श्री भोरी सखी
जीवन चरित
श्री श्री भोरी सखी वाणी संग्रह
दरसन दीजै नैंक दया कर
हे प्यारी जू! आप थोड़ी सी दया करते हुए, मुझे अपने दर्शन देने की कृपा करें। [1] जब आप कृपा करके अपनी मन्द-मधुर मुस्कान के साथ मुझे अपने दर्शन देंगी, तब...
इतनी है पुरुषार्थ मेरो
भावार्थ: श्री भोरी सखी जी, किशोरी जी से कह रही हैं कि मेरे से और कुछ तो बन नहीं पाता, न मैं जप जानती हूँ न ही तप, न योग और न ही कोई साधन नियम का निर्व...
कोटिक प्राण चरण पर वारौं
हे श्री राधे ! मैं आपके श्री चरणों पर अपने कोटि - कोटि प्राणो को न्योछावर करती हूँ। हे लाडिली ! आपके वे श्री चरण कैसे हैं, उन्हें मैंने सपने में भी नह...
सकुचत कहत कहावत दासी
हे श्री राधे ! मुझे स्वयं को आपकी दासी कहने तथा दूसरो के द्वारा स्वयं को आपकी दासी कहकर बुलाये जाने में अत्यधिक संकोच का अनुभव होता है ; क्योकि कहाँ त...
अधम उधारण पद रज प्यारी
हे मेरी प्यारी श्री राधे ! आपके चरणों की रज , घोर पापियों के जघन्य पापो का विनाश करने वाली है । जिस प्रकार आपके श्री चरण, कमल जैसे कोमल है, उसी प्रकार...
आपनि दसा कहा अब कहिये
हे प्यारी जू ! मैं अपनी दयनीय दशा के विषय में अब आपसे क्या कहूँ ? हे कृपानिधि ! आप जो कुछ भी करती हो , उसे करना तो आपके लिए उचित ही है; किन्तु मैं जो ...
जो पै सोचेहु इतनी कृपा प्यारी
हे प्यारी जू ! यदि आप मुझ पर थोड़ी सी कृपा करने की बात को अपने मन में सोच रही हो, तो हे वृषभानुनंदिनी ! आपके हृदय में तो कृपा का समुद्र हिलोरे ले रहा ह...
मन मेरौ बार-बार अभिलाखै
हे प्यारी जू ! मेरे मन में बार-बार अनेकानेक अभिलाषायें उठती रहती हैं। [1] मुझे वह सौभाग्य कब प्राप्त होगा, जब मैं आपकी रूप माधुरी का निरन्तर पान कर सक...
गरजत मैं हूँ फिरौंगी प्यारी
हे श्री राधे जू! मैं भी आपके बल पर गर्जना करते हुए [दहाड़ते हुए] श्रीवन में अवश्य ही डोलने लगूँगी। मैं अपनी सभी प्रकार की समस्त शंकाओं को भूलकर आपके ब...
प्यारी प्रीतम चरण-रज, दुर्लभ देहु मिलाय
श्रीहित भोरी सखी जी विनय करती हैं कि ऐसी कृपा हो जाए कि अत्यन्त दुर्लभ श्रीहित लाड़िली-लाल के श्रीचरणों की रज में मैं भी रज बनकर मिल जाऊँ। वे रसिकजन व...
रे मन नवल निकुंज की, सुमिर सोहनी प्रात
हे मेरे मन! तू प्रातःकाल नवल-निकुंज की उस सोहनी का स्मरण कर, जिसने अपने आपको श्री प्रियाजी के चरणों की रज से लपेट रखा है और जो किसी सहचरी के हाथ में स...
कण-कण में जा रेणु के, बसत लाल के प्रान
श्री प्रियाजी के चरणों की इस पावन रज (वृन्दावन-रज) के कण-कण में श्री लालजी के प्राण बसे हुए हैं। अरी सोहनी! इसे साधारण मत समझ; यह अत्यंत दिव्य और दुर्...
