सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतरूप कुँवरि
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री रूप कुँवरि वाणी संग्रह

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बस गये नैनन माँहि बिहारी

बांके बिहारी की सुंदर छवि मेरी नेत्रों में समा गई है। जब से उस श्यामवर्ण मूर्ति को देखा, तब से वे छवि मेरे नेत्रों से हटती ही नहीं। उनके सिर पर मोरपंख...

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भजन बिन है चोला बेकाम

भगवान के भजन के बिना यह शरीर व्यर्थ है जो मल-मूत्र से भरा है और भक्ति न करने पर यह चाम (चमड़ी का पुतला) भी निष्फल हो जाता है। [1] भगवान के भजन के बिन...

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नाथ मुहिं कीजै व्रजकी मोर

हे नाथ! मुझे ब्रज की मोरनी बना लीजिए। मैं दिन-रात व्रज की गलियों में आपके लिए नृत्य करूँगी। [1] श्याम घटा के समान आपकी रूप-माधुरी को निहारती हुई चारो...

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हमपर कब कृपालु हरि हुइहौ

हे हरि! हम पर कब कृपा करोगे? मैं तो अत्यन्त अधम हूँ, और आप अधमों के उद्धारक— फिर अपनी प्रतिज्ञा कैसे न निभाओगे? हे प्रभु! आपने करोड़ों दुष्टों को तार ...

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बिहारी जू है तुम लौ मेरी दौर

हे बाँकें बिहारी जी! आप ही मेरे एकमात्र आश्रय हैं। [1] हे तीनों लोकों के मुकुटमणि प्रभु! आप सदैव से ही दीन-दुखियों की लाज रखते आए हैं। हे स्वामी! जो ...