पद्मपुराण
जीवन चरित
श्री पद्मपुराण वाणी संग्रह
गोविंददेहतोऽभिन्नं पूर्णब्रह्मसुखाश्रयम्
गोविंददेहतोऽभिन्नं पूर्णब्रह्मसुखाश्रयम्। मुक्तिस्तत्र रजःस्पर्शात्तन्माहात्म्यं किमुच्यते॥ - पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 69, छंद 72 यह ...
कथितं ते प्रियतमे गुह्याद्गुह्योत्तमोत्तमम्
हे प्रियतम, मैंने तुमको गोपनीय से भी गोपनीय, रहस्यों का भी रहस्य, दुर्लभों से भी दुर्लभ सर्वोच्च श्री वृंदावन धाम के बारे में ही बताया है।
तत्स्पर्शपुष्पगंधादि नानासौरभसंभवः
श्री कृष्णवल्लभा श्रीराधिका ही आद्याप्रकृति हैं। उन राधिका के कोटि-कोटि कलांश से ही त्रिगुणमयी दुर्गा आदि देवियों का प्रादुर्भाव होता है। उन राधिका के...
इदमानंदकंदाख्यं विद्धि वृंदावनं
श्री कृष्ण कहते हैं: हे रुद्र, यह आनंद कंद ही मेरा निज धाम वृन्दावन है। इसमें प्रवेश मात्र से ही जीव सांसारिक आवागमन से मुक्त हो जाता है। जो मूर्ख मे...
सकृदावां प्रपन्नो वा
श्री कृष्ण शिव जी से कहते हैं - जो एक बार हम दोनों (मैं और श्री राधा) की शरण में आकर अथवा केवल मेरी प्रिया (श्री राधा) की शरण में आकर उनकी अनन्य भाव स...
वृंदावनपरित्यागो गोविंदस्य न विद्यते
श्री वृंदावन धाम को गोविंद कभी भी त्याग नहीं करते। अन्यत्र जगह जैसे मथुरा और द्वारका में जो उनका शरीर दृष्टिकर होता है वह कृतिम है, बनावटी है। इसमें त...
त्वमप्येनां समाश्रित्य राधिकां
भगवान कृष्ण कहते हैं - हे शिव! अत: आपको भी मेरी प्रिया श्री राधा की शरण लेनी चाहिए, सदा मेरे युगल मंत्र का जाप करना चाहिए, और मेरे धाम वृंदावन में रहन...
स्त्रियो म्लेच्छास्च पशवः
स्त्रियाँ, म्लेच्छ, पशु, पक्षी, अथवा मृग—जो भी ब्रज में मृत्यु को प्राप्त होते हैं, वे सब परम गति को प्राप्त कर लेते हैं।
पूर्णब्रह्मसुखैश्वर्यं नित्यमानंदमव्ययम्
पृथ्वी पर स्थित वृंदावन पूर्ण ब्रह्म का साकार रूप है जो परम सुख, ऐश्वर्य एवं नित्यानंद से परिपूर्ण है। वैकुंठ आदि लोक तो इसके केवल अंश मात्र हैं।
तस्योभयतटी रम्या
भगवान शिव पार्वती माता से कहते हैं - वृंदावन में स्थित यमुना के दोनों तट अत्यंत मनोहर हैं, वे शुद्ध स्वर्ण से निर्मित हैं और वे गंगा से करोड़ों गुना अ...
गुह्याद्गुह्यतरं रम्यं मध्ये वृंदावनं भुवि
पृथ्वी पर व्याप्त श्री वृंदावन समस्त रहस्यों से भी बड़ा रहस्य है। यह गोविंद का नित्य निवास स्थान है, एवं परमानंद स्वरूप है।
गुणातीतं महद्धाम पूर्णप्रेमस्वरूपकम्
यह पवित्र धाम गुणातीत है, एवं पूर्ण प्रेम स्वरूप है जहां वृक्ष इत्यादि भी भाव विभोर होकर [पुलक इत्यादि युक्त] आँसु बहाते हैं, फिर पूर्ण चेतना युक्त वि...
त्रैलोक्यगोपितं देवि
हे देवी, श्री वृंदावन को तीनों लोकों में गोपनीय रखा गया है एवं यह देवों के ईश्वर द्वारा भी पूजित है। यह नित्य ही भगवान ब्रह्मा आदि द्वारा वांछित है, ए...
दुर्लभानां च परमं दुर्लभं मोहनं
- पद्मपुराण, पातालखण्ड(5.69.7) पार्वती माता के पूछने पर शंकर जी द्वारा उत्तर: “ हे देवी ! समस्त स्थानों में गोप्य, सर्व शक्तिमय परम मोहन अतैव अत्यंत ...
वनं वृन्दावनं नाम नवपल्लवमण्डितम्
वृन्दावन नामक वन नवपल्लवों से सुशोभित है, जहां कोयल-भ्रमरादि मधुर-मधुर स्वरों से गान करते रहते हैं। यहाँ की कमनीयता काम देव के मन को भी मोहित करने वाल...
दुर्लभानां च परमं दुर्लभं मोहनं
पार्वती माता के पूछने पर शंकर जी द्वारा उत्तर: “ हे देवी ! समस्त स्थानों में गोप्य, सर्व शक्तिमय परम मोहन अतैव अत्यंत दुर्लभ, सर्व मूर्धन्य नित्य वृन्...