सर्वोपरि म्हारी महरानी
हमारी महारानी श्री राधिका रानी सर्वोपरि हैं, भगवान विष्णु, ब्रह्मा जी,भगवान शिव एवं सनकादिक भी श्री राधा रानी की महिमा को संपूर्ण रूप से नहीं जान पाए ...
प्यारी मोहिं ऐसौ जीवन भावै
हे प्यारी जू! मुझे इस प्रकार का जीवन व्यतीत करना अत्यधिक रुचिकर लगता है, यथा - जब आप नींद के आलस्य से भरी हुई हों, तब लता मन्दिर में सुखद शैया की रचना...
मैं भोरी मेरी भोरी किशोरी
हे किशोरी जू! जिस प्रकार में भोली हूँ, उसी प्रकार आप भी अत्यन्त भोली हैं, अतः जब मैंने अपने भोले-भाले ढंग से आपके सामने एक विनम्र प्रार्थना की है, तो ...
अब तौ क्या इस छबि पर वारौं
श्रीहित भोरीसखी जी कहती हैं कि मैं हमेशा यही सोचती रहती हूँ कि प्रेम की अद्वय युगल मूर्त्ति श्रीहित लाड़िली-लाल के अद्भुत सौन्दर्य सम्पन्न रूप की अनुप...
सुनहु कृपालु किशोरी ऐसी, आसा कौन पुजैहै
हे परम कृपालु किशोरी राधा! मेरी बात सुनिए! मेरी आशा को आपके अतिरिक्त कोई भी पूर्ण नहीं कर सकता है। आपके अतिरिक्त और कौन है जो मेरी बाँह पकड़कर मुझे अप...
ऐसी पीर हिये में व्यापै
हे श्री राधा, मेरे ह्रदय में आपके विरह की ऐसी पीड़ा हो कि मेरे नेत्रों से अविरल अश्रुधार प्रवाहित होने लगे, मैं नित्य आपका नाम रटने लगूँ और मेरा अंग-अं...
मैं तौ तोही कौं सिर नायौ
केवल आप ही हैं जिनके चरण कमलों में मैं पूर्ण रूप से समर्पित हूँ। यद्यपि मैं रोम-रोम से पापी हूँ, फिर भी मैं आपके हाथों बिक चुका हूँ। [1] आपने ही मुझे...
श्री यमुना के नीर लौं दिन दिन आपहि आप
हे प्यारी जू! आपके दर्शनाभाव में मेरे नेत्रों से अश्रुधारा उसी प्रकार निरंतर बहती रहती है, जैसे श्री यमुना का जल प्रतिदिन बहकर नवीन रूप में प्रवाहित ह...
कब बसिहौं ब्रज कुंजन माहीं
हे प्यारी जू ! मुझे ब्रज की कुंज निकुंजों में निवास करने का सुयोग कब मिलेगा ? ऐसा कब होगा कि मैं हिरण बनकर हिरण जैसे नेत्रों वाली आपको श्रीवन में निरन...
जीवन सफल कमल पग पेखे
हे श्रीराधे! आपके चरण-कमलों के दर्शन प्राप्त करने पर, मैं अपने जीवन को परम सफल अनुभव करूँगी। उस समय मुझे, श्रुतियों द्वार प्रतिपादित मार्ग पर चलना, सं...
ऐसौ स्वपन मोहि अति भावै
हे प्यारी जू [श्री राधा]! मेरे मन को ऐसा स्वप्न देखना बहुत अच्छा लगता है, जिसमें मन को मोहने वाली आपकी सुंदर छवि, मेरी आँखों के आगे आकर खड़ी हो जाए और...
महिमा अमित कही न परै
हे श्री राधे! तुम्हारी अगाध महिमा कहते नहीं बनती। जो शिव, एवं ब्रह्म भगवान श्री कृष्ण के चरणों की रज चाहते हैं, वही श्री कृष्ण तुम्हारे चरणों में पड़े...
