कोटि कोटि चंद्रमा नयौछावर किए जा सकते हैं। श्री राधिका श्री कीर्ति महारान...

general

केवल पैये प्रेम में प्यारो

श्री हरिचंद जी कहते हैं "श्री कृष्ण न ज्ञान से प्राप्त हो सकते हैं न ध्यान से, वे सब कर्मों एवं नियमों से न्यारे हैं, उन्हें केवल प्रेम से ही पाया जा ...

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प्यारे जू तिहारी प्यारी अति ही गरब भरी

हे प्यारे जू, आपकी प्राण प्यारी श्री राधा अति ही गर्व से भरी है, दृढ हठीली हैं, उन्हें आप ही मनाइये। [1] मैंने बहुत प्रयत्न किया लेकिन वे मान नहीं रह...

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हमारी श्री राधा महारानी

हमारी श्री राधा महारानी तीनों लोकों के ठाकुर की भी ठकुरानी हैं। [1] समस्त ब्रज की सिरताज अन्य कोई नहीं हमारी श्री लाड़िली जी हैं जो सखियों को नित्य ...

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हमारी प्यारी सखियन की सिरताज

सर्वोत्तम स्वभाव वाली श्री राधा, जो हर क्षण स्नेह बरसाती हैं वे सरस सोभा की निधि हैं एवं समस्त जनों की हृदय की इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं। श्री भा...

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जो पै श्री राधा रूप न धरतीं

यदि श्री राधा ब्रज-धाम में प्रकट नहीं होतीं तो जग में प्रेम-पंथ का प्राकट्य नहीं होता, ब्रजांगनाएं तब क्या करतीं ? [1] तब कौन पुष्टिमार्ग की स्थापना ...

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ब्रज-रज मैं लोटत रहौ

संसार के सभी जंजालों को छोड़कर ब्रज-रज में लोटते रहो। श्री राधा-गोपाल के चरणकमलों में दृढ़ विश्वास रखकर उनका भजन करो।

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जय जय जय जय जय श्री राधा

श्री राधा की जय हो। जब से बरसाने में श्री राधा प्रकट हुई हैं तब से उन्होंने अपने जनों की समस्त बाधाओं का हरण कर लिया है। [1] समस्त सखियाँ अपने मन में...

general

दोऊ हाथ उठाई कै कहत पुकारि-पुकारि

दोनों हाथ उठाकर मैं पुकार-पुकार कर कहता हूँ— यदि तुम अपना भला चाहते हो, तो मुरारी (श्रीकृष्ण) का भजन करो।

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निठुराई मत कीजिए

हे प्रभु, मुझ पर कृपा करने की बारी आई तो आप अब निष्ठुरता मत कीजिए, अन्यथा आपकी 'दया-समुद्र', 'कृपानिधान', 'करुणा की सीमा' आदि बड़ी-बड़ी उपाधियों पर प्...

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प्राननाथ व्रजनाथ जू

हे प्राणनाथ, हे ब्रजनाथ, हे नंदनंदन श्रीकृष्ण! मेरे हृदय की पीड़ा को हर लीजिए। मैं भवसागर में डूब रहा हूँ—दौड़कर मुझे अपनी करुणामयी भुजाओं में भरकर सद...

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मरौ ज्ञान वेदान्त को

वेदान्त का शुष्क ज्ञान भले ही समाप्त हो जाए और कर्मों का यह कठिन जाल जलकर भस्म हो जाए; मेरी तो बस यही एकमात्र अभिलाषा है कि नन्द के लाड़ले श्री कृष्ण म...

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श्रीराधे वृषभानुजा तुम तौ दीन-दयाल

हे वृषभानु-नन्दिनी श्रीराधे! आप तो स्वभाव से ही करुणावत्सला और दीन-दयालु हैं; फिर किस कारण आपने मेरे प्रति ऐसी निष्ठुरता धारण कर ली है? अपनी इस दीन-दा...

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प्रीति की रीत ही अति न्यारी

प्रीति की रीति तो अति ही न्यारी है। यह प्रीति (प्रेम) का मार्ग लोक, वेद एवं अन्य सभी मार्ग से थोड़ा उलटा है जिसे केवल प्रेमी ही पसंद करते हैं। [1] इस...

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अहो नाथ ब्रजनाथ जू कित त्यागौ निज दास

हे ब्रज नाथ, मेरे प्राणनाथ श्री कृष्ण! आपने अपने इस निज दास को क्यों त्याग दिया। कृपा कर जल्द ही मुझे अपने दर्शन से कृतार्थ करो क्योंकि तुम्हारे मिले ...

