ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
7 itemsहे वृन्दाटवि मोहि अपनैयै
हे वृन्दावन, मुझे कृपाकर अपनाओ ! तुम ही श्री राधा का प्रकट रूप हो, और किसे अपनी प्रार्थना सुनाऊँ ? [1] माता के अतिरिक्त एक शिशु के अवगुणों को कौन त्य...
किशोरी, मोहि देहु वृन्दावन वास
हे किशोरी जू, मुझे वृन्दावन का वास प्रदान कीजिये, जहाँ मैं हाथ में करुवा लेकर एवं गले में प्रसादी गूंजा माला धारण कर कुञ्ज में निवास प्राप्त करूँ। [1]...
रूपरासि स्वामिनी हमारी
रूप की राशि, श्री राधा महारानी ही हमारी स्वामिनी हैं। यह ऐसी अलबेली सरकार हैं जो न केवल सखियों को प्राणों के समान प्यारी हैं एवं श्री कुंज बिहारी भी इ...
रुप हू के रुप तै अनूप रुप प्यारी को
श्रीराधा का रूप-सौंदर्य ऐसा है कि साक्षात रूप भी उनके अनुपम रूप-सौंदर्य की तुलना में फीका लगता है। वे समस्त संसार को उज्ज्वल करने वाली तथा जगजीवन श्री...
हम सौं बाँक न कीजिये, सुनो बाँकेबिहारी
एक भक्त श्री प्रिया जी [श्री राधा] के बल से बिहारीजी [कृष्ण] से कहता है कि हे बाँके बिहारी, सुनो! हम से तो तुम बाँकपन (टेडापन) मत ही करो। हम किशोरी जी...
बिहारी लाल बाँकरे जू अनोखे
श्री किशोरी अलि जी, श्री बिहारी जी से निवेदन करते हैं— हे बिहारी जी! आप अनोखे बाँके हैं। विविध प्रकार के अनोखे ख्याल लीलाएँ करते-करते कहीं मुझे धोखे म...
जिन जिन अपराधिन सिर नायौ
जिन-जिन अपराधी जीवों ने सिर झुकाकर और रसना से आपका नाम उच्चारित किया, उन्हें आपने अपने निज परिकर में स्थान देकर अपनी सेवा का अधिकारी बना लिया। [1] हे...