बड़े भाग्य पग पंकज पेखौं
श्री भोरी सखी कह रही हैं "मेरे बड़े सौभाग्य हैं जो मुझे श्री राधा के चरण कमलों का दर्शन प्राप्त हुआ। [1] जिसके समक्ष मुझे मुक्ति-भुक्ति एवं सुख-दुःख सम...
रसिक संग बिनु प्रेम न होई़
प्रेम-रस के अनन्य उपासक अर्थात् रसिक संतों के संग के बिना हृदय में अति दुर्लभ प्रेम की उत्पत्ति नहीं हो सकती और जब तक अलबेली स्वामिनी श्रीराधा के चरण...
कबहूँ तौ लाड़िली ऐसी कृपा करौ री
हे श्री राधा! आप मेरे ऊपर कभी तो ऐसी कृपा करो कि जब आप एक कुंज से दूसरी कुंज में जाने के लिये जो रास्ता अपना रही हों, मैं उस रास्ते पर लेट जाऊँ और आपक...
कौंन भाग्य भरि नैंन निहारौ
हे प्यारी जू! मेरा ऐसा भाग्य कब उदित होगा कि मैं अपने नेत्रों से आपके दर्शन करूंगीं? आपके श्रीचरणों की नख रूपी चन्द्रमाओं की परम अद्भुत चाँदनी को देखे...
प्रीति की बाजी खेलिये प्यारी
हे प्यारी जू! आप मेरे साथ प्रीति की बाजी लगायें। मैं यह जानती हूँ कि मेरी प्रीति कच्ची और आपकी प्रीति सच्ची है; अतः मेरा हारना और आपका जीतना निश्चित ह...
कोटि विश्व ऐश्वर्य सुख
श्रीहित भोरीसखी जी कहती हैं कि अरी सोहनी ! करोड़ों विश्व के वैभव से प्राप्त होने वाला सुख, इस वृन्दावन की रज के एक कण की समता नहीं कर सकता है। इस रज क...
करुणा भरे प्रिया दृग तोरैं
हे श्रीप्रियाजू ! आपके नेत्रों में करुणा का सागर भरा हुआ है, जिसमें स्वाभाविक रूप से कृपा की ऊँची-ऊँची तरंगें उठती रहती हैं, जिन्होंने तीनों लोकों को ...
कण-कण पै वारौं यहाँ
श्री हित भोरी सखी जी कहती हैं — अरी सोहनी! मैं इस वृन्दावन की पावन रज के कण-कण पर अपने कोटि-कोटि तन, मन और प्राण न्यौछावर कर देने को तत्पर हूँ और तू इ...
इतनी कहौ कृपालु किशोरी
हे परम कृपालु नित्य नव किशोरी श्री राधे! आप मुझे इन बातों का आश्वासन तो प्रदान करो कि कभी न कभी आप मुझे अपनी कृपा भरी नजरों से अवश्य निहारोगी, कभी न क...
कौंन भाग्य पद पंकज पावौं
हे श्री राधे ! मेरा ऐसा सौभाग्य कब उदित होगा , जब मुझे आपके चरण-कमलो की संप्राप्ति होगी ? कृपा के जल से पूरित , उन अतिशय कोमल, अति सुन्दर एवं परम शीतल...
लटकि रहै मन लटकी लट सौं
श्री प्रिया जी के मुखारविन्द पर आ गई घुँघराली अलकों में श्री लाल जी का मन झूलता-झूमता रहता है। प्रेम के रंग में रँगी हुई श्री प्रिया जी, विविध प्रकार ...
सुख अपनौ चाहै नहीं
हे श्री राधा! स्वयं का सुख न चाहकर आपको सुख पहुँचाना ही प्रीति की रीति है। परंतु मेरे ये लालची नेत्र, आपके दर्शन की लालसा से, प्रति पल लालच में भर कर,...