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रहौं मैं सदा जुगल-भुज छहियाँ

हे श्री राधा कृष्ण, मैं सदैव आपके भुजाओं की छाया में रहना चाहता हूँ, अब मेरा त्याग न कीजिये, मुझ दीन की बाँह पकड़ लीजिये। [1] मुझे सदैव श्री वृन्दावन ...

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मोरौ मुख घर ओर सों तोरौ भव के जाल

अपने सांसारिक घर की वासनाओं से मुख मोड़कर, भव के जाल (सांसारिक झंझटों) को तोड़कर, समस्त साधनों को त्याग कर, एक नंदलाल श्री कृष्ण का निष्काम एवं निष्कप...

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दीनदयाल कहाय के धायकें

एक भक्त बाँके बिहारी से मानपूर्वक प्रेम से कहता है— सर्वप्रथम तो आप स्वयं को ‘दीनदयाल’ कहलवाते हैं, फिर दीनजनों से नेह बढ़ाते हो अथवा वे आपसे प्रेम कर...

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साधन छाँड़ि अनेक विधि

हे श्री राधा, मैं समस्त साधनों को छोड़कर आपके द्वार पर आकर पड़ा हूँ, मुझे अपना मानकर किसी भी उपाय से मुझे अपनी सेवा प्रदान कीजिए।

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चिरजीवो होरी के रसिया

हे होली के रसिया श्री कृष्ण, तुम चिर काल तक जियो। तुम नित्य मेरे संग होली खेलो जिसमें नित्य ही तुम्हारे मधुर गाली एवं हँसी होगी। [1] तुम्हारे माथे ...

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लोक वेद कुल-धर्म बल

मैं लोक, वेद, कुल-धर्म के बल से विहीन हूँ एवं सब प्रकार से अति हीन हूँ। परंतु ब्रजराज श्री कृष्ण चन्द्र के चरणों के बल से मैंने परम ढिठाई (ढीठता) की ह...

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श्री जमुना-जल पान करू

मेरी यही अभिलाषा है कि मैं सदा वृंदावन का वास करूं और श्री यमुना जल का पान करता रहूं। मुख में महाप्रसाद रखूं और श्री वल्लभ नाम का उच्चारण करूं।

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राधे भई आपु घनस्याम

आज श्री राधा ने घनश्याम श्री कृष्ण का स्वरूप धारण कर लिया है। राधा नाम का त्याग कर, वे स्वयं को "गोविंद-गोविंद" कह रही हैं। [1] श्री कृष्ण की ही भा...

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अहो सहो नहिं जात अब

हे नंदनंदन (श्रीकृष्ण)! अब बहुत हुई, अब आपके दर्शन के बिना जीना असंभव है। श्री हरिचंद प्रार्थना कर रहे हैं कि हे परम करुणामय, अब मुझ पर कृपा कीजिए और ...

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श्रीपद अंकित ब्रज मही

ब्रज धाम की भूमि, श्री कृष्ण के चरण चिन्हों से अंकित है जिसकी छवि का वर्णन करना असंभव है। इस ब्रज धाम के रस का पान करने के लिए यदि स्वयं महालक्ष्मी का...

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जै जै श्रीवृंदावन देवी

श्री वृंदावन धाम की पटरानी, श्री राधारानी की जय हो! स्वयं देवों के देव, श्रीकृष्ण भी उनके चरण कमलों की सेवा करते हैं। [1] वे अपने अनगिनत गुणों से भक्...

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साधुन को सँग पाइ कै

संतों का संग पाकर श्री हरि का यशोगान करो। ऐसा जीवन जियो कि श्री हरि के प्रेम में भाव में उन्मत्त होकर नृत्य करने लगो।

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भटकयौ बहु बिधि जग बिपिन

मैं इस संसार रूपी जंगल में अनेक प्रकार से भटकता रहा, परंतु कहीं भी विश्राम और शांति नहीं मिली। जब से घनश्याम (श्री कृष्ण) के चरणकमलों की शरण प्राप्त ह...

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नित नित होरी ब्रज में रहौ

नित्य धाम ब्रज में होली का उत्सव नित्य-नित्य ही मनाया जाता है, जहाँ श्री हरि ब्रज की युवतियों संग आनंदपूर्वक क्रीड़ा करते हैं, और वे सदा दिव्य आनंद मे...

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सुत तिय गृह धन राज्य हू

पुत्र, पत्नी, घर, धन एवं राज्य आदि में सच्चा सुख नहीं है। परम आनंद केवल श्रीकृष्ण के चरणों में ही प्राप्त होता है।

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जै जै श्री घनश्याम वपु

जय हो उन श्यामसुंदर की, जिनका वपु घनश्याम मेघ के समान मोहक है। जय हो उन राधा की, जो सदैव उनके वाम भाग में अद्भुत माधुरी के साथ विराजती हैं। ब्रज भूमि...