कोटि जन्म लगि यह हठ मोरी
हे करुणा की अगाध समद्र, श्री राधा प्यारी जू! अब आपके चरण कमलों के अतिरिक्त मेरी अन्य कोई अभिलाषा नहीं है, चाहे उनको प्राप्त करने के लिये मुझे करोड़ों...
टेरी सुनौ वृषभानु किशोरी
हे श्री राधे, मेरी विनती सुनो! अधिकांश आयु वृथा ही बीत चुका है, बहुत कम अब शेष है। [1] दिन-रात बेचैनी से भटक रहा हूँ , और कोई दूसरा साधन नहीं मिला, म...
श्री प्यारी पद रेणु में, उमगत लोटत लाल
श्री प्रियाजी के चरणों की पावन रज में लोटते हुए श्री लालजी अपार आनंद का अनुभव करते हैं और अपने हाथों से चुटकी भर रज लेकर उसे अपने मस्तक पर तिलक के रूप...
एक बार छबि देखी तिनकौं
जिसे एक बार प्रेम-रस का धाम वृन्दावन और वहाँ की रसमयी सम्पन्नता को देखने का परम सौभाग्य मिल जाता है, उसे फिर तीनों लोकों की संपत्ति तुच्छ लगने लगती है...
पतित पावनी प्यारी हमारी
इस पद में श्री भोरी सखी जी वर्णन कर रहे हैं: हमारी स्वामिनी श्री राधा पतित को पावन करने वाली हैं। [1] श्री प्यारी जू का यह स्वभाव देखकर मेरे हृदय में ...
करहु कृपा अब श्यामा श्याम
हे श्री श्यामा श्याम, बहुत देर भई, अब मुझ पर अपनी कृपा कीजिये। आप करुणा के सागर हैं और दीन बंधुओं को सुख प्रदान करने वाले हैं। [1] आप आर्त जनों के दुः...
भोरी अब सब भाँति भरोसौ, चरण कमल सौं बांधा
श्री भोरी सखी कहती हैं कि "हे राधा! मुझे आपके सिवा किसी और पर भरोसा नहीं है, इसलिए मैंने अपना पूरा विश्वास आपके चरण कमलों से बांध दिया है।"
युगल रूप कैसे चितलावौं
भावार्थ: श्री भोरी सखी जी, किशोरी जी से कह रही हैं कि कैसे युगल रूप मेरे चित्त में आए? [1] ललित कुंजों में जो प्रियतम आपको नित नित लाड़ लड़ा रहे है उस...
लग्यौ नेह सब भाँति निभैहौ
हे प्यारी जू! आपसे मेरा जो यह प्रेम-संबंध जुड़ गया है, मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप इसे हर प्रकार से निभाएँगी। मेरे मन में यह दृढ़ भरोसा है कि आप अपने ...
तेरी ह्वै अब कौन सौं डरि हौं
श्री भोरी सखी जी इस पद में किशोरी जी की कृपा का वर्णन करते हुए कहती है, हे किशोरी जू ! आपके होते हुए मुझे किसी से किसी भी प्रकार का कोई भय (डर) नहीं ह...
कब मेरी सुधि करि हौ वृषभानु लड़ैती राधा
हे वृषभानु लाडिली श्री राधा, आप कब मेरा स्मरण करोगी? [1] आप सरल-हृदया हो और अकारण दया की अथाह सागर हो। [2] आप पतित जीवों को पावन करने वाली एवं उनका उद...
श्री वृन्दावन तोहि करूँ परनाम
जहाँ पर श्री श्यामा श्याम नित्य ही नई-नई केली लीलाएँ करते रहते हैं, ऐसे दिव्य श्री वृंदावन धाम को मैं प्रणाम करता हूँ। दिव्य श्री वृंदावन धाम के तट पर...
कब मेरी सुधि करि हौ वृषभानु लड़ैती राधा
हे वृषभानु लाडिली श्री राधा, आप कब मेरा स्मरण करोगी? [1] आप सरल-हृदया हो और अकारण दया की अथाह सागर हो। [2] आप पतित जीवों को पावन करने वाली एवं उनका उद...
सर्वोपरि म्हारी महरानी
हमारी महारानी श्री राधिका रानी सर्वोपरि हैं, जिन्होंने तीनों लोकों को मोहित करने वाले श्री श्यामसुंदर को जीत लिया है और उन्हें प्रेमामृत का दान कर रही...
इतनी बात कृपा करि दीजै
हे किशोरी ज़ू आप बस इतनी कृपा कर दीजिए की मेरे हृदय में आपसे मिलने की शीघ्रता जागजाय। आपकी विरह रूपी अग्नि में मेरा शरीर गल जाये। [1] किशोरी ज़ू आप कृ...
कौन भांति तुम रीझौ किशोरी
हे किशोरी जू। मेरे द्वारा क्या कुछ किये जाने पर आप मुझ पर प्रसन्न हो सकती हो ? हे कृपानिधि! आप मुझे वह तरकीब बतायें, जिसके करने से आप प्रसन्न हो जायें...
जेहि विधि तोहि प्यारी लागौं
हे प्यारी जू, मैं आपसे बार बार यही वर माँगता हूँ कि आप को जिस भाँति भी सुख मिले उसी भाँति ही केवल आप मुझे रखिए। [1 & 2] श्री राधे जू, मुझे एक मात्र आप...
Preeti Ki Baaji Kheliye Pyari
Preeti Ki Baaji Kheliye Pyaari.Haun Tau Kaachi Preeti Lai Aayi, Saanchi Preeti Laau Sukunwaari.Haun Tau Baaji Avas Hi Haarihaun, Jeeti Karau Nij Aagya...
Kabahoo Tau Laadili Aisi Kripa Karau Ri
Kabahoo Tau Laadili Aisi Kripa Karau Ri,Haun Tau Loti Rahau Kunjan Mag, Tum Hiy Aai Kai Paav Dharau Ri. [1]Haun Tau Laagi Rahau Charanan Saug, Tum Jhu...
Lagyo Neh Sab Bhanti Nibhaiho
Lagyo Neh Sab Bhanti Nibhaiho.Ye Mere Man Sudridh Bharoso, Baanh Gahe Ki Laaj Lajaeho. [1]Lok Ved Parlok Jati Kul, Paap Punya Dukh Dvand Chhudeho.‘Bho...
Kan Kan Pai Varon Yahan
Kan-Kan Pai Varaun Yahan, Kotin Tan Man Pran, So Raj Door Na Dar Too, Nainku Niharau Maan.- Shri Bhori Sakhi, Prem Ki Peer, Sohni Mahima (435.8)Śrī Hi...
Kaun Bhagya Bhari Nain Niharao
Kaun Bhagya Bhari Nain Niharao.Binu Nakh Chandra Chandika Dekhe, Tribhuvan Sab Andhiyarao. [1]Sahaj Chhabili Chhabi Ke Upar, Tribhuvan Sobha Warao.Bho...
Koti Vishv Aishwarya Sukh
Koti Vishv Aishwarya Sukh, Nahin Ju Ek Kan Tool.So Raj Tokon Khel Hai, Meri Jeevan Mool.- Shri Bhori Sakhi, Prem Ki Peer, Sohni Mahima (435.10)Shri Hi...
Karuna Bhare Priya Drig Tore
Karuna Bhare Priya Drig Torain.Sahaj Kripa Ki Uthat Tarangen, Tribhuvan Ras Mein Borain. [1]Umadat Kripa Sindhu Paripuran, Dis-Dis Let Hilorain.‘Bhori...