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भजौं तो गुपाल ही कौं

यदि मैं पूजा करता हूँ तो वह केवल गोपाल की, यदि सेवा करता हूँ तो वह भी केवल गोपाल की — मेरा मन नंदलाल में ही सब भाँति से लगा हुआ है। [1] मेरा देव, देव...

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हमरे निर्धन की धन राधा

मेरे जैसे निर्धन की धन तो एक मात्र श्री राधा ही हैं। अनंत कोटि साधनों का त्याग करके बस मैंने इन्हीं के चरण कमलों को आराधा [भक्ति की] है। [1] इन्हीं [...

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नैनन के तारे दुलारे प्रान-प्यारे मेरे

मेरे नयनों के तारे, मेरे प्राणप्यारे नंदलाल ही मेरे सुख-दाता और दुख-हरने वाले हैं। [1] वे ही मेरे ध्यान, ज्ञान, वेद, पुराण — सब प्रमाणों के आधार हैं।...

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जौं हमरे दोसन लखौ तौ नहिं कछु अवलंब

हे प्रभु! यदि आप मेरे दोषों को ही निहारेंगे, तो फिर मेरे पास कोई भी अवलम्ब नहीं बचेगा। मेरी विनती है कि आप अपने उस स्वभाव की ओर दृष्टि करें, जो दीनों ...

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गुनी जन सेवक और चाकर

श्री हरिचंद कहते हैं कि हम दिव्य दंपत्ति श्री राधा कृष्ण के गुणी जनों के सेवक और उनकी बुद्धिमान सखियों के चाकर हैं। हम रसिक कवियों के चित्त में हैं, ...

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वेद भेद पायो नहीं

वेदों को भी भगवान का रहस्य नहीं मिल पाया और पुराण उन्हें खोजते-खोजते स्वयं पुराने (जीर्ण-शीर्ण) हो गए, फिर भी वे ईश्वर की थाह न पा सके। स्मृतियों ने भ...

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मनमोहन तें बिछुरी जबसौं

एक विरहिणी गोपी अपनी पीड़ा व्यक्त करती है कि जब से प्राणप्रिय मनमोहन से बिछुड़ी हूँ, मेरा यह शरीर नित्य अश्रुओं की धारा से प्रक्षालित (धुलता) होता रहता ...

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श्री वल्लभ वल्लभ कहौ

सांसारिक और आध्यात्मिक अन्य समस्त साधनों और आश्रयों का परित्याग कर, केवल श्री वल्लभ को ही अनन्य भाव से पुकारें। वे निश्चित ही आपको अपनी शरण में स्वीका...

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जय वृषभानु नन्दिनी राधा

श्री हरीचंद जी कहते हैं "जिनके चरण कमलों की वंदना भगवान शिव और ब्रह्मा करते हैं, वे श्री कृष्ण भी जिनकी आराधना करते हैं, उन वृषभानु नन्दिनी श्री राधा ...

general

जद्यपि हम सब भाँति ही

हे श्री कृष्ण! यद्यपि हम सर्वथा कपटी, निष्ठुर और मन्दबुद्धि हैं, तथापि आप हमारे दोषों पर ध्यान न देकर अपने परम कृपालु स्वभाव की ओर ही दृष्टि डालिये। आ...

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श्री राधे मोहिं अपनौ कब करिहौ

हे श्री राधे, कब आप मुझे अपना बना लोगी? कब इन नैनों से मैं युगल रूप रस की अमित माधुरी का नित्य पान करूँगा। [1] हे श्री राधे, कब इस दीन हीन को अपना ...

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हम चाकर राधा रानी के

हम श्री राधारानी की नित्य दासी हैं। हम हमेशा श्री जुगल किशोर की सेवा में उपस्थित हैं। हमारे राजा श्री कृष्ण हैं, और हमारी रानी श्री राधारानी हैं। [1] ...

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हमारे ब्रज की रानी राधे

हमारे ब्रज की रानी श्री राधे महारानी हैं जिनके वश में सबको वश में करने वाले श्री स्याम सुंदर मोहन लाल हैं एवं समस्त ब्रज के नर और नारी इनकी भक्ति करते...

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मेरी गति होउ सोई महरानी

मेरी गति श्री राधिका महरानी हैं जिनकी भौंहौं की हिलनि को कृपा प्राप्त करने हेतु नित्य ही श्याम सुंदर भी निहारते रहते हैं।

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ब्रज की लता-पता मोहि कीजै

कृपया मुझे ब्रज धाम में एक वृक्ष पर एक लता या एक पत्ता बना दें! तब मैं गोपियों के चरण कमलों से निसृत परम पवित्र रज में अपना सिर स्नान कर सकूंगा। और